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मोहन यादव सरकार में जल्द होगा बड़ा फेरबदल, जानिए किन मंत्रियों की कुर्सी खतरे में


  • दिसंबर 2023 के बाद मोहन सरकार का पहला बड़ा मंत्रिमंडल पुनर्गठन।
  • कैबिनेट से 5-6 मंत्रियों की विदाई और 7-8 नए चेहरों के शामिल होने की संभावना।
  • मुख्यमंत्री द्वारा मंत्रियों के कामकाज का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड तैयार।
Mohan Yadav Latest Updates : मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार आने वाले कुछ ही हफ्तों में एक बड़े राजनीतिक बदलाव की ओर बढ़ रही है। राज्य के सत्ता गलियारों में चल रही चर्चाओं के अनुसार, मुख्यमंत्री मोहन यादव जून के अंत तक अपने मंत्रिमंडल में व्यापक फेरबदल और विस्तार करने जा रहे हैं। दिसंबर 2023 में प्रदेश में भाजपा सरकार के गठन के बाद यह पहला ऐसा अवसर होगा जब कैबिनेट का स्वरूप पूरी तरह से बदला जाएगा। इस फेरबदल का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाना और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए संगठन को मजबूती देना है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पिछले कुछ हफ्तों में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कई दौरे किए हैं। इन दौरों का मकसद केवल राज्य के विकास कार्यों पर चर्चा करना ही नहीं, बल्कि मंत्रिमंडल के नए स्वरूप को अंतिम रूप देना भी था। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी के अन्य शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई बैठकों में उन नामों पर सहमति बन गई है जिन्हें कैबिनेट में शामिल किया जाना है। विशेष रूप से 19 मई को जगदलपुर में हुई महत्वपूर्ण बैठक, जिसमें अमित शाह और वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय उपस्थित थे, इस फेरबदल के लिहाज से काफी निर्णायक मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 20 से 30 जून के बीच राज्य सरकार इस प्रक्रिया को पूर्ण कर सकती है। इसके तुरंत बाद नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है। इस प्रस्तावित बदलाव में सबसे अधिक चर्चा वरिष्ठ मंत्री और कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय को लेकर है। ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि उन्हें राज्य मंत्रिमंडल से हटाकर केंद्र की राजनीति में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है, संभवतः उन्हें राज्यसभा भेजा जाए। विजयवर्गीय, जो भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव भी रह चुके हैं, की भूमिका को लेकर पार्टी आलाकमान ने एक विशेष रणनीति बनाई है। इसी तरह, प्रह्लाद सिंह पटेल को लेकर भी चर्चाएं हैं कि उन्हें सांगठनिक स्तर पर कोई महत्वपूर्ण जवाबदेही सौंपी जा सकती है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पिछले छह महीनों में प्रत्येक मंत्री के विभागीय कामकाज और उनके द्वारा जनहित में लिए गए निर्णयों का गहन विश्लेषण किया है। इस समीक्षा के आधार पर ही कुछ मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक, विजय शाह जैसे कुछ वरिष्ठ नेताओं के हालिया बयानों और उसके बाद उपजे विवादों ने उनके भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके अलावा राधा सिंह, प्रतिमा बागरी और दिलीप अहिरवार जैसे मंत्रियों के प्रदर्शन पर भी शीर्ष नेतृत्व की नजर है। मंत्रिमंडल के खाली होने वाले पदों पर नए और ऊर्जावान चेहरों को शामिल करने की तैयारी है। सागर जिले से शैलेंद्र जैन या प्रदीप लारिया में से किसी एक को मौका मिल सकता है। इसके साथ ही, ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे से प्रमुराम चौधरी का नाम भी चर्चा में है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य युवा शक्ति, महिला नेतृत्व और आदिवासी वर्ग के प्रतिनिधित्व को और अधिक सशक्त बनाना है। यह फेरबदल केवल मंत्रियों के नाम बदलने तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार के कामकाज में तेजी लाने के लिए कई मौजूदा मंत्रियों के विभाग बदलने की भी योजना है। मुख्यमंत्री का मानना है कि यदि किसी मंत्री को लंबे समय तक एक ही विभाग में रखने के बजाय उन्हें नई चुनौतियां दी जाएं, तो प्रशासनिक परिणामों में सुधार आता है। यह पुनर्गठन राज्य की प्रशासनिक मशीनरी को आगामी विधानसभा और स्थानीय चुनावों की तैयारियों के अनुरूप ढालने का एक प्रयास है। राज्य सरकार की इस कवायद का असर सीधे तौर पर आगामी बजट सत्र और अन्य सरकारी नीतियों पर देखने को मिलेगा। क्या यह बदलाव जनता की उम्मीदों पर खरा उतरेगा या सरकार को नई अंदरूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल, प्रदेश की राजनीति में इस संभावित बदलाव की सरगर्मियां पूरे उफान पर हैं।