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इंदौर लूट कांड का मास्टरमाइंड निकला रिटायर्ड फौजी, सांवरिया सेठ को चढ़ाए थे लाखों


Crime in Indore : इंदौर के पंढरीनाथ थाना क्षेत्र में 24 मई को घटी एक बड़ी लूट की घटना ने पूरे शहर को चौंका दिया था। दिनदहाड़े 29 लाख 65 हजार रुपये की लूट ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे। अब पुलिस ने इस मामले का खुलासा कर दिया है और जो सच्चाई सामने आई है, वह किसी फिल्म की कहानी जैसी है। इस बड़ी वारदात का मास्टरमाइंड कोई अपराधी नहीं, बल्कि एक रिटायर्ड आर्मीमैन निकला है। पुलिस जांच में पता चला कि इस पूरी योजना का मुख्य सूत्रधार चंद्रशेखर मुकाती है। चंद्रशेखर सेना से रिटायर हो चुका था, लेकिन उसकी नजरें आसानी से पैसा कमाने पर थीं। हालांकि वह सीधे तौर पर पीड़ित स्क्रैप कारोबारी मुकुल अग्रवाल के यहां काम नहीं करता था, लेकिन उसे कारोबारी के कलेक्शन सिस्टम और नकदी के लेनदेन की पूरी जानकारी थी। यह जानकारी उसे अपने पिछले काम के दौरान मिली थी। चंद्रशेखर ने अपने साथियों प्रवीण, अमर, फिरोज और कपिल भंडारी के साथ मिलकर एक खतरनाक साजिश रची। आर्थिक तंगी से जूझ रहे और महंगे शौक रखने वाले इन लोगों ने मिलकर 24 मई को मुकुल अग्रवाल की कलेक्शन एजेंसी के कर्मचारी को अपना निशाना बनाया। लूट की इस वारदात के बाद सभी आरोपी फरार हो गए और अलग-अलग राज्यों में छिप गए। पुलिस ने इस केस को चुनौती के रूप में लिया। घटना के तुरंत बाद सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच का दायरा बढ़ाया गया। पुलिस की मुखबिर टीम ने भी बेहतरीन काम किया, जिससे आरोपियों के बारे में सुराग मिलने शुरू हुए। इंदौर पुलिस ने अपनी सक्रियता दिखाते हुए महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्यों में दबिश दी। पकड़े जाने पर पूछताछ के दौरान जो बात सबसे ज्यादा हैरान करने वाली रही, वह आरोपियों की आस्था से जुड़ी है। लूट के तुरंत बाद ये आरोपी राजस्थान के प्रसिद्ध सांवरिया सेठ मंदिर पहुंचे थे। वहां उन्होंने लूट की रकम में से 1 लाख 11 हजार रुपये का भारी-भरकम चढ़ावा चढ़ाया। शायद उन्हें उम्मीद थी कि ईश्वर उन्हें बचा लेंगे, लेकिन पुलिस की सतर्कता के आगे उनकी यह चाल काम नहीं आई। फिलहाल पुलिस ने सभी आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। उनके पास से 22 लाख 50 हजार रुपये नकद बरामद किए जा चुके हैं। इसके अलावा लूट की रकम से खरीदी गई ढाई लाख रुपये की एक कार भी जब्त कर ली गई है। शेष राशि की बरामदगी के लिए पुलिस टीम अभी भी प्रयास कर रही है और मामले के अन्य पहलुओं की बारीकी से जांच चल रही है। यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं और अपराध कितना भी शातिराना क्यों न हो, एक छोटी सी गलती ही पकड़े जाने का कारण बनती है।