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Jabalpur News : वीआईपी कल्चर छोड़ जब साइकिल से कोर्ट पहुंचे हाई कोर्ट के जज, देखने वाले रह गए हैरान


  • जस्टिस डीडी बंसल पचपेढ़ी स्थित सरकारी आवास से साइकिल चलाकर हाई कोर्ट पहुंचे।
  • उन्होंने शहर की व्यस्त और भीड़भाड़ वाली सड़कों पर करीब 3 किलोमीटर तक साइकिल चलाई।
  • जस्टिस बंसल ने पीएम नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने की अपील का हवाला दिया।
  • कोर्ट का एक कर्मचारी भी बैग और टिफिन लेकर उनके साथ साइकिल से गया।
  • उन्होंने कहा कि यह सोचना पूरी तरह गलत है कि हाई कोर्ट का जज साइकिल नहीं चला सकता।
Jabalpur News : देश में ईंधन की बचत और पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का एक बड़ा और सकारात्मक असर देखने को मिला है। हाल ही में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस डीडी बंसल शहर की व्यस्त सड़कों पर अपनी सरकारी गाड़ी छोड़कर तीन किलोमीटर तक साइकिल चलाकर हाई कोर्ट पहुंचे। उन्होंने सिविल लाइंस के पचपेढ़ी स्थित अपने सरकारी आवास से अदालत तक का यह सफर तय किया। जस्टिस बंसल का मुख्य उद्देश्य संकट के इस दौर में पेट्रोल-डीजल की बचत करने और आम नागरिकों को इसके प्रति जागरूक करना था।

वीआईपी ठाठ छोड़ चुनी आम राह

अक्सर हम हाई कोर्ट के जजों को कड़ी सुरक्षा और बड़ी गाड़ियों के काफिले में चलते देखते हैं। लेकिन जस्टिस डीडी बंसल ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया। जब वे सुबह अपने घर से साइकिल पर निकले, तो सड़क पर चलने वाले आम लोग उन्हें देखकर हैरान रह गए। जबलपुर की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर संतुलन बनाते हुए वे बिना किसी हिचकिचाहट के आगे बढ़ते रहे। इस दौरान कोर्ट का एक कर्मचारी भी साइकिल पर उनके साथ था, जो उनका बैग, टिफिन और अन्य जरूरी सामान लेकर चल रहा था। जज साहब का यह अंदाज सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

प्रधानमंत्री की अपील और चीफ जस्टिस से मिली प्रेरणा

जस्टिस डीडी बंसल ने बताया कि यह कदम उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संकट के समय में की गई तेल बचाने की अपील के बाद उठाया है। उन्होंने पहली बार इस तरह साइकिल चलाकर कोर्ट तक का सफर तय किया। इसके साथ ही उन्होंने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा की प्रेरणा का भी विशेष रूप से जिक्र किया। जस्टिस बंसल का मानना है कि समाज के बड़े पदों पर बैठे लोगों को खुद आगे आकर एक उदाहरण पेश करना चाहिए, ताकि आम लोग भी उससे सीख ले सकें और देश हित में अपना योगदान दे सकें।

'जज साइकिल नहीं चला सकता, यह सोचना गलत है'

साइकिल से कोर्ट पहुंचने के बाद जस्टिस बंसल ने मीडिया और आम लोगों से खुलकर बात की। उन्होंने समाज की सोच पर चोट करते हुए कहा कि लोगों के मन में यह गलतफहमी होती है कि अगर कोई हाई कोर्ट का जज बन गया है, तो वह साइकिल से नहीं चल सकता। हमें इस सोच को बदलने की जरूरत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जहां तक संभव हो, हम सभी को साइकिल चलानी चाहिए और तेल की बचत करनी चाहिए। इससे न सिर्फ महंगे पेट्रोल-डीजल पर होने वाला खर्च बचेगा, बल्कि हमारा स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा और पर्यावरण को भी बड़ा फायदा पहुंचेगा।