मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की सख्त चेतावनी, निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया मामले में मांगा जवाब
Mp Big News,Madhya Pradesh High Court news : क्या खाकी वर्दी और कानून की रक्षा करने की जिम्मेदारी उठाने वाले लोग ही जब कानून को अपने हाथ में लेने लगें, तो आम जनता का भरोसा किस पर टिकेगा? मध्य प्रदेश की न्याय व्यवस्था इन दिनों एक ऐसे ही बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाले मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।
हाल ही में कटनी जिले की निलंबित नगर पुलिस अधीक्षक यानी सीएसपी नेहा पच्चीसिया से जुड़ा जमीन हड़पने और पद के दुरुपयोग का मामला तूल पकड़ चुका है। राज्य की न्याय प्रणाली इस मामले में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ आगे बढ़ रही है, जिससे हर नागरिक की निगाहें इस हाई-प्रोफाइल कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।
गुरुवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में इस बहुचर्चित मामले की महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अदालत ने राज्य शासन को बेहद सख्त लहजे में निर्देश देते हुए 21 सितंबर से पहले अपना विस्तृत जवाब पेश करने को कहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस कानूनी खींचतान में आगे क्या नया मोड़ आता है।
न्याय के कटघरे में खाकी
मध्य प्रदेश के कटनी जिले से जुड़ा यह पूरा प्रकरण प्रशासनिक हलकों में चर्चा का बड़ा विषय बन चुका है। कटनी के कुठला थाने में निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया के खिलाफ गंभीर धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। उन पर मुख्य रूप से अपने पद का दुरुपयोग करने, धोखाधड़ी करने और डरा-धमकाकर जबरन जमीन अपने नाम करवाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
इस कानूनी विवाद के केंद्र में एक हत्या का पुराना मामला है। आरोप है कि कुठला थाना क्षेत्र के इस मर्डर केस में एक आरोपी को अनुचित लाभ पहुंचाने की नीयत से पुलिस चार्जशीट दाखिल करने में जानबूझकर भारी देरी की गई। आरोप है कि इस प्रशासनिक देरी का फायदा उठाकर आरोपी पक्ष और उसके परिवार पर मानसिक दबाव बनाया गया।
करोड़ों की संपत्ति कौड़ियों के भाव ट्रांसफर
जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, इस पूरे षड्यंत्र के तहत करीब एक से दो करोड़ रुपए बाजार मूल्य वाली कीमती जमीन को महज 18 से 20 लाख रुपए में हथिया लिया गया। इतनी बड़ी संपत्ति को बेहद कम कीमत पर सुनियोजित तरीके से आरोपियों के खास सहयोगियों के नाम ट्रांसफर कराया गया, जिसने पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस मामले में मुख्य फाइनेंसर क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ हनफी समेत निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया फिलहाल पुलिस की पकड़ से दूर और फरार चल रहे हैं। कानून के हाथ लंबे माने जाते हैं, और इन फरार आरोपियों की तलाश के लिए कानून अपना शिकंजा कसता जा रहा है।
हाईकोर्ट की सख्ती और आगामी सुनवाई
गुरुवार को इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकल पीठ के समक्ष हुई। अदालत ने इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार को आगामी 21 सितंबर से पहले हर हाल में अपना पक्ष रखने वाला विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने का सख्त निर्देश दिया है।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि याचिकाकर्ता की तरफ से लगाई गई अंतरिम राहत की अर्जी पर सुनवाई के दिन ही यानी 21 सितंबर को ही कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा। इस पूरे मामले में अब न्यायिक समीक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही तय होने की पूरी उम्मीद है, जिस पर राज्यभर की निगाहें टिकी हुई हैं।

