Madhya Pradesh News : बालाघाट के बोंदारी गांव पहुंचे CM मोहन यादव, बीमारी से जूझते बैगा परिवारों का जाना हाल
Madhya Pradesh News : बालाघाट जिले के जंगलों के बीच बसा एक छोटा सा गांव है बोंदारी। पिछले कुछ हफ्तों से यही गांव पूरे मध्य प्रदेश की चर्चा का केंद्र बना हुआ है। वजह अच्छी नहीं, बल्कि बेहद दुखद है। इस इलाके में मलेरिया और मीजल्स यानी खसरे ने कई मासूम बच्चों की जान ले ली है। अब खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस गांव में पहुंचे हैं, ताकि जमीनी हकीकत को करीब से समझा जा सके।
जनविश्वास अभियान के तहत हुआ दौरा
मुख्यमंत्री का यह दौरा राज्य सरकार के जनविश्वास अभियान का हिस्सा है। यह अभियान 6 अगस्त से चल रहा है, जिसके तहत मुख्यमंत्री और मंत्री अलग-अलग जिलों में जाकर लोगों से सीधा संवाद कर रहे हैं। बालाघाट पहुंचकर मुख्यमंत्री ने लांजी क्षेत्र के कोरका और बोंदारी गांवों का रुख किया, जहां बीमारी से सबसे ज्यादा परिवार प्रभावित हुए हैं।
गांव पहुंचते ही मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने बच्चों के इलाज, टीकाकरण और पोषण से जुड़े सवाल भी अधिकारियों से पूछे। साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीमों से मौजूदा व्यवस्थाओं की जानकारी भी ली।
कौन-कौन से गांव आए इस बीमारी की चपेट में
बीते डेढ़ महीने में बालाघाट के बिरसा और लांजी क्षेत्र के कई आदिवासी गांवों में हालात बिगड़े हैं। मछुरदा, अडोरी, गठिया, बोंदारी, कोरका, कोहनीमोर और कुंडेकसा जैसे गांवों में मलेरिया, मीजल्स, टाइफाइड और डायरिया के मामले सामने आए। ये सभी गांव जिला मुख्यालय से करीब 85 से 100 किलोमीटर दूर घने जंगलों के बीच बसे हैं, जहां बैगा और गोंड समुदाय के लोग रहते हैं। यह इलाका लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों से प्रभावित रहा है, जिस वजह से यहां स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना प्रशासन के लिए भी चुनौती भरा रहा है।
बच्चों की मौत के आंकड़ों पर उलझन बरकरार
इस पूरे मामले में सबसे संवेदनशील पहलू बच्चों की मौत का आंकड़ा है। जिला प्रशासन ने शुरुआत में 8 बच्चों की मौत की पुष्टि की थी, जबकि ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का दावा है कि यह संख्या 19 से 24 तक पहुंच चुकी है। प्रशासन का कहना है कि कुछ मौतें पुरानी हैं, इसलिए सभी को एक साथ जोड़ना ठीक नहीं। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि कई मौतें रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं हुई हैं।
शुरुआती जांच में कुपोषण को मौतों की वजह माना जा रहा था, लेकिन ICMR और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों की रिपोर्ट में मलेरिया और मीजल्स संक्रमण को मौत की मुख्य वजह बताया गया है। इस खुलासे के बाद सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए जिले के टीकाकरण अधिकारी और मलेरिया अधिकारी को हटा दिया।
प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी
हालात बिगड़ने के बाद प्रशासन ने प्रभावित गांवों में डॉक्टरों की चार टीमें तैनात कर दी हैं। ये टीमें लगातार सर्वे और इलाज का काम कर रही हैं। जरूरत पड़ने पर मरीजों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस भी गांवों में खड़ी रखी गई हैं। इसके अलावा जिन गांवों में हालात ज्यादा गंभीर थे, वहां स्कूल की इमारत को अस्थायी अस्पताल में भी बदला गया।
