Sports News Without Access, Favor, Or Discretion!

  1. Home
  2. Latest Big News

अब गांवों में जमीन की रजिस्ट्री होगी और आसान, तहसीलदार-नायब तहसीलदार को मिले नए अधिकार


MP Property Registry : मध्य प्रदेश में जमीन की रजिस्ट्री कराने की प्रक्रिया अब पहले की तुलना में काफी आसान होने जा रही है। राज्य सरकार ने ग्रामीण इलाकों में संपत्ति से जुड़े कामों को तेज़ करने के लिए महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब तहसीलदार, प्रभारी तहसीलदार और नायब तहसीलदार भी जमीन की रजिस्ट्री कर सकेंगे। इससे गांवों में रहने वाले लोगों को बार-बार सब-रजिस्ट्रार कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और रजिस्ट्री का काम कम समय में पूरा हो सकेगा। यह बदलाव खास तौर पर उन परिवारों के लिए राहत लेकर आया है, जिन्हें स्वामित्व अधिकार योजना के तहत अपनी आबादी भूमि का कानूनी मालिकाना हक मिलना है। सरकार का मानना है कि अधिकारों के विकेंद्रीकरण से प्रशासनिक प्रक्रिया तेज़ होगी और ग्रामीणों को समय पर सेवाएं मिलेंगी।

स्वामित्व अधिकार योजना से जुड़े परिवारों को मिलेगा सीधा फायदा

राज्य सरकार की "स्वामित्व अधिकार रिकॉर्ड निष्पादन और पंजीकरण योजना-2026" का उद्देश्य उन परिवारों को कानूनी स्वामित्व अधिकार देना है जो बरसों से 'आबादी' ज़मीन पर रह रहे हैं, लेकिन जिनके पास इसके लिए कोई औपचारिक दस्तावेज़ नहीं हैं। सरकारी अनुमान के अनुसार प्रदेश के 48 लाख से अधिक परिवार इस योजना से लाभान्वित होंगे। रजिस्ट्री आसान होने के बाद लोगों को बैंक ऋण, सरकारी योजनाओं का लाभ और संपत्ति से जुड़े अन्य कानूनी अधिकार प्राप्त करने में भी सुविधा मिलेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से यह मांग उठती रही थी कि रजिस्ट्री प्रक्रिया को स्थानीय स्तर पर सरल बनाया जाए। अब नए आदेश के बाद यह मांग काफी हद तक पूरी होती दिखाई दे रही है।

तहसीलदार और नायब तहसीलदार को मिले सब-रजिस्ट्रार जैसे अधिकार

पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग ने अधिसूचना जारी कर तहसीलदार, प्रभारी तहसीलदार और नायब तहसीलदार को सीमित मामलों में सब-रजिस्ट्रार की शक्तियां प्रदान कर दी हैं। इसका मतलब है कि अब केवल सब-रजिस्ट्रार कार्यालय ही रजिस्ट्री का केंद्र नहीं रहेगा। जिन मामलों में स्वामित्व योजना लागू होगी, वहां संबंधित राजस्व अधिकारी भी रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। इस बदलाव का सबसे बड़ा असर ग्रामीण क्षेत्रों में दिखाई देगा, जहां कई बार लोगों को छोटी-सी रजिस्ट्री के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी।

सरकार ने स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क भी किया माफ

राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में पहले ही फैसला लिया जा चुका है कि स्वामित्व अधिकार योजना के अंतर्गत होने वाली रजिस्ट्री पर स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क पूरी तरह माफ रहेगा। यानी पात्र परिवारों को जमीन की रजिस्ट्री के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। इससे गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब दस्तावेज़ी प्रक्रिया सरल और कम खर्चीली होती है, तब अधिक लोग अपनी संपत्ति का कानूनी पंजीयन करवाने के लिए आगे आते हैं। इससे भूमि रिकॉर्ड भी अधिक व्यवस्थित होते हैं।

पंचायत उपकर की जिम्मेदारी अब सरकार उठाएगी

सरकार ने एक और अहम फैसला लेते हुए पंचायत उपकर को लेकर भी राहत दी है। अब पात्र मामलों में पंचायत उपकर की राशि राज्य सरकार स्वयं पंचायतों को उपलब्ध कराएगी। सरकारी अनुमान के अनुसार इस फैसले से राज्य के खजाने पर लगभग 3800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा। हालांकि सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को आर्थिक राहत देना और संपत्ति के कानूनी दस्तावेज़ तैयार करने की प्रक्रिया को प्रोत्साहित करना है।

अब राजस्व अधिकारी भी कर सकेंगे रजिस्ट्री का काम

नई अधिसूचना के बाद प्रदेश में कार्यरत 235 सब-रजिस्ट्रार के अलावा राजस्व न्यायालय का कार्य देखने वाले अधिकृत तहसीलदार, प्रभारी तहसीलदार और नायब तहसीलदार भी निर्धारित मामलों में रजिस्ट्री कर सकेंगे। इससे प्रशासनिक दबाव कम होगा और लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की संभावना है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां कर्मचारियों की कमी के कारण देरी होती थी, वहां यह व्यवस्था विशेष रूप से उपयोगी साबित हो सकती है।