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मध्यप्रदेश में मानसून का ब्रेक! 6% कम बारिश, 37 जिले पीछे और 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी

MP monsoon rainfall deficit : मध्यप्रदेश में अब तक 834.4 मिमी बारिश दर्ज हुई है, जो सामान्य 886.6 मिमी से 6% कम है। 37 जिलों में बारिश सामान्य से नीचे है, जबकि 23 जिलों में आंकड़ा बेहतर है।
MP monsoon rainfall deficit

MP monsoon rainfall deficit : मध्यप्रदेश में मानसून अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ता दिख रहा है। बारिश का दौर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन अगले कुछ दिनों में तेज बारिश से बड़ी राहत मिलने के संकेत हैं। इसी बीच प्रदेश की कुल बारिश का आंकड़ा अभी भी सामान्य से पीछे चल रहा है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में अब तक करीब 834.4 मिमी यानी 32.8 इंच बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य आंकड़ा 886.6 मिमी यानी 34.9 इंच है। यानी प्रदेश में अब तक सामान्य से करीब 6 फीसदी कम पानी बरसा है।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि पूरे प्रदेश की तस्वीर एक जैसी नहीं है। पूर्वी मध्यप्रदेश के कई जिलों में बारिश ने सामान्य आंकड़े को पीछे छोड़ दिया है, जबकि पश्चिमी हिस्से के कई जिले अब भी बारिश की कमी से जूझ रहे हैं।

मौसम का अगला बदलाव भी महत्वपूर्ण है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के उपलब्ध पूर्वानुमान में 15 और 16 सितंबर को मध्यप्रदेश के दोनों मौसम संभागों के लिए भारी बारिश की चेतावनी नहीं है। इसका मतलब है कि अगले कुछ दिन जोरदार बारिश के बजाय हल्की या स्थानीय बारिश देखने को मिल सकती है।

ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि बारिश कितनी हुई, बल्कि यह भी है कि मानसून के अंतिम दौर में प्रदेश के जिन जिलों में कमी है, क्या वहां बारिश का आंकड़ा सुधर पाएगा?

MP में अगले चार दिन कैसा रहेगा मौसम?

पिछले कुछ दिनों में पश्चिमी मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधि देखने को मिली। इंदौर में भी 13 सितंबर को 31 मिमी बारिश दर्ज हुई थी और 14 सितंबर के लिए भारी बारिश का पूर्वानुमान था। हालांकि 15 सितंबर से मौसम के तेवर अपेक्षाकृत नरम रहने का अनुमान है।

IMD के उपलब्ध पूर्वानुमान के मुताबिक 15 और 16 सितंबर को पश्चिमी और पूर्वी मध्यप्रदेश के लिए भारी बारिश की चेतावनी नहीं है। स्थानीय स्तर पर गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना बनी रह सकती है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगले कुछ दिन प्रदेश में लगातार मूसलाधार बारिश की बजाय छिटपुट और हल्की बारिश ज्यादा महत्वपूर्ण रह सकती है।

37 जिलों में अब भी बारिश सामान्य से कम

प्रदेश के कुल बारिश आंकड़े में कमी का बड़ा कारण कई जिलों में सामान्य से कम पानी गिरना है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 37 जिले ऐसे हैं जहां मानसूनी बारिश अभी सामान्य स्तर तक नहीं पहुंची है। पश्चिमी मध्यप्रदेश में स्थिति कुछ ज्यादा असमान है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा जैसे जिलों में सामान्य की तुलना में कमी दर्ज की गई है।

इनमें आलीराजपुर की स्थिति खास तौर पर कमजोर बताई गई है। यहां सीजन में अब तक करीब 16 इंच बारिश दर्ज हुई है। यानी प्रदेश के उन जिलों में यह इलाका शामिल है जहां मानसून ने अपेक्षित पानी नहीं दिया।

पूर्वी मध्यप्रदेश में बारिश का प्रदर्शन बेहतर

दूसरी तरफ पूर्वी मध्यप्रदेश के कई जिलों ने इस सीजन में बेहतर प्रदर्शन किया है। जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल संभाग के कई इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

निवाड़ी में सामान्य से करीब 49 फीसदी अधिक, मऊगंज में 44 फीसदी, सतना में 34 फीसदी और मैहर में 29 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

मऊगंज में अब तक करीब 54.9 इंच बारिश दर्ज हुई है। सतना में भी बारिश का आंकड़ा 50 इंच से ऊपर पहुंच चुका है। इससे साफ है कि प्रदेश के एक हिस्से में अच्छी बारिश हुई, लेकिन उसका असर पूरे राज्य के औसत पर समान रूप से नहीं पड़ा।

23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

प्रदेश में 23 जिले ऐसे हैं जहां अब तक सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इनमें अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी शामिल हैं।

इस सूची से एक अहम बात सामने आती है प्रदेश में बारिश की कमी का मतलब हर जिले में सूखा जैसा हाल नहीं है। कुछ जिलों में सामान्य से काफी ज्यादा बारिश हुई है, जबकि कुछ इलाके पीछे रह गए हैं। यही वजह है कि राज्य का औसत आंकड़ा बारिश के अलग-अलग क्षेत्रीय प्रदर्शन को पूरी तरह नहीं दिखाता।

पश्चिमी MP के जिलों में ज्यादा चिंता

पश्चिमी मध्यप्रदेश के कई जिलों में सामान्य बारिश से कमी दर्ज हुई है। उपलब्ध आंकड़ों में कुछ जिलों में यह कमी 2 फीसदी से लेकर 49 फीसदी तक बताई गई है।

दूसरी ओर पूर्वी हिस्से के कुछ जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश ने तस्वीर को संतुलित किया है। यही क्षेत्रीय अंतर मध्यप्रदेश के इस मानसून की सबसे बड़ी खासियतों में से एक है।

किसी जिले में बारिश कम होने का असर स्थानीय खेती, जल स्रोतों और मिट्टी की नमी पर पड़ सकता है, लेकिन इसका प्रभाव हर जिले में एक जैसा नहीं होता। इसलिए राज्य के औसत आंकड़े के साथ जिला स्तर की स्थिति देखना ज्यादा उपयोगी है।

जून की बारिश की कमी अब भी पूरी नहीं हुई

इस मानसून की शुरुआत प्रदेश के लिए बहुत मजबूत नहीं रही। जून में मध्यप्रदेश में सामान्य से करीब 14 फीसदी कम बारिश हुई थी। इसके बाद जुलाई और अगस्त में बारिश की गतिविधि बेहतर हुई और कई हिस्सों में अच्छी बारिश हुई। अगस्त के अंतिम सप्ताह और सितंबर की शुरुआत में सक्रिय मौसम प्रणालियों से भी कई जिलों को बारिश मिली।

इससे प्रदेश का संचयी आंकड़ा सुधरा, लेकिन जून में बनी कमी पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी। नतीजा यह है कि सितंबर के मध्य तक पहुंचने के बावजूद प्रदेश सामान्य बारिश के आंकड़े