सिर्फ 2 हजार रुपये... और फिर जो हुआ, उसने पूरे दफ्तर में मचा दी हलचल
Lokayukta MP : सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगने की शिकायतें अक्सर सामने आती रहती हैं, लेकिन जब शिकायत के बाद कार्रवाई भी तुरंत हो जाए तो यह खबर लोगों का ध्यान खींचती है। मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां लोकायुक्त इंदौर की टीम ने एक पटवारी को कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ लिया। इस कार्रवाई के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई है और सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
सारंगी उप तहसील में लोकायुक्त की कार्रवाई
झाबुआ जिले की सारंगी उप तहसील में गुरुवार को लोकायुक्त इंदौर की टीम ने पटवारी संजय अमलियार को 2 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया। टीम ने पहले शिकायत का सत्यापन किया और उसके बाद योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया।
बताया जा रहा है कि यह रिश्वत किसान की फार्मर आईडी से जुड़े काम के लिए मांगी गई थी। कार्रवाई के दौरान जैसे ही आरोपी पटवारी ने रुपये लिए, लोकायुक्त की टीम ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया।
किसान ने की थी शिकायत
जानकारी के मुताबिक, किसान पुनिया भूरिया को अपनी फार्मर आईडी में कृषि भूमि का सर्वे नंबर दर्ज करवाना था। आरोप है कि इस काम के बदले पटवारी संजय अमलियार ने 2 हजार रुपये की मांग की थी।
किसान ने रिश्वत देने के बजाय सीधे लोकायुक्त कार्यालय इंदौर में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त अधिकारियों ने पूरे मामले का सत्यापन किया। शिकायत सही पाए जाने पर ट्रैप की योजना बनाई गई और आरोपी को रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया गया।
फार्मर आईडी में सर्वे नंबर क्यों है जरूरी?
मध्य प्रदेश में किसानों से जुड़ी कई सरकारी योजनाओं, रिकॉर्ड अपडेट और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में फार्मर आईडी का महत्व लगातार बढ़ा है। कृषि भूमि का सही सर्वे नंबर दर्ज होना कई मामलों में जरूरी माना जाता है ताकि किसान के भूमि रिकॉर्ड और सरकारी दस्तावेजों में किसी तरह की गड़बड़ी न रहे।
इसी वजह से किसान समय पर अपना रिकॉर्ड अपडेट करवाना चाहते हैं। ऐसे में यदि सरकारी काम के बदले किसी कर्मचारी द्वारा अवैध राशि मांगी जाती है तो इससे आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत कैसे करें?
यदि किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा वैध सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगी जाती है, तो नागरिक संबंधित लोकायुक्त या भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शिकायत करते समय उपलब्ध साक्ष्य और पूरी जानकारी देना जांच को मजबूत बनाने में मदद करता है।
