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ग्रामीण विकास विभाग के बाबू के 5 ठिकानों पर लोकायुक्त की दबिश, 6 करोड़ से ज्यादा संपत्ति की जांच

सिवनी में पदस्थ सुभाष शर्मा के जबलपुर स्थित घर समेत पांच ठिकानों पर शनिवार तड़के करीब 3 बजे कार्रवाई, आय से अधिक संपत्ति के मामले में दस्तावेज और संपत्तियों की जांच जारी
Jabalpur Lokayukt News

Jabalpur Lokayukt News :  मध्य प्रदेश के जबलपुर में शनिवार की सुबह उस समय हलचल बढ़ गई, जब लोकायुक्त पुलिस की टीम ने एक सरकारी कर्मचारी से जुड़े पांच ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। मामला सिवनी में पदस्थ बाबू सुभाष शर्मा से जुड़ा बताया जा रहा है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक लोकायुक्त ने आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार से जुड़े संदेह की जांच के तहत यह कार्रवाई की है। 

जबलपुर स्थित आवास समेत पांच स्थानों पर शनिवार तड़के करीब 3 बजे टीमें पहुंचीं। शुरुआती रिपोर्ट में 6 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का जिक्र किया गया है, हालांकि जांच पूरी होने और आधिकारिक संपत्ति विवरण सामने आने के बाद ही इस आंकड़े की अंतिम पुष्टि हो सकेगी।

सिवनी में पदस्थ हैं सुभाष शर्मा

प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार सुभाष शर्मा सिवनी स्थित क्षेत्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज प्रशिक्षण केंद्र में बाबू के पद पर पदस्थ हैं। लोकायुक्त की कार्रवाई का एक सिरा सिवनी से जुड़ा है, जबकि तलाशी का प्रमुख ठिकाना जबलपुर में बताया गया है।

शनिवार सुबह हुई इस कार्रवाई के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि सरकारी सेवा में कार्यरत एक कर्मचारी की घोषित आय और उसके नाम या उससे जुड़े लोगों के पास मौजूद संपत्तियों के बीच कितना अंतर सामने आता है।

हालांकि, इस स्तर पर किसी भी संपत्ति को अंतिम रूप से "बेनामी" या अवैध घोषित करना उचित नहीं होगा। ऐसी कार्रवाई के बाद जांच एजेंसी दस्तावेज, आय के स्रोत, बैंक रिकॉर्ड, जमीन-मकान से जुड़े कागजात और अन्य वित्तीय जानकारी का मिलान करती है। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आता है।

तड़के 3 बजे पांच ठिकानों पर पहुंची टीम

लोकायुक्त की कार्रवाई का समय भी इस मामले को खास बनाता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक टीमों ने शनिवार तड़के करीब 3 बजे एक साथ अलग-अलग ठिकानों पर तलाशी शुरू की। जब किसी मामले में एक से ज्यादा स्थानों पर कार्रवाई होती है, तो जांच एजेंसी का उद्देश्य संबंधित व्यक्ति की चल-अचल संपत्ति और वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों को एक साथ खंगालना होता है।

जबलपुर स्थित आवास इस कार्रवाई का प्रमुख ठिकाना बताया गया है। इसके अलावा चार अन्य स्थानों पर भी टीमों के पहुंचने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, सभी पांच स्थानों से क्या-क्या मिला, इसकी विस्तृत आधिकारिक सूची अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।

6 करोड़ से ज्यादा संपत्ति की बात, लेकिन अंतिम आंकड़ा बाकी

इस कार्रवाई से जुड़ी शुरुआती खबरों में 6 करोड़ रुपये से अधिक की बेनामी संपत्ति का उल्लेख किया गया है। यही आंकड़ा फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा में है।

लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है। लोकायुक्त की तलाशी के दौरान सामने आने वाली संपत्ति और जांच के बाद प्रमाणित "आय से अधिक संपत्ति" के आंकड़े एक ही चीज नहीं होते।

जांच एजेंसी को पहले यह देखना होता है कि संबंधित कर्मचारी की सेवा अवधि में उसकी वैध आय कितनी रही। इसके बाद उसकी संपत्तियों, बैंक खातों, निवेश, जमीन, मकान और अन्य परिसंपत्तियों की कीमत और खरीद के स्रोत की पड़ताल होती है। परिवार के सदस्यों या संबंधित व्यक्तियों के नाम पर मौजूद संपत्तियों की भूमिका भी जांच का हिस्सा बन सकती है।