मध्यप्रदेश पुलिस में बड़ा बदलाव, कार्यवाहक पदोन्नति की समीक्षा शुरू, कई कर्मचारी लौटेंगे मूल पद पर
MP Police Promotion Update : मध्यप्रदेश पुलिस विभाग में पिछले कई वर्षों से कार्यवाहक पदोन्नति (ऑफिशिएटिंग प्रमोशन) के आधार पर उच्च पदों की जिम्मेदारी संभाल रहे हजारों पुलिस अधिकारी और कर्मचारी इन दिनों नई चुनौती का सामना कर रहे हैं। राज्य में मप्र पदोन्नति नियम-2025 लागू होने के बाद विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसके साथ ही उन कर्मचारियों की कार्यवाहक पदस्थापना समाप्त की जा रही है जो नए नियमों के अनुसार नियमित पदोन्नति के लिए पात्र नहीं पाए जा रहे हैं नए नियमों का असर सबसे पहले पांडुर्णा जिले में दिखाई दिया है। यहां कार्यवाहक हेड कॉन्स्टेबल के रूप में काम कर रहे 32 पुलिसकर्मियों का अतिरिक्त प्रभार समाप्त कर उन्हें दोबारा कॉन्स्टेबल के मूल पद पर पदस्थ करने के आदेश जारी किए गए हैं। इसे विभागीय स्तर पर नई प्रक्रिया की शुरुआत माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में अन्य जिलों में भी डीपीसी की रिपोर्ट के आधार पर इसी तरह के आदेश जारी हो सकते हैं। मध्यप्रदेश में लंबे समय तक नियमित पदोन्नतियां नहीं होने से बड़ी संख्या में पद खाली रहे। विभागीय कामकाज प्रभावित न हो, इसलिए कई कर्मचारियों को कार्यवाहक आधार पर ऊंचे पदों की जिम्मेदारी दी गई थी। इससे प्रशासनिक व्यवस्था तो चलती रही, लेकिन इन पदोन्नतियों को नियमित दर्जा नहीं मिला। अब नए प्रमोशन नियम लागू होने के बाद सभी मामलों की समीक्षा की जा रही है। जिन कर्मचारियों की पात्रता नियमों के अनुरूप नहीं मिलेगी, उन्हें मूल पद पर वापस भेजा जाएगा। वहीं जो कर्मचारी सभी शर्तें पूरी करेंगे, उन्हें नियमित पदोन्नति मिलने का रास्ता साफ हो सकता है। इस प्रक्रिया का दायरा केवल एक या दो पदों तक सीमित नहीं है। जानकारी के अनुसार कॉन्स्टेबल, हेड कॉन्स्टेबल, एएसआई, एसआई, इंस्पेक्टर और कुछ मामलों में डीएसपी स्तर तक कार्यवाहक जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारियों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। यही कारण है कि पुलिस विभाग के भीतर इस विषय पर लगातार चर्चा हो रही है। कई कर्मचारी डीपीसी के अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि उसी के आधार पर उनके भविष्य की स्थिति तय होगी। पुलिस विभाग में वर्ष 2016 के बाद नियमित पदोन्नति की प्रक्रिया लंबे समय तक प्रभावित रही। इसके चलते कई पद खाली रहे और प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए वर्ष 2021 से पुलिस मुख्यालय ने कार्यवाहक पदोन्नति देने का निर्णय लिया। इस व्यवस्था के तहत हजारों कर्मचारियों को उच्च पद की जिम्मेदारी, रैंक और वर्दी तो मिली, लेकिन उनकी पदोन्नति स्थायी नहीं मानी गई। अब नई नियमावली लागू होने के बाद इन्हीं मामलों की चरणबद्ध समीक्षा हो रही है। विभागीय चर्चाओं के अनुसार प्रदेशभर में लगभग 15 हजार पुलिस अधिकारी और कर्मचारी पिछले कुछ वर्षों से कार्यवाहक पदों पर काम कर रहे हैं। हालांकि अंतिम संख्या डीपीसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। यदि कोई कर्मचारी पात्रता की सभी शर्तें पूरी करता है तो उसे नियमित पदोन्नति मिलने की संभावना बनी रहेगी। लेकिन पात्रता पूरी नहीं होने पर कार्यवाहक प्रभार समाप्त किया जा सकता है। कई कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक उच्च पद की जिम्मेदारी निभाई है। ऐसे में यदि उन्हें दोबारा मूल पद पर लौटना पड़ता है तो इसका असर केवल पदनाम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मनोबल और कार्यप्रणाली पर भी पड़ सकता है। हालांकि विभाग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया नए प्रमोशन नियमों और डीपीसी की सिफारिशों के आधार पर की जा रही है। इसलिए प्रत्येक मामले का अलग-अलग परीक्षण किया जाएगा।
