Lokayukta MP News : मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार किस कदर
व्याप्त है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जहां पर पड़ोसी जिले की सीमा पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव लाडली बहन योजना की कार्यक्रम में शिरकत कर रहे थे तो वही पड़ोसी जिले सिवनी में लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्यवाही की है लोकायुक्त की विशेष टीम ने एक ही दिन में दो अलग-अलग जगहों पर जाल बिछाकर एक सरकारी बाबू और एक पुलिस असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। यह पूरी कार्रवाई शिकायतकर्ताओं की गुप्त सूचना और लोकायुक्त टीम के सटीक जाल के कारण सफल हो पाई। इस दोहरे एक्शन से पूरे जिले के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
विकासखंड कार्यालय में पहली कार्रवाई
पहली घटना सिवनी जिले के धनौरा स्थित विकासखंड कार्यालय की है। यहाँ पदस्थ सहायक ग्रेड-3 के कर्मचारी अरुण कुमार कुमरे को लोकायुक्त की टीम ने 10 हजार रुपये की घूस लेते हुए मौके पर ही दबोच लिया। इस मामले की शुरुआत तब हुई जब सुनवारा के एक शासकीय स्कूल में भृत्य (चपरासी) के पद पर तैनात देवेंद्र कुमार ने लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई। देवेंद्र कुमार पहले भीमगढ़ में पदस्थ थे, जहाँ निलंबन की अवधि के दौरान उनका 14 महीने का निर्वाह भत्ता रोक दिया गया था। इस रुके हुए भत्ते को जारी करने के एवज में आरोपी बाबू अरुण कुमार कुमरे ने 25 हजार रुपये की भारी-भरकम रिश्वत मांगी थी। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त टीम ने मामले का सत्यापन किया और आरोपी को पकड़ने के लिए एक योजना बनाई। योजना के मुताबिक, जब पीड़ित पहली किस्त के रूप में 10 हजार रुपये देने पहुँचा, तो टीम ने इशारा मिलते ही बाबू को रंगे हाथों पकड़ लिया। केमिकल टेस्ट में बाबू के हाथ लाल होते ही दफ्तर के बाकी कर्मचारियों में सन्नाटा पसर गया।
कोतवाली थाने में दूसरा जाल
अभी धनौरा की कार्रवाई की चर्चा शांत भी नहीं हुई थी कि लोकायुक्त की टीम ने उसी दिन दूसरी बड़ी कार्रवाई सिवनी के कोतवाली थाने में कर दी। यहाँ पदस्थ एएसआई दिनेश रघुवंशी को भी टीम ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी एएसआई दिनेश रघुवंशी का पुराना रिकॉर्ड भी विवादित रहा है। इससे पहले जब वह जुन्नारदेव थाने में तैनात था, तब भी ग्रामीणों को परेशान करने और अवैध मांगें पूरी न होने पर डराने-धमकाने की शिकायतें आती रहती थीं। इस बार लोकायुक्त ने पुख्ता सबूतों के आधार पर जाल बिछाया और एएसआई को कानून के दायरे में ला खड़ा किया।
भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम
लोकायुक्त पुलिस ने इन दोनों मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत अलग-अलग केस दर्ज कर लिए हैं। दोनों अधिकारियों से पूछताछ की जा रही है और उनके सेवा रिकॉर्ड की भी जांच हो सकती है।