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मध्य प्रदेश के 70 हजार शिक्षकों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, सैलरी और एरियर पर आया अहम फैसला

MP Teachers News :  मध्य प्रदेश के 70 हजार शिक्षकों के लिए जबलपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सरकार को सेवा अवधि गणना के आदेश पर अमल के लिए मिले सिर्फ 4 हफ्ते, अक्टूबर में अगली सुनवाई तय।
MP Teachers News

MP Teachers News : मध्य प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर है। जबलपुर हाईकोर्ट ने शिक्षकों की सेवा अवधि पहली नियुक्ति तिथि से गिनने के मामले में सख्ती दिखाई है। न्यायमूर्ति दीपक खोट की एकलपीठ ने राज्य सरकार को पहले से जारी अदालती आदेश का पालन करने के लिए सिर्फ 4 हफ्तों का समय दिया है।

अगर सरकार समय रहते इस आदेश पर अमल करती है, तो शिक्षकों को वरिष्ठता, वेतन बढ़ोतरी, पेंशन और एरियर जैसे कई अटके हुए फायदे मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। यानी यह मामला सिर्फ कानूनी लड़ाई भर नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की जेब से सीधा जुड़ा है।

अंदाजा लगाया जा रहा है कि पहली नियुक्ति तारीख से सेवा लाभ मिलने पर शिक्षकों की सैलरी में हर महीने 15 से 20 हजार रुपए तक इजाफा हो सकता है। इतना ही नहीं, अगर 6वें वेतनमान की पात्रता 1 जनवरी 2006 से मानी जाती है, तो करीब 10 साल का एरियर भी बनता है। संभावित 12 प्रतिशत ब्याज दर के हिसाब से यह राशि प्रति शिक्षक 7 से 8 लाख रुपए तक पहुंच सकती है।

सरकार को मिले सिर्फ 4 हफ्ते, अगली सुनवाई अक्टूबर में

दरअसल, मध्य प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के पहले के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने 24 अगस्त 2026 को यह याचिका खारिज कर दी।

इसके बाद शिक्षकों की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए जबलपुर हाईकोर्ट ने सरकार को 4 हफ्तों के भीतर आदेश का पालन करने के निर्देश दिए। इस मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर 2026 को तय की गई है। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि सरकार तय समय-सीमा में क्या कदम उठाती है।

कैसे शुरू हुआ यह पूरा विवाद?

इस विवाद की जड़ें कुछ साल पुरानी हैं। शिक्षक राजेश पांडेय समेत मध्य प्रदेश के 497 अध्यापकों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाकर सरकार के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें 2018 से पहले की उनकी शिक्षकीय सेवाओं को संविलियन में शामिल नहीं किया गया था।

याचिकाकर्ताओं की मांग साफ थी  सेवा अवधि की गणना पहली नियुक्ति तिथि से की जाए, ताकि उन्हें वरिष्ठता के साथ-साथ सभी देय सेवा लाभ भी मिल सकें। अब जब सुप्रीम कोर्ट में सरकार की अपील खारिज हो चुकी है, तो शिक्षक नेताओं का कहना है कि सरकार को बिना किसी देरी के हाईकोर्ट के आदेश को लागू करना चाहिए।

दिवंगत शिक्षकों के आश्रितों को भी मिली राहत

इसी बीच एक और मानवीय पहल की खूब सराहना हो रही है। प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग ने महज 2 दिनों के भीतर 600 से ज्यादा दिवंगत शिक्षकों और कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति पत्र सौंपे हैं।

राज्य के विभिन्न शिक्षक संगठनों ने इस त्वरित फैसले का स्वागत करते हुए राज्य सरकार और विभागीय अधिकारियों का आभार जताया है। संगठनों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में तेजी से कार्रवाई होना जरूरी है, ताकि पीड़ित परिवारों को ज्यादा इंतजार न करना पड़े।

अगली सुनवाई 21 अक्टूबर 2026

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राज्य सरकार 4 हफ्तों की तय समय-सीमा में हाईकोर्ट के आदेश का पालन करेगी। अगर ऐसा होता है, तो प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों को सैलरी बढ़ोतरी और एरियर के रूप में सीधा वित्तीय लाभ मिल सकता है। मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर 2026 को होनी है, जिस पर पूरे प्रदेश के शिक्षक वर्ग की निगाहें टिकी रहेंगी।