नरसिंहपुर तहसील में लोकायुक्त की दबिश: ₹3000 रिश्वत लेते बाबू पकड़ाया, तहसीलदार मैडम हुई फुर्र
Narsinghpur Lokayukta Trap : नरसिंहपुर के गाडरवारा में आज तहसील दफ्तर का माहौल एकदम बदल गया। सुबह तक सब कुछ रोज जैसा ही चल रहा था, कागज इधर से उधर हो रहे थे, लोग अपने काम की फाइल लेकर लाइन में खड़े थे। लेकिन जैसे ही जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने दफ्तर में कदम रखा, पूरा नजारा ही पलट गया।
जानकारी के मुताबिक, गाडरवारा निवासी आशीष कौरव ने जबलपुर लोकायुक्त पुलिस से शिकायत की थी कि उसके एक सरकारी काम के बदले ₹3000 की रिश्वत मांगी जा रही है। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त टीम ने पहले इसकी प्राथमिक जांच की। शिकायत सही पाए जाने पर अधिकारियों ने ट्रैप की पूरी योजना तैयार की।
शिकायतकर्ता तहसील कार्यालय पहुँचा और उसने केमिकल लगे नोट आरोपी को सौंप दिए। जैसे ही आरोपी ने पैसे लिए, वहाँ पहले से मौजूद लोकायुक्त की टीम ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया। प्रक्रिया के अनुसार, जब आरोपी के हाथ धोए गए तो पानी गुलाबी हो गया, जिससे यह पुष्टि हुई कि उसने रिश्वत ली थी।
सरकारी कर्मचारी नहीं, निजी व्यक्ति निकला आरोपी
इस मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पकड़ा गया अजय श्रीवास्तव नियमित सरकारी कर्मचारी नहीं बताया जा रहा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार वह निजी व्यक्ति के रूप में कार्यालय में काम कर रहा था, लेकिन लोगों के कामकाज में उसकी सक्रिय भूमिका थी।
यही वजह है कि अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर किसी गैर-शासकीय व्यक्ति को सरकारी दफ्तर में इतनी जिम्मेदारी कैसे मिल गई। यदि कोई निजी व्यक्ति सरकारी फाइलों और आम नागरिकों के काम में दखल दे रहा था, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी थी? यही पहलू जांच एजेंसियों के लिए अहम बन गया है।
तहसीलदार मैडम कहां गईं
अब सबसे दिलचस्प और सवाल खड़ा करने वाला हिस्सा यही है। जैसे ही लोकायुक्त टीम की दबिश की खबर तहसील दफ्तर में फैली, तहसीलदार मैडम चुपचाप दफ्तर से निकल गईं। जिस कुर्सी की जिम्मेदारी उनकी थी, उसी कुर्सी पर बैठा एक प्राइवेट आदमी रिश्वत ले रहा था, और मैडम खुद मौके से गायब हो गईं।

इससे यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर एक गैर-सरकारी व्यक्ति को दफ्तर के अंदर बाबू की तरह काम करने की छूट किसने दी। क्या तहसीलदार को इसकी जानकारी थी, या फिर यह पूरा खेल उनकी नाक के नीचे चुपचाप चल रहा था।
अब केस दर्ज
लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी अजय श्रीवास्तव के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया है। साथ ही, फरार हुई तहसीलदार की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी गई है। देखना यह होगा कि जांच में यह सामने आता है कि तहसीलदार को इस पूरे मामले की जानकारी थी या नहीं, और आखिर एक प्राइवेट व्यक्ति को दफ्तर में इतनी छूट किसने दी।
फिलहाल गाडरवारा में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग यह भी पूछ रहे हैं कि अगर एक जगह ऐसा हो सकता है, तो बाकी दफ्तरों में भी कहीं यही खेल तो नहीं चल रहा।
प्रधानमंत्री आवास योजना मे सहायक सचिव मांग रहा था 30 हजार रुपये
दूसरा मामला दमोह जिले की जनपद पंचायत जबेरा अंतर्गत ग्राम पंचायत परासईं में सागर लोकायुक्त टीम ने कथित रूप से 8 हजार रुपये की रिश्वत लेते सहायक सचिव राजेश सिंह लोधी को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।
शिकायतकर्ता संजू रैकवार का आरोप है कि उनके एवं उनकी माता के प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्य के एवज में करीब 30 हजार रुपये की मांग की गई थी। उनका कहना है कि पहले 22 हजार रुपये लिए जा चुके थे, जिसके बाद दोबारा 8 हजार रुपये की मांग की गई

शिकायत के बाद सागर लोकायुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए सहायक सचिव को रिश्वत की राशि लेते हुए पकड़ लिया। मामले में लोकायुक्त पुलिस द्वारा आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है
