मध्यप्रदेश में इस समय लोगों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बारिश कब तेज होगी? पिछले कुछ दिनों से कई इलाकों में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है। कहीं बादल आते हैं, कुछ बूंदें गिरती हैं और फिर मौसम साफ हो जाता है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, 15 से 20 जुलाई के बीच प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में हल्की बारिश की संभावना बनी रहेगी। कई जिलों में बादल छाए रहेंगे और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं। कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ मौसम बदलने की भी संभावना जताई गई है। किन जिलों में हल्की बारिश की संभावना मौसम विभाग के अनुसार अलीराजपुर, झाबुआ, धार, रतलाम, उज्जैन, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, अनुपपुर, शहडोल, उमरिया, डिंडोरी, सिवनी, मंडला, बालाघाट, पन्ना, छतरपुर और मैहर में हल्की बारिश हो सकती है। इन जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। हालांकि लगातार या बहुत ज्यादा बारिश के संकेत फिलहाल नहीं हैं। इसलिए जिन इलाकों में किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें अभी कुछ और इंतजार करना पड़ सकता है।
अगले छह दिन कैसा रहेगा मौसम
IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक 15 से 20 जुलाई तक पश्चिमी मध्यप्रदेश और 14 से 20 जुलाई तक पूर्वी मध्यप्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। मौसम पूरी तरह सूखा नहीं रहेगा, लेकिन भारी बारिश की संभावना भी कम बताई गई है। 16 से 18 जुलाई के बीच कुछ जिलों में गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की संभावना बढ़ सकती है। इस दौरान हवा की रफ्तार कुछ इलाकों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। ऐसे मौसम में खुले मैदान, पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास रुकने से बचना बेहतर रहेगा।
बारिश कम क्यों पड़ रही है
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस समय मानसून की सक्रियता कमजोर हुई है। बंगाल की खाड़ी के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र जरूर बना है, लेकिन उसका प्रभाव मध्यप्रदेश पर सीमित रहने की संभावना है। यही वजह है कि प्रदेश में व्यापक और लगातार बारिश का दौर फिलहाल नहीं बन पा रहा है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 6 से 7 दिनों तक मध्य भारत के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश दर्ज हो सकती है।
44 दिन में बारिश का क्या रहा हाल
1 जून से 14 जुलाई 2026 तक मध्यप्रदेश में मानसून के 44 दिनों के दौरान औसत से करीब 7 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पूर्वी मध्यप्रदेश में सामान्य से लगभग 21 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। वहीं पश्चिमी मध्यप्रदेश में सामान्य से करीब 6 प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। यानी पूरे प्रदेश की तस्वीर एक जैसी नहीं है। कुछ जिलों में अच्छी बारिश हुई, जबकि कई इलाकों में अब भी पानी की कमी महसूस की जा रही है। यही असमान वितरण कृषि और जल प्रबंधन के लिए चुनौती बना हुआ है। खरीफ फसलों की बुवाई वाले क्षेत्रों में किसान अब अगली अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
उमस से मिलेगी थोड़ी राहत
हालांकि भारी बारिश की संभावना कम है, लेकिन बादल और हल्की बारिश के कारण तापमान में कुछ गिरावट आ सकती है। इससे दिन के समय महसूस होने वाली उमस और गर्मी में थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि तेज धूप और बारिश के बीच लगातार बदलाव के कारण स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में पर्याप्त पानी पीना, मौसम के अनुसार कपड़े पहनना और बिजली चमकने के दौरान सावधानी बरतना जरूरी रहेगा।