जबलपुर के स्मार्ट सिटी अस्पताल पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई पांच युवक हत्याकांड के आरोपी डॉक्टर से जुड़ा मामला
Jabalpur Smart City Hospital : जबलपुर में चर्चित पांच युवक हत्याकांड की जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। इस मामले के मुख्य आरोपी डॉक्टर से जुड़े स्मार्ट सिटी अस्पताल पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए अस्पताल को सील कर दिया है। जांच के दौरान अस्पताल में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिसके बाद अस्पताल का पंजीयन एक महीने के लिए निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब पूरे प्रदेश में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और नियमों के पालन को लेकर प्रशासन लगातार सख्ती बरत रहा है।
कलेक्टर के निर्देश पर हुई संयुक्त जांच
जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देश पर राजस्व विभाग और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने मदन महल स्थित स्मार्ट सिटी अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। अधिकारियों ने अस्पताल के विभिन्न विभागों का बारीकी से निरीक्षण किया और आवश्यक दस्तावेजों की जांच की।
निरीक्षण के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्होंने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी। प्राथमिक जांच में अस्पताल संचालन से जुड़े कई जरूरी नियमों का पालन नहीं पाया गया। इसके बाद अधिकारियों ने तत्काल प्रभाव से अस्पताल को सील करने का फैसला लिया।
मरीजों की सुरक्षा को दी गई पहली प्राथमिकता
प्रशासन ने कार्रवाई के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा कि भर्ती मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो। निरीक्षण के समय अस्पताल में नौ मरीज भर्ती थे। सभी मरीजों को एम्बुलेंस की मदद से सुरक्षित रूप से मेडिकल अस्पताल भेजा गया।
जब यह सुनिश्चित हो गया कि अस्पताल में कोई मरीज मौजूद नहीं है, तब प्रशासन ने अस्पताल को सील कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि मरीजों के इलाज में किसी तरह की बाधा न आए, इसलिए पहले वैकल्पिक व्यवस्था की गई।
पांच युवक हत्याकांड से जुड़ा है मामला
यह पूरा मामला 19 जुलाई को नरसिंहपुर जिले के सुआतला थाना क्षेत्र में हुए चर्चित पांच युवक हत्याकांड से भी जुड़ा हुआ है। इस मामले में पांच युवकों की हाइवा वाहन से कुचलकर हत्या कर दी गई थी।
पुलिस जांच में इस मामले में मुख्य आरोपी के रूप में डॉ. अमित खरे का नाम सामने आया। अब तक पुलिस इस प्रकरण में कुल नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसियों के अनुसार घटना के पीछे पुराने विवाद की बात सामने आई है और इसी एंगल से पुलिस आगे की जांच कर रही है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि हत्याकांड की आपराधिक जांच और अस्पताल पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई दोनों अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। अस्पताल पर कार्रवाई निरीक्षण में मिली प्रशासनिक और स्वास्थ्य संबंधी अनियमितताओं के आधार पर की गई है।
जांच में सामने आईं कई गंभीर खामियां
संयुक्त जांच टीम की रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल में कई जरूरी मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। निरीक्षण के दौरान पता चला कि अस्पताल में बिना अधिकृत पैथोलॉजिस्ट के पैथोलॉजी लैब संचालित हो रही थी। इसके अलावा बायो मेडिकल वेस्ट के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं मिली।
यहीं नहीं, अस्पताल के पास फायर सेफ्टी से जुड़े आवश्यक दस्तावेज भी मौके पर उपलब्ध नहीं थे। प्रशिक्षित स्टाफ की उपलब्धता और अन्य संचालन संबंधी मानकों में भी कमियां पाई गईं। स्वास्थ्य विभाग ने इन सभी बिंदुओं को गंभीर माना है।
जरूरी दस्तावेज नहीं दिखा सका अस्पताल प्रबंधन
जांच के दौरान अधिकारियों ने अस्पताल प्रबंधन से फायर एनओसी, भवन संबंधी अनुमति और अन्य वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा। लेकिन मौके पर अस्पताल प्रबंधन कोई भी वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सका।
स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड की जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल का पंजीयन डॉ. सुभाष चाटा के नाम पर दर्ज है। अब विभाग इस पूरे मामले के दस्तावेजों का अलग से परीक्षण कर रहा है।
पहले भी मिल चुकी थीं शिकायतें
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार स्मार्ट सिटी अस्पताल के खिलाफ पहले भी कई शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इनमें उपचार में लापरवाही, कथित गलत इलाज, फर्जी बीमा क्लेम और अन्य प्रशासनिक अनियमितताओं से जुड़े आरोप शामिल थे।
इन्हीं शिकायतों के आधार पर अस्पताल की विस्तृत जांच का निर्णय लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि सभी शिकायतों की अलग-अलग जांच की जाएगी और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
एक महीने का समय, फिर होगी अगली कार्रवाई
प्रशासन ने अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी करते हुए एक महीने के भीतर सभी आवश्यक दस्तावेज और स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यदि तय समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब और वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाते हैं, तो अस्पताल के खिलाफ नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल अस्पताल का पंजीयन एक महीने के लिए निलंबित कर दिया गया है।
