अब इथेनॉल पर दौड़ेगी वैगन आर, मारुति ने पेश की भारत की पहली फ्लेक्स फ्यूल कार
Maruti Wagon R Flex Fuel : भारत भारत ऑटोमोबाइल सेक्टर में आज एक नया सवेरा हुआ है आपको बता दे की मारुति सुजुकी ने लंबे इंतजार को खत्म करते हुए अपनी सबसे लोकप्रिय हैचबैक वेगनर का प्रोफाइल रेडी फ्लेक्स फ्यूल मॉडल सामने रख दिया है . इस गाड़ी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस इस तरीके से तैयार किया गया है कि यह पेट्रोल और एथेनॉल के मिश्रण से आसानी से चल सकेगी यह न केवल भारत के ग्राहकों के लिए एक अच्छी गाड़ी साबित होगी बल्कि देश की कच्चे तेल की निर्भरता को भी काम करने में यह मददगार साबित होगी इस कर को विशेष रूप से i20 से लेकर 100 तक की मिश्रण पर चलने के लिए डिजाइन किया गया है वर्तमान में इसमें e8 55 ईंधन के आधिकारिक मंजूरी भी मिल गई है आपको बता दें कि इस वेगनर का दिल यानी इसका लीटर 1.2 लीटर चार सिलेंडर इंजन पूरी तरह से बदल दिया गया है साधारण पेट्रोल और फ्लेक्स फ्यूल इंजन में यह बड़ा अंतर होता है कि फ्लेक्स फ्यूल सिस्टम एथेनॉल के स्वभाव को झेलने में सक्षम होता है . मारुति के इंजीनियरों ने ऐसे नए फ्यूल इंजेक्टर्स एक मजबूत फ्यूल पंप और आधुनिक फ्यूल लाइंस जोड़ी है आपको बता दे की वर्तमान में सरकार इस दिशा में काफी तेजी से कम कर रही है पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की हालिया योजना के अनुसार आने वाले समय में सड़कों पर ऐसी स्टेशनों का जाल बिछाया जाएगा दिल्ली एनसीआर से लेकर मुंबई पुणे और नागपुर जैसे शहरों में सबसे पहले इन विशेष डिस्पेंसरों को लगाने की तैयारी चल रही है साल 2027 तक देश भर में 5000 से ज्यादा ऐसे केंद्र बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जिसमें एथेनॉल देश का मुख्य ईंधन बनाने की दिशा में काम होगा फिलहाल मारुति सुजुकी की इस मॉडल की विशेष रूप से कमर्शियल सेक्टर के लिए उपलब्ध कराया गया है टैक्सी ऑपरेटर और फ्लीट कंपनियों के लिए यह एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है. क्योंकि एथेनॉल का उपयोग न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर है बल्कि यह भविष्य में पेट्रोल की तुलना में अत्यधिक के फायदे भी होने वाला है आम ग्राहकों के लिए भी इसकी बिक्री और कीमत का भी ऐलान कंपनी आने वाले कुछ समय में कर सकती है हालांकि मारुति पहली ऐसी कंपनी बन गई है . जिसने फ्लेक्स फ्यूल तकनीक को महज एक प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखा है बल्कि उत्पादन स्तर पर भी पहुंच गई है भारत सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक एथेनॉल वेल्डिंग को बड़े स्तर पर ले जाएं ताकि कार्बन उत्सर्जन को काफी हद तक काम किया जा सके . वेगनर और फ्लेक्स फ्यूल का यह मॉडल इस लक्ष्य का एक जीता जागता उदाहरण माना जा रहा है इसमें इस्तेमाल होने वाले एथेनॉल गाने और अन्य कृषि अवशेषों से तैयार किया जाता है जिससे किसानों की आय भी बढ़ेगी
