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Kerala Monsoon Arrival 2026 : केरल में बारिश शुरू, मध्य प्रदेश के 39 जिलों में आंधी-तूफान का अलर्ट


Kerala Monsoon Arrival 2026 : केरल में मानसूनी हवाओं के सक्रिय होने के साथ ही देश में मानसून का आधिकारिक आगमन हो गया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने आज, 4 जून 2026 को पुष्टि की है कि मानसून ने केरल में प्रवेश कर लिया है, जिससे भीषण गर्मी से जूझ रहे दक्षिण भारत को बड़ी राहत मिली है। वहीं, उत्तर और मध्य भारत के राज्यों में प्री-मानसून गतिविधियां अपने चरम पर हैं। मध्य प्रदेश में आज 39 जिलों के लिए मौसम विभाग ने आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिससे किसानों और आम जनजीवन में हलचल तेज हो गई है।

केरल में मानसून का आधिकारिक प्रवेश

भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मानसून की शुरुआत आज केरल के तटों से हो गई है। हालांकि, शुरुआत में इसके 26 मई के आसपास आने का अनुमान था, लेकिन कुछ वातावरणीय कारणों से इसमें नौ दिनों की देरी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अरब सागर से उठने वाली मानसूनी हवाएं अब तेजी से आगे बढ़ रही हैं। अगले सात दिनों तक केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के तटीय इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है क्योंकि हवाओं की गति तेज रहने की संभावना है।

मध्य प्रदेश में प्री-मानसून की सक्रियता और अलर्ट

मध्य प्रदेश के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। हालांकि मानसून अभी राज्य से दूर है, लेकिन प्री-मानसून गतिविधियों ने राज्य के एक बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया है। मौसम विभाग ने आज राज्य के 39 जिलों में तेज आंधी और बारिश की चेतावनी जारी की है। इसमें विशेष रूप से उज्जैन, ग्वालियर, सागर और चंबल संभाग के जिलों को संवेदनशील माना गया है, जहां ओलावृष्टि की भी आशंका जताई गई है। नीमच, श्योपुर, मुरैना, टीकमगढ़ और छतरपुर जैसे जिलों में हवाओं की गति 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। वहीं, भोपाल स्थित मौसम केंद्र के अनुसार, अन्य 33 जिलों में 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बारिश होने का अनुमान है। इंदौर और शहडोल संभाग में फिलहाल मौसम शुष्क रहने की संभावना है और वहां धूप खिली रह सकती है।

मानसून कब पहुंचेगा मध्य प्रदेश?

सामान्य परिस्थितियों में केरल में मानसून आने के लगभग 15 दिनों के भीतर यह मध्य प्रदेश में दस्तक दे देता है। लेकिन इस वर्ष स्थिति थोड़ी भिन्न है। वर्तमान में प्री-मानसून गतिविधियां पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) और टर्फ लाइनों के कारण बनी हुई हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार मध्य प्रदेश में मानसून की एंट्री में 5 से 7 दिन की देरी हो सकती है। जहां प्रदेश में मानसून की सामान्य तिथि 15 जून होती है, वहीं इस बार इसके 20 से 22 जून के बीच आने के आसार हैं। पिछली बार, यानी 2025 में, मानसून 16 जून को राज्य में प्रवेश कर गया था, लेकिन इस साल वातावरणीय कारकों ने इसे थोड़ा विलंबित कर दिया है।

उत्तर और अन्य राज्यों का मौसम हाल

देश के अन्य हिस्सों की बात करें तो राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तराखंड में भी प्री-मानसून का असर दिख रहा है। ओडिशा, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश और ओलावृष्टि की संभावना बनी हुई है। दिल्ली में दो दिनों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है, जहां तेज हवाओं के साथ धूल भरी आंधी आने की आशंका है। 6 जून के आसपास पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी आंधी-तूफान की गति बढ़ने की उम्मीद है, जो तापमान में थोड़ी गिरावट ला सकती है। हालांकि, देश के कई हिस्सों में अभी भी पारा 40 डिग्री सेल्सियस के ऊपर बना हुआ है, जिससे गर्मी का असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। जैसे-जैसे मानसून की हवाएं उत्तर की ओर बढ़ेंगी, वैसे-वैसे तापमान में क्रमिक गिरावट दर्ज की जाएगी। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि प्री-मानसून की यह बारिश खरीफ की फसलों की तैयारी के लिए मददगार साबित होगी, लेकिन किसानों को ओलावृष्टि के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता है।