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समय से पहले दस्तक दे सकता है मानसून, इंदौर-भोपाल में जून की शुरुआत से बदलेगा मौसम


Kerala Monsoon 2026 : मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच अब मौसम करवट लेने लगा है। पिछले कई दिनों से तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार बना हुआ है, लेकिन बादलों की आवाजाही, बढ़ती नमी और पश्चिमी विक्षोभ के असर से प्रदेश के कई हिस्सों में गर्मी के तेवर नरम पड़ते दिख रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार यदि दक्षिण-पश्चिम मानसून 26 मई के आसपास केरल पहुंचता है, तो जून के पहले सप्ताह से मध्य प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां तेज हो सकती हैं। इसका असर इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर समेत कई शहरों में देखने को मिलेगा।

प्री-मानसून क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

प्री-मानसून केवल मौसम बदलाव का संकेत नहीं होता, बल्कि यह कृषि और जल प्रबंधन दोनों के लिए अहम चरण माना जाता है। इस दौरान वातावरण में नमी बढ़ती है, तेज हवाएं चलती हैं, गरज-चमक के साथ हल्की या मध्यम बारिश होती है और तापमान में अस्थायी गिरावट दर्ज की जाती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार प्री-मानसून की बारिश से खेतों में नमी बनती है, जिससे खरीफ फसलों की तैयारी आसान हो जाती है। खासकर सोयाबीन, मक्का और धान की बुवाई वाले क्षेत्रों में इसका सकारात्मक असर पड़ता है। हालांकि इसी अवधि में बिजली गिरने और धूलभरी आंधी की घटनाएं भी बढ़ती हैं, इसलिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

इंदौर में कब तक पहुंच सकता है मानसून?

मौसम विभाग के पुराने आंकड़ों के अनुसार केरल में मानसून पहुंचने के लगभग 15 से 22 दिन बाद इंदौर और पश्चिमी मध्य प्रदेश में इसकी एंट्री होती है। 2019 से 2025 के बीच इंदौर में मानसून सामान्यत: 15 से 20 जून के बीच पहुंचा। यदि इस बार मानसून केरल में समय से पहले आता है और रास्ते में कोई मजबूत चक्रवाती सिस्टम बाधा नहीं बनता, तो इंदौर में जून के पहले सप्ताह से ही प्री-मानसून गतिविधियां तेज हो सकती हैं। शहर में तेज हवाएं, बादल, धूलभरी आंधी और गरज-चमक के साथ बारिश का दौर शुरू होने की संभावना जताई गई है। इससे लंबे समय से पड़ रही गर्मी से राहत मिल सकती है।

नौतपा 2026 में इस बार कम दिख सकता है असर

इस साल नौतपा 25 मई से शुरू होगा, लेकिन मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि लगातार बादल और बारिश का दौर बना रहा तो नौतपा का असर सामान्य वर्षों की तुलना में कमजोर रह सकता है। आमतौर पर नौतपा के दौरान तापमान तेजी से बढ़ता है और लू का प्रभाव चरम पर होता है, लेकिन इस बार पश्चिमी विक्षोभ और अरब सागर से आ रही नमी मौसम को प्रभावित कर सकती है। इससे कई शहरों में अधिकतम तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा।

भोपाल में जून की शुरुआत से बदल सकता है मौसम

भोपाल उन बड़े शहरों में शामिल है जहां मानसून अपेक्षाकृत जल्दी पहुंचता है। सामान्य स्थिति में मानसून जबलपुर और इंदौर के आसपास या 24 से 48 घंटे के भीतर भोपाल पहुंच जाता है। इस बार मौसम विभाग को उम्मीद है कि 1 से 7 जून के बीच भोपाल में तेज हवाएं, बादल और गरज-चमक के साथ प्री-मानसून गतिविधियां शुरू हो सकती हैं। वहीं 15 जून के आसपास मानसून की सक्रिय एंट्री संभव मानी जा रही है।

जबलपुर में सबसे पहले दस्तक दे सकता है मानसून

मध्य प्रदेश में मानसून की एंट्री अक्सर दक्षिण-पूर्वी हिस्सों से होती है। यही वजह है कि जबलपुर और महाकौशल क्षेत्र में मानसून सबसे पहले पहुंचता है। यदि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों तरफ के सिस्टम सक्रिय बने रहते हैं, तो 12 से 15 जून के बीच जबलपुर में पहली मानसूनी बारिश देखने को मिल सकती है। इससे आसपास के जिलों में भी मौसम तेजी से बदलेगा।

ग्वालियर-चंबल में जून के आखिर तक इंतजार

उत्तर भारत के करीब होने के कारण ग्वालियर और चंबल संभाग में मानसून सबसे आखिर में पहुंचता है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक यहां 22 से 25 जून के बीच मानसून की एंट्री हो सकती है। हालांकि 15 जून के बाद से ही प्री-मानसून गतिविधियां शुरू होने के संकेत हैं। धूलभरी आंधी और हल्की बारिश से लोगों को गर्मी और लू से राहत मिलने लगेगी।

चक्रवाती सिस्टम बना सकता है बड़ा अंतर

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि केरल में मानसून का जल्दी पहुंचना हमेशा यह तय नहीं करता कि मध्य प्रदेश में भी मानसून उसी गति से पहुंचेगा। अगर अरब सागर या बंगाल की खाड़ी में कोई मजबूत चक्रवाती सिस्टम विकसित होता है, तो मानसून की रफ्तार प्रभावित हो सकती है। ऐसे सिस्टम मानसूनी हवाओं की दिशा और गति बदल देते हैं, जिससे कई राज्यों में बारिश की टाइमिंग आगे-पीछे हो जाती है।