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लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई: शिक्षा विभाग के कर्मचारी 80 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार


  • दमोह जिला शिक्षा कार्यालय में लोकायुक्त पुलिस ने की बड़ी छापेमारी।
  • निलंबन बहाली के बदले आरोपियों ने मांगी थी 1 लाख रुपये की रिश्वत।
  • 80 हजार रुपये लेते हुए तीन कर्मचारी रंगे हाथों गिरफ्तार किए गए।
  • शिक्षक अनिल साहू और नीरज सोनी पर कार्रवाई, विभाग में मचा हड़कंप।
  • सागर लोकायुक्त इंस्पेक्टर मंजू किरण कीर्ति के नेतृत्व में हुआ सफल ट्रैप।
Damoh Bribery Case : मध्य प्रदेश के दमोह जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। मंगलवार को सागर लोकायुक्त की टीम ने दमोह जिला शिक्षा कार्यालय (DEO Office) में दबिश देकर शिक्षा विभाग के तीन कर्मचारियों को 80 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई एक शिक्षक की शिकायत पर की गई, जिनसे उनके निलंबन (सस्पेंशन) के मामले को सुलझाने और बहाली के बदले में पैसों की मांग की गई थी। आरोपियों ने शुरुआत में 1 लाख रुपये मांगे थे, लेकिन सौदा 80 हजार रुपये में तय हुआ था।

कार्यालय में मचा हड़कंप, रंगे हाथों पकड़े गए आरोपी

लोकायुक्त पुलिस की इस अचानक कार्रवाई से पूरे शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। सागर लोकायुक्त की टीम का नेतृत्व कर रहीं इंस्पेक्टर मंजू किरण कीर्ति ने बताया कि उन्हें शिकायत मिली थी कि विभाग के कुछ कर्मचारी एक लंबित मामले को रफा-दफा करने के लिए भारी रकम की मांग कर रहे हैं। योजना के अनुसार, जैसे ही पीड़ित ने रिश्वत की राशि आरोपियों को सौंपी, पहले से ही तैयार बैठी पुलिस टीम ने उन्हें दबोच लिया। पकड़े गए आरोपियों में शिक्षक अनिल साहू और नीरज सोनी के नाम प्रमुखता से सामने आए हैं।

निलंबन बहाली के लिए बनाया था दबाव

पूरा मामला विभाग के ही एक कर्मचारी के निलंबन से जुड़ा हुआ है। बताया जा रहा है कि आरोपियों ने पीड़ित को भरोसा दिलाया था कि अगर वह 1 लाख रुपये देता है, तो उसके निलंबन की फाइल को आगे बढ़ाकर उसे बहाल करवा दिया जाएगा। काफी मिन्नतें करने के बाद आरोपी 80 हजार रुपये लेने पर सहमत हुए। पीड़ित भ्रष्टाचार के इस दबाव में नहीं आना चाहता था, इसलिए उसने साहस दिखाते हुए सागर लोकायुक्त कार्यालय में इसकी लिखित शिकायत दर्ज करा दी।

शिकायत मिलते ही ट्रैप की प्लानिंग तैयार

इंस्पेक्टर मंजू किरण कीर्ति के मुताबिक, शिकायत मिलते ही पुलिस ने सबसे पहले उसकी गोपनीयता से जांच कराई। जब यह पुष्टि हो गई कि रिश्वत की मांग वास्तव में की जा रही है, तब ट्रैप की प्लानिंग तैयार की गई। पुलिस ने पीड़ित को केमिकल लगे हुए नोट देकर आरोपियों के पास भेजा। जैसे ही जिला शिक्षा कार्यालय में पैसों का लेनदेन हुआ, पुलिस ने आरोपियों के हाथ धुलवाए, जिससे उनका रंग गुलाबी हो गया। यह इस बात का पुख्ता सबूत है कि उन्होंने रिश्वत के पैसों को छुआ था।

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति

लोकायुक्त पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल विभाग के अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इस खेल में कार्यालय के कुछ और बड़े अधिकारी भी शामिल थे। पुलिस का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। दमोह की इस घटना ने एक बार फिर सरकारी विभागों में जड़ जमा चुके भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया है।