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लो जी, धनतेरस पर गांव वालों की जमीन भी पक्की! सीएम साहब का बड़ा तोहफा

धनतेरस पर मोरेना के करुआ गांव से विशेष अभियान शुरू होगा। सरकार का लक्ष्य 15 नवंबर तक 20 लाख रजिस्ट्री पूरी करने का है, ताकि ग्रामीणों को कानूनी मालिकाना हक मिल सके।
Mukhyamantri Registry Yojana

Mukhyamantri Registry Yojana : धनतेरस के दिन मध्य प्रदेश सरकार ने गांव वालों के लिए एक ठोस कदम उठाया है। शुक्रवार 6 नवंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुरैना जिले के ग्राम करुआ पहुंच रहे हैं। वहां मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना के तहत स्वामित्व दस्तावेजों के पंजीयन अभियान में वे खुद शामिल होंगे। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर भी इस कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे।

यह कोई सामान्य कार्यक्रम नहीं है। राज्य सरकार ने धनतेरस के मौके पर पूरे प्रदेश के चयनित गांवों में विशेष अभियान चलाने का फैसला लिया है। लक्ष्य साफ है। पात्र हितग्राहियों की संपत्तियों का शत प्रतिशत पंजीयन कराना। मंत्री, सांसद और विधायक भी अपने अपने क्षेत्रों के गांवों में पहुंचकर इस काम में हिस्सा ले रहे हैं।

प्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत अब तक 17.09 लाख से अधिक रजिस्ट्रियां पूरी हो चुकी हैं। सरकार ने 15 नवंबर तक इस आंकड़े को 20 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। धनतेरस वाला यह विशेष अभियान उसी दिशा में एक बड़ा धक्का है।

योजना का मकसद सीधा है। ग्रामीण इलाकों में घर और आबादी जमीन पर रहने वाले परिवारों को कानूनी मालिकाना हक देना। सर्वे के बाद पात्र लोगों को अधिकार अभिलेख और स्वामित्व दस्तावेज दिए जा रहे हैं। इन कागजों के आधार पर बैंक से लोन लेना आसान हो जाएगा। परिवार आर्थिक रूप से थोड़ा और मजबूत हो सकते हैं।

ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से एक समस्या रही है। लोग पीढ़ियों से जमीन पर रह रहे हैं, घर बना रखा है, लेकिन कानूनी दस्तावेज नहीं है। बैंक वाले कहते हैं कागज़ दिखाओ, नहीं तो लोन नहीं। सरकारी योजनाओं में भी दिक्कत आती है। स्वामित्व योजना इसी गैप को भरने की कोशिश है। केंद्र की स्वामित्व योजना के साथ राज्य सरकार की मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना मिलकर काम कर रही है। सरकार स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क खुद वहन कर रही है। परिवारों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ रहा।

मुरैना के करुआ गांव से शुरू हो रहा यह अभियान सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं है। पूरे राज्य में चयनित गांवों में एक साथ काम चल रहा है। जहां 100 प्रतिशत रजिस्ट्री हो जाएगी, वहां जनप्रतिनिधि खुद मौजूद रहकर दस्तावेज सौंपेंगे। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बढ़ेगी और लोगों का भरोसा भी।

योजना के आंकड़े देखें तो छिंदवाड़ा, राजगढ़, उज्जैन जैसे जिले आगे चल रहे हैं। लेकिन काम अभी अधूरा है। 15 नवंबर तक 20 लाख का लक्ष्य पूरा करने के लिए हर जिले में गति बढ़ानी होगी। सर्वे का काम भी कई जगहों पर जारी है। आबादी भूमि के सर्वे पूरा होने पर हितग्राहियों की संख्या और बढ़ सकती है।

इस पूरे प्रयास का असली फायदा तब दिखेगा जब गांव का कोई परिवार बैंक में जाकर अपनी संपत्ति के दस्तावेज दिखाकर लोन ले सकेगा। खेती के लिए ट्रैक्टर खरीदना हो, छोटे व्यवसाय की शुरुआत करनी हो या घर की मरम्मत करवानी हो, कानूनी दस्तावेज होने से रास्ता आसान हो जाता है।

धनतेरस संपत्ति और समृद्धि का त्योहार माना जाता है। सरकार ने इसी दिन को चुना है ताकि संदेश साफ जाए। गांव वालों को सिर्फ दिवाली की बधाई नहीं, असली संपत्ति का हक भी मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री खुद मुरैना पहुंचकर इस अभियान की शुरुआत कर रहे हैं। यह दिखाता है कि योजना को सिर्फ फाइल में नहीं, जमीन पर उतारने का इरादा है।

आगे की चुनौती रफ्तार बनाए रखने की है। सर्वे की गुणवत्ता, दस्तावेज सही समय पर मिलना और लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना। अगर ये तीन चीजें ठीक रहीं तो 20 लाख का लक्ष्य सिर्फ आंकड़ा नहीं रहेगा। हजारों परिवारों के लिए असली सहारा बनेगा।