Narsinghpur News : मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के
गाडरवारा में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। हाल ही में सेवानिवृत्त हुए सहायक राजस्व निरीक्षक और पूर्व मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) योगेंद्र ढीमोले के घर शुक्रवार सुबह EOW की टीम ने छापा मारकर तलाशी शुरू की। शुरुआती जांच में करोड़ों रुपये की चल और अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज सामने आने की बात कही जा रही है। यह कार्रवाई उस शिकायत के आधार पर हुई, जो योगेंद्र ढीमोले के लखनादौन नगर पालिका में पदस्थ रहने के दौरान सामने आई थी। प्रारंभिक जांच में आय से अधिक संपत्ति के संकेत मिलने के बाद नरसिंहपुर न्यायालय से तलाशी वारंट प्राप्त किया गया। इसके बाद EOW ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया।
सुबह 6 बजे पहुंची 15 सदस्यीय टीम
जानकारी के अनुसार, जबलपुर EOW की करीब 15 सदस्यीय टीम सुबह लगभग 6 बजे गाडरवारा की एमपीईबी कॉलोनी स्थित आवास पर पहुंची। टीम में महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं, ताकि तलाशी की पूरी प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की जा सके। जांच के दौरान अधिकारियों ने संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, बैंक और निवेश संबंधी रिकॉर्ड सहित अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों की बारीकी से जांच शुरू की। ऐसे मामलों में दस्तावेजों का मिलान सबसे अहम चरण माना जाता है, क्योंकि इसी आधार पर आय और संपत्ति का आकलन किया जाता है।
रिटायरमेंट के कुछ समय बाद हुई कार्रवाई
योगेंद्र ढीमोले 30 अप्रैल को गाडरवारा नगर पालिका से सहायक राजस्व निरीक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इससे पहले वे लखनादौन नगर पालिका में कई वर्षों तक मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) के रूप में भी कार्यरत रहे। सूत्रों के अनुसार, लखनादौन में पदस्थापना के दौरान दर्ज शिकायत के बाद EOW ने जांच शुरू की थी। प्रारंभिक स्तर पर मिले तथ्यों के आधार पर एजेंसी ने अदालत से तलाशी वारंट हासिल किया और उसके बाद यह कार्रवाई की गई।
जांच में किन संपत्तियों की जानकारी सामने आई?
अब तक की जांच में जिन संपत्तियों की जानकारी सामने आई है, उनमें गाडरवारा में दो प्लॉट पर बने आलीशान मकान, लखनादौन में एक खाली प्लॉट, दो कृषि भूमि, एक दुकान, एक महिंद्रा थार, एक कार, तीन मोटरसाइकिल और एक ट्रैक्टर शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि EOW ने अभी अंतिम जांच रिपोर्ट जारी नहीं की है। इसलिए इन संपत्तियों का अंतिम मूल्यांकन और उनकी वैधता की पुष्टि दस्तावेजों की विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। यही वजह है कि जांच एजेंसी फिलहाल जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय प्रत्येक दस्तावेज का मिलान कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।
आय से अधिक संपत्ति के मामलों में कैसे होती है जांच?
आय से अधिक संपत्ति के मामलों में जांच एजेंसियां संबंधित अधिकारी या कर्मचारी की घोषित आय, सेवा रिकॉर्ड, संपत्ति के दस्तावेज, निवेश और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड का मिलान करती हैं। यदि उपलब्ध संपत्ति वैध आय के अनुपात से अधिक पाई जाती है, तो संबंधित कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई की जाती है। इस मामले में भी EOW फिलहाल दस्तावेजों की जांच कर रही है। इसलिए अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और आधिकारिक रिपोर्ट सामने आने के बाद ही माना जाएगा।
फिलहाल जांच जारी
EOW की टीम अभी अन्य चल-अचल संपत्तियों, संभावित निवेश और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच में जुटी हुई है। मामले में अभी तक अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। ऐसे में जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।