सहायक राजस्व अधिकारी के घर लोकायुक्त की दबिश, 31 साल की नौकरी में आय से 1.73 करोड़ ज्यादा खर्च का शक
Indore Lokayukta raid : इंदौर में शुक्रवार 14 अगस्त की सुबह लोकायुक्त पुलिस की एक टीम अचानक शहर के दो पतों पर पहुंची। दस्तक नगर निगम में सहायक राजस्व अधिकारी (एआरओ) के पद पर तैनात जितेंद्र कुमार पांडेय के घर और दफ्तर से जुड़े ठिकाने पर दी गई। आय से अधिक संपत्ति जुटाने की शिकायत के बाद यह कार्रवाई शुरू हुई है, और मौके पर छानबीन का सिलसिला अभी थमा नहीं है।
क्या है पूरा मामला
लोकायुक्त सूत्रों के मुताबिक जितेंद्र कुमार पांडेय की सरकारी नौकरी करीब 31 साल पुरानी है। इस दौरान उनकी दर्ज वैध आमदनी लगभग 80 लाख रुपये आंकी गई है। इसके उलट, प्रारंभिक पड़ताल में सामने आया है कि इसी अवधि में उन्होंने करीब 2.53 करोड़ रुपये खर्च किए। यानी खर्च और आमदनी के बीच का यह फासला जांच का मुख्य आधार बना है।
टीम का दावा है कि पांडेय के पास अपनी वैध कमाई की तुलना में लगभग 1.73 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति और व्यय के सबूत मिले हैं। हालांकि यह आंकड़ा अभी शुरुआती आकलन पर आधारित है, और तलाशी पूरी होने के बाद ही अंतिम रकम स्पष्ट हो सकेगी।
सुबह से जारी है सर्चिंग, दस्तावेज खंगाल रही टीम
लोकायुक्त की टीम शुक्रवार सुबह दोनों पतों पर एक साथ पहुंची, ताकि किसी भी तरह के दस्तावेज या सबूत को इधर-उधर होने से रोका जा सके। छापे की कार्रवाई के दौरान टीम बैंक पासबुक, संपत्ति के कागजात, निवेश से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेज खंगाल रही है। अभी तक किसी नकदी, सोने-चांदी या अचल संपत्ति के ब्योरे को लेकर आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गई है, और इस बारे में पूरी जानकारी जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।
आय से अधिक संपत्ति के मामलों पर क्यों है सख्ती
मध्य प्रदेश में बीते कुछ महीनों से लोकायुक्त संगठन आय से अधिक संपत्ति के मामलों में लगातार सक्रिय नजर आ रहा है। नगर निगम, बिजली विभाग और अन्य सरकारी महकमों के कई अधिकारियों के ठिकानों पर इस साल पहले भी छापेमारी हो चुकी है। इस तरह की कार्रवाइयां आमतौर पर शिकायत मिलने और प्रारंभिक सत्यापन के बाद ही शुरू की जाती हैं, ताकि सबूतों के आधार पर ठोस कार्रवाई हो सके।
आगे क्या होगा
फिलहाल जांच अपने शुरुआती चरण में है। तलाशी पूरी होने के बाद लोकायुक्त टीम बरामद दस्तावेजों का बारीकी से आकलन करेगी, जिसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी। नियमानुसार, अगर आय से अधिक संपत्ति के आरोप जांच में पुख्ता पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया जा सकता है।
