मध्य प्रदेश में फिर एक्टिव हुआ मानसून, सीधी-मऊगंज-डिंडौरी में ऑरेंज अलर्ट; आगे इन संभागों में बढ़ेगा बारिश का असर
MP Weather News: मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर करवट ली है और इस बार बारिश का असर धीरे-धीरे पूर्व से पश्चिम की तरफ बढ़ता दिख रहा है। बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी हिस्से और उससे लगे पश्चिम बंगाल-उत्तर ओडिशा क्षेत्र में बने निम्न दबाव क्षेत्र ने मौसम का मिजाज बदल दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक यह सिस्टम उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने की संभावना में है, जिसका असर मध्य भारत के मौसम पर भी पड़ रहा है।
आज, 17 अगस्त 2026 को मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश सबसे ज्यादा सक्रिय रहने की उम्मीद है। IMD के ताजा उप-विभागीय पूर्वानुमान में पूर्वी मध्य प्रदेश के लिए आज बहुत भारी बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी मौसम पूरी तरह शांत नहीं रहेगा और आने वाले दिनों में वहां बारिश की गतिविधि बढ़ने का संकेत है।
सीधी, मऊगंज और डिंडौरी में ऑरेंज अलर्ट
सोमवार को सीधी, मऊगंज और डिंडौरी में अति भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट बताया गया है। उपलब्ध मौसम अपडेट के अनुसार इन इलाकों में अगले 24 घंटे के दौरान करीब 4 से 8 इंच तक बारिश होने की संभावना जताई गई है। इतनी बारिश कम समय में होती है तो निचले इलाकों में पानी भरने, छोटी नदियों-नालों का जलस्तर बढ़ने और स्थानीय आवागमन प्रभावित होने जैसी स्थिति बन सकती है।
हालांकि, किसी जिले में वास्तविक बारिश कितनी होगी, यह स्थानीय बादलों और मौसम तंत्र की स्थिति पर निर्भर करता है। इसलिए अलर्ट को संभावित मौसम जोखिम के रूप में देखना जरूरी है, न कि हर स्थान पर समान मात्रा में बारिश की गारंटी के तौर पर।
इन जिलों में भी भारी बारिश की चेतावनी
सीधी, मऊगंज और डिंडौरी के अलावा सतना, पन्ना, दमोह, कटनी, शहडोल, अनूपपुर, जबलपुर, नरसिंहपुर, सिवनी, मंडला और बालाघाट में भी भारी बारिश की चेतावनी है। इसका मतलब साफ है कि पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी मध्य प्रदेश का बड़ा हिस्सा अगले कुछ समय तक सक्रिय मानसून की चपेट में रह सकता है।
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— India Meteorological Department (@Indiametdept) August 16, 2026
IMD के 17 अगस्त के उप-विभागीय पूर्वानुमान में पूर्वी मध्य प्रदेश के लिए 17 अगस्त को बहुत भारी बारिश, 18 और 19 अगस्त को भारी बारिश तथा 21 से 23 अगस्त तक भी भारी बारिश की संभावना दर्ज की गई है। यानी बारिश का यह दौर सिर्फ एक दिन की गतिविधि तक सीमित रहने वाला नहीं दिख रहा।
बंगाल की खाड़ी में बना सिस्टम
मध्य प्रदेश की मौजूदा बारिश को समझने के लिए बंगाल की खाड़ी में बने मौसम तंत्र को देखना जरूरी है। IMD ने 16 अगस्त को बताया था कि उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे लगे पश्चिम बंगाल-उत्तर ओडिशा तट के पास निम्न दबाव क्षेत्र बना है। इसके प्रभाव से ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड और आसपास के क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना बनी। सिस्टम के उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने से मध्य भारत के मौसम पर भी इसका असर पड़ रहा है।
यही वजह है कि मध्य प्रदेश में बारिश का पैटर्न पूर्वी हिस्से से शुरू होकर आगे पश्चिम की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। मानसून के दौरान बंगाल की खाड़ी से बनने वाले ऐसे सिस्टम मध्य भारत में बारिश बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
भोपाल, इंदौर और उज्जैन
मौसम की मौजूदा स्थिति का असर आगे चलकर भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग में भी बढ़ सकता है।
IMD के पश्चिमी मध्य प्रदेश संबंधी ताजा पूर्वानुमान में 17 और 18 अगस्त को गरज-चमक तथा बिजली गिरने की गतिविधि की संभावना है। 19 अगस्त को भारी बारिश का संकेत दिया गया है, जबकि 20 और 21 अगस्त को बहुत भारी बारिश की संभावना दर्ज की गई है।
अगले कुछ दिन मध्य प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण
मध्य प्रदेश में मौसम की तस्वीर अभी स्थिर नहीं हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 17 अगस्त को बहुत भारी बारिश का खतरा है और अगले दिनों में भी भारी बारिश की चेतावनी बनी हुई है। पश्चिमी हिस्से में बारिश का असर बाद के दिनों में बढ़ने का पूर्वानुमान है।
इसलिए आने वाले दिनों में जिलेवार मौसम अपडेट देखना ज्यादा उपयोगी रहेगा। एक ही राज्य में अलग-अलग जिलों में अलर्ट की श्रेणी अलग हो सकती है।
