Operation Narcos : उज्जैन रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की संयुक्त कार्रवाई ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि रेलवे मार्गों का इस्तेमाल कर मादक पदार्थों की तस्करी करने वालों पर एजेंसियों की नजर लगातार बनी हुई है। खुफिया सूचना के आधार पर चलाए गए ऑपरेशन नार्कोस के तहत एक अंतरराज्यीय तस्कर को गिरफ्तार किया गया है। उसके पास से करीब 80 ग्राम एमडी (मेफेड्रोन) ड्रग्स बरामद हुई है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 10 लाख रुपये बताई जा रही है। हाल के महीनों में देशभर में ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई तेज हुई है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और हाईवे जैसे ट्रांजिट पॉइंट्स पर निगरानी बढ़ाई गई है। ऐसे में उज्जैन की यह कार्रवाई भी इसी अभियान का अहम हिस्सा मानी जा रही है।
उज्जैन स्टेशन पर कैसे हुई पूरी कार्रवाई?
जानकारी के मुताबिक, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो इंदौर को पहले से एक खुफिया सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त अमित प्रकाश मिश्रा के निर्देशन में RPF ने विशेष अभियान चलाया। 10 जुलाई को जैसे ही ट्रेन संख्या 22673 जयपुर-मनारगुड़ी एक्सप्रेस उज्जैन रेलवे स्टेशन पहुंची, RPF निरीक्षक नरेंद्र यादव और उनकी टीम ने ट्रेन की गहन जांच शुरू कर दी। जांच के दौरान एस-1 कोच में एक युवक अपने बैग के साथ संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। पूछताछ के दौरान उसने अपना नाम राजू विश्नोई पुत्र भंवरलाल निवासी ग्राम पीथावास, थाना डांगियावास, जिला जोधपुर (राजस्थान) बताया। शुरुआती पूछताछ में उसके जवाब संतोषजनक नहीं लगे, जिसके बाद अधिकारियों ने बैग की विस्तृत जांच कराने का फैसला किया।
बैग की तलाशी में मिला करोड़ों नहीं, लेकिन बड़ा सुराग
RPF को बैग में मादक पदार्थ होने की आशंका हुई तो तुरंत NCB इंदौर की टीम को मौके पर बुलाया गया। निरीक्षक विजय राज के नेतृत्व में पहुंची टीम ने निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत पंचों की मौजूदगी में संयुक्त तलाशी ली। तलाशी के दौरान आरोपी के बैग से करीब 80 ग्राम एमडी यानी मेफेड्रोन बरामद हुई। अधिकारियों के अनुसार इसकी अनुमानित कीमत लगभग 10 लाख रुपये है। बरामदगी के बाद मौके पर ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया और ड्रग्स को जब्त कर लिया गया। इसके बाद आरोपी को आगे की पूछताछ और कानूनी कार्रवाई के लिए NCB इंदौर के सुपुर्द कर दिया गया।
क्या है एमडी (मेफेड्रोन) ड्रग?
मेफेड्रोन, जिसे आम बोलचाल में एमडी कहा जाता है, एक सिंथेटिक मादक पदार्थ है। इसे प्रतिबंधित ड्रग्स की श्रेणी में रखा गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार इसकी तस्करी अक्सर संगठित नेटवर्क के जरिए की जाती है और इसकी मांग कई बड़े शहरों में देखी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मादक पदार्थों का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। यही वजह है कि इस तरह की तस्करी पर रोक लगाने के लिए केंद्रीय एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं।
NDPS एक्ट के तहत दर्ज हुआ मामला
NCB इंदौर ने आरोपी के खिलाफ NDPS Act, 1985 की धारा 8, 22 और 29 के तहत अपराध क्रमांक 04/2026 दर्ज किया है। अब जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा शुरू हो चुका है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपी के पास यह ड्रग्स कहां से आई, इसे किस तक पहुंचाया जाना था और इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं। जांच अधिकारी इस बात की भी पड़ताल कर रहे हैं कि क्या आरोपी पहले भी इस तरह की गतिविधियों में शामिल रहा है या यह किसी बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का हिस्सा है।
रेलवे बना तस्करों का आसान रास्ता, एजेंसियां हुईं सतर्क
पिछले कुछ वर्षों में जांच एजेंसियों ने कई मामलों में पाया है कि लंबी दूरी की ट्रेनों का इस्तेमाल मादक पदार्थों की तस्करी के लिए किया जाता रहा है। यही कारण है कि रेलवे स्टेशनों पर निगरानी पहले की तुलना में काफी बढ़ा दी गई है। ऑपरेशन नार्कोस जैसे अभियान का उद्देश्य केवल ड्रग्स बरामद करना नहीं बल्कि पूरे सप्लाई नेटवर्क तक पहुंचना भी है। अधिकारियों का मानना है कि नेटवर्क की जड़ तक पहुंचना ही ड्रग्स तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने का सबसे बड़ा तरीका है।