शराबबंदी वाले गुजरात में जहरीली शराब का कहर, 9 की मौत, उज्जैन कनेक्शन आया सामने
Gujarat fake alcohol news : गुजरात में शराबबंदी है, फिर भी वहां जहरीली शराब पीने से एक के बाद एक मौतें हो रही हैं। यह खबर सुनकर हर कोई सोच में पड़ जाता है कि आखिर सख्त कानून के बावजूद यह जहर लोगों तक पहुंचा कैसे। भावनगर जिले से आई इस खबर ने पूरे इलाके को हिला दिया है। अब तक 9 लोगों की जान जा चुकी है, और मरने वालों में मध्य प्रदेश के मुरैना का एक व्यक्ति भी शामिल बताया जा रहा है।
पुलिस भर्ती की खुशी में रखी पार्टी, बन गई मातम
बात 16 अगस्त की रात की है। घोघा इलाके के खरकड़ी गांव में एक युवक का पुलिस में चयन हुआ था। इस खुशी में हरपाल सिंह गोहिल की बाड़ी में पार्टी का इंतजाम किया गया। पार्टी के लिए शराब घनश्याम नाम के एक तस्कर से मंगाई गई थी। यह शराब 'रॉयल स्टैग' की बोतलों में सप्लाई की गई थी, यानी ऊपर से देखने पर किसी को शक तक नहीं हुआ होगा।
पार्टी खत्म हुई और कुछ ही घंटों में लोगों की तबीयत बिगड़नी शुरू हो गई। एक-एक करके दूसरे इलाकों से भी ऐसी ही शिकायतें आने लगीं। कुछ लोगों की हालत तो इतनी तेजी से बिगड़ी कि उन्हें अस्पताल तक ले जाने का मौका ही नहीं मिला।
उज्जैन से भावनगर तक शराब की तस्करी, 13 पेटियां अब भी लापता
पुलिस की शुरुआती जांच में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। शराब की कुल 28 पेटियां उज्जैन से भावनगर भेजी गई थीं। इनमें से पुलिस अब तक सिर्फ 15 पेटियां ही बरामद कर पाई है।
बाकी 13 पेटियां कहां गईं, यह अभी भी पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ है। यही वजह है कि प्रशासन की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या 41 तक पहुंच गई है। इनमें से 7 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है और डॉक्टर उन पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं।
1000 गांवों में अलर्ट, पुलिस की 15 टीमें मैदान में
संदिग्ध शराब कहां-कहां तक पहुंची है, इसका सही अंदाजा किसी को नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह जहरीली खेप आसपास के कई गांवों तक फैल चुकी है।इसी आशंका के चलते गुजरात पुलिस ने करीब 1000 गांवों को हाई अलर्ट पर रखा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच स्टेट मॉनिटरिंग सेल को सौंप दी गई है।
पुलिस ने कुल 15 टीमें इस काम में लगाई हैं। इनमें से 5 टीमें अस्पतालों में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों से बात कर सबूत जुटा रही हैं। 5 और टीमें संदिग्ध बोतलों और शराब की सप्लाई चेन को खंगाल रही हैं। बाकी बची टीमें मूल सप्लायरों और पूरे तस्करी नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश में जुटी हैं।
रईस, जुबेर और गौतम सोलंकी की भूमिका जांच के घेरे में
जांच में अब तक जिन नामों का जिक्र आया है, वे हैं रईस और जुबेर। पुलिस के मुताबिक इन दोनों का संबंध उज्जैन से बताया जा रहा है। इसके अलावा भावनगर के गौतम सोलंकी की भूमिका भी पुलिस की जांच के दायरे में है। आरोपियों तक पहुंचने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए गुजरात पुलिस अब मध्य प्रदेश पुलिस की भी मदद ले रही है।
मिथाइल अल्कोहल और डिनेचर्ड स्पिरिट
अब सवाल यह है कि आखिर इस शराब में ऐसा क्या मिलाया गया, जिससे इतनी मौतें हो गईं। जांच में सामने आया है कि तस्करी से लाई गई शराब में स्थानीय स्तर पर मिथाइल अल्कोहल मिलाए जाने का शक है।
इसके साथ ही डिनेचर्ड स्पिरिट के इस्तेमाल का एंगल भी जांच में शामिल हो गया है। यह पदार्थ आमतौर पर औद्योगिक कामों में इस्तेमाल होता है, लेकिन जब इसका इस्तेमाल पीने की शराब बनाने में किया जाता है, तो यह जानलेवा साबित हो सकता है।
मिथाइल अल्कोहल शरीर के लिए सीधा जहर है। इसकी ज्यादा मात्रा सेवन करने वाले की जान ले सकती है, जबकि कम मात्रा में भी यह आंखों की रोशनी छीन सकता है। हालांकि शराब में असल में कौन सा केमिकल कितनी मात्रा में मिलाया गया, इसकी पूरी तस्वीर एफएसएल यानी फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगी।
फरार आरोपियों की तलाश जारी
फिलहाल पुलिस का पूरा फोकस दो चीजों पर है। पहला, बाकी बची 13 पेटियों को जल्द से जल्द बरामद करना, ताकि और लोगों की जान बचाई जा सके। दूसरा, फरार आरोपियों को पकड़ना और पूरे तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश करना। संदिग्ध बोतलों और शराब के सैंपल फोरेंसिक जांच के लिए भेजे जा चुके हैं। जैसे ही रिपोर्ट आएगी, यह साफ हो जाएगा कि शराब में आखिर कितना जहर घोला गया था।
गुजरात में शराबबंदी के बावजूद इस तरह की घटनाएं बार-बार यह सवाल खड़ा करती हैं कि क्या कानून सिर्फ कागजों पर ही सख्त है। जमीनी स्तर पर तस्करी रोकने के लिए और पुख्ता इंतजाम की जरूरत महसूस हो रही है।
