चप्पल घिसवा रही थी मेडम,किसान की शिकायत पर लोकायुक्त ने ऐसे सिखाया सबक 7 हजार की घूस लेते पटवारी रंगेहाथ गिरफ्तार
Lokayukta action MP : मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला राजगढ़ जिले से सामने आया है, जहां लोकायुक्त पुलिस भोपाल की टीम ने एक महिला पटवारी को रिश्वत लेते हुए दबोच लिया। जमीन के नामांतरण के नाम पर सात हजार रुपए की अवैध डिमांड की जा रही थी। लोकायुक्त की इस अचानक कार्रवाई से स्थानीय महकमे में हड़कंप मच गया है।
जीरापुर इलाके में हुई इस कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी दफ्तरों में चल रहे खेल की पोल खोल दी है। आम लोग छोटे-छोटे कामों के लिए किस तरह परेशान होते हैं, यह इस घटना से साफ झलकता है। लोकायुक्त की टीम ने पूरी प्लानिंग के साथ इस ट्रेप को अंजाम दिया और आरोपी महिला कर्मचारी को उसके निजी कार्यालय से ही पकड़ लिया।
नामांतरण के एवज में मांगी थी रकम
पूरे मामले की शुरुआत श्यामपुरा गांव के रहने वाले राम प्रसाद दांगी की एक शिकायत से हुई थी। राम प्रसाद ने अपनी जमीन के नामांतरण के लिए आवेदन दिया था। ग्राम खेजड़िया के हल्का नंबर अठत्तर की इस जमीन का खसरा नंबर चार सौ सात बटे एक है। इसी जमीन के दस्तावेज दुरुस्त करवाने और नामांतरण की प्रक्रिया पूरी करवाने के लिए पटवारी ने चक्कर कटवाना शुरू कर दिया था।
शिकायतकर्ता ने भोपाल लोकायुक्त कार्यालय में पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। राम प्रसाद का आरोप था कि हल्का पटवारी सीमा दांगी ने इस काम के बदले सात हजार रुपए की रिश्वत मांगी है। लोकायुक्त टीम ने शिकायत मिलने के बाद तुरंत मामले का सत्यापन कराया और मांग की पुष्टि होते ही ट्रैप टीम का गठन कर दिया गया।
निजी दफ्तर में बिछाया गया जाल
गुरुवार को लोकायुक्त पुलिस ने योजना के मुताबिक जीरापुर की सिरपोई कॉलोनी स्थित पटवारी के निजी कार्यालय पर धावा बोला। पटवारी सीमा दांगी ने सीधे पैसे न लेकर अपने एक सह-आरोपी जमना प्रसाद उर्फ बबलू वर्मा के जरिए रिश्वत की रकम ली थी। जैसे ही बबलू वर्मा ने फरियादी से सात हजार रुपए हाथ में लिए, आसपास मौजूद लोकायुक्त की टीम ने दोनों को दबोच लिया।
रिश्वत के नोटों पर फेरा गया केमिकल तुरंत रंग लाया और दोनों आरोपियों के हाथ रंगे पाए गए। लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
कार्रवाई में कौन-कौन रहा शामिल
यह पूरी ट्रैप कार्रवाई उप पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र सिंह के नेतृत्व में हुई। टीम में निरीक्षक रजनी तिवारी और जी.एस. मर्सकोले के साथ-साथ प्रधान आरक्षक मुकेश पटेल भी मौजूद रहे। इनके अलावा आरक्षक मनमोहन साहू, रवि शर्मा, प्रसेनजीत, हेमेन्द्र पाल, हिम्मत सिंह और रक्षा परमार ने भी इस कार्रवाई में अहम भूमिका निभाई।
मध्य प्रदेश में रिश्वतखोरी पर नहीं थम रहा सिलसिला
राजगढ़ की यह घटना अकेली नहीं है। मध्य प्रदेश में लोकायुक्त पुलिस लगभग हर दूसरे-तीसरे दिन किसी न किसी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी को रिश्वत लेते पकड़ रही है।
राजस्व विभाग, खासकर पटवारी और तहसीलदार स्तर पर, ऐसी शिकायतें सबसे ज्यादा सामने आती हैं। जमीन के नामांतरण, सीमांकन और खसरा-खतौनी से जुड़े काम अक्सर रिश्वत की शिकायतों की वजह बनते हैं।
आम लोगों के लिए यह जानना जरूरी है कि लोकायुक्त पुलिस में शिकायत दर्ज कराना पूरी तरह मुफ्त और गोपनीय प्रक्रिया है। जिस तरह राम प्रसाद ने हिम्मत दिखाकर शिकायत की, वैसे ही अन्य पीड़ित नागरिक भी लोकायुक्त हेल्पलाइन या नजदीकी कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
