मध्यप्रदेश में अब पेंशन के लिए नहीं काटने होंगे दफ्तरों के चक्कर, 15 दिन में मिलेगा हक का पैसा
MP Pension Update 2026 : रिटायरमेंट के बाद पेंशन के लिए महीनों इंतजार करने वाले मध्यप्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खबर है। अब उनकी पेंशन फाइल दफ्तरों में धूल नहीं खाएगी। राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि हर पेंशन प्रकरण अधिकतम 15 दिन में निपटाना ही होगा। देरी हुई तो जिम्मेदार अफसर पर सीधी कार्रवाई होगी। यह फैसला उन हजारों रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया है, जो बरसों से पेंशन में देरी की शिकायत करते आ रहे थे।
आखि हैर माजरा क्या
वित्त विभाग ने राज्य केंद्रीयकृत पेंशन प्रोसेसिंग सेल के जरिए ऑनलाइन पेंशन मामलों के निपटारे को लेकर सख्त समय-सीमा तय की है। अब हर मामला तीन स्तरों से गुजरेगा। क्रियेटर, वेरिफायर और एप्रूवर। इनमें से हर स्तर के लिए अलग-अलग दिन तय कर दिए गए हैं। अगर किसी स्तर पर तय समय में काम पूरा नहीं होता, तो उस स्तर पर बैठा अधिकारी सीधे जवाबदेह माना जाएगा।
किस तरह के मामले में कितने दिन
सामान्य नए पेंशन प्रकरणों के लिए साफ नियम बना है। क्रियेटर स्तर पर 5 दिन, वेरिफायर स्तर पर 5 दिन और एप्रूवर स्तर पर 5 दिन। यानी कुल मिलाकर 15 कार्य दिवस के भीतर मामला निपटाना अनिवार्य है।
पुनरीक्षित पेंशन प्रकरणों के लिए समय थोड़ा कम रखा गया है। क्रियेटर को 4 दिन, वेरिफायर को 3 दिन और एप्रूवर को 3 दिन मिलेंगे। यानी कुल 10 दिन में यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी। वहीं वेतन निर्धारण से जुड़े मामलों के लिए 11 कार्य दिवस की सीमा तय की गई है। इसमें क्रियेटर के पास 5 दिन, जबकि वेरिफायर और एप्रूवर के पास 3-3 दिन रहेंगे।
सरकार ने क्यों उठाया यह कदम
दरअसल जब विभागीय समीक्षा हुई, तो हकीकत सामने आई कि कई कार्यालयों में पेंशन के मामले महीनों से अटके पड़े थे। कहीं फाइल एक टेबल से दूसरी टेबल तक पहुंचने में ही हफ्तों लग रहे थे, तो कहीं दस्तावेजों की जांच में देरी हो रही थी।
रिटायर्ड कर्मचारी अपनी मेहनत की कमाई के लिए दफ्तरों के चक्कर काटते रहते थे। यह स्थिति देखकर सरकार ने सख्त रुख अपनाने का फैसला लिया। अब सरकार ने दो टूक कह दिया है कि रिटायरमेंट के बाद पेंशन शुरू होने में होने वाली अनावश्यक देरी बिलकुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कर्मचारियों को क्या फायदा होगा
इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि रिटायर्ड कर्मचारी को समय पर उसका हक मिलेगा। पेंशन में देरी की वजह से अक्सर बुजुर्ग कर्मचारियों को आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ती थी, खासकर इलाज या घरेलू खर्चों के लिए।
अब जब हर स्तर पर समय-सीमा तय है, तो फाइल का अटकना मुश्किल होगा। साथ ही, जवाबदेही तय होने से अफसरों पर भी काम जल्दी निपटाने का दबाव बढ़ेगा।ऑनलाइन प्रक्रिया होने से पारदर्शिता भी बढ़ेगी। कर्मचारी यह भी देख सकेंगे कि उनकी फाइल किस स्तर पर, कितने दिन से पड़ी है।
