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MP Board Exam 2026 : पेपर लीक के नाम पर टेलीग्राम पर ठगी, छात्र रहें सावधान


MP Board Exam 2026 : मध्यप्रदेश में बोर्ड परीक्षाओं की तारीखें जैसे-जैसे नजदीक आ रही हैं, छात्रों और अभिभावकों के बीच तनाव बढ़ना स्वाभाविक है। लेकिन इसी मानसिक दबाव का फायदा उठाने के लिए साइबर ठगों का एक बड़ा गिरोह सक्रिय हो गया है। ये ठग सोशल मीडिया के जरिए 'पेपर लीक' का झूठा दावा कर मासूम छात्रों को अपना शिकार बना रहे हैं। प्रशासन और पुलिस विभाग ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए चेतावनी जारी की है कि किसी भी अनजान लिंक या दावे पर भरोसा करना भारी पड़ सकता है।

कैसे बुना जाता है ठगी का डिजिटल जाल

आजकल टेलीग्राम और व्हाट्सऐप जैसे मैसेजिंग ऐप्स इन अपराधियों के लिए सबसे आसान औजार बन गए हैं। ये ठग ऐसे ग्रुप और चैनल बनाते हैं जिनका नाम और प्रोफाइल पिक्चर बिल्कुल आधिकारिक बोर्ड जैसा नजर आता है। छात्रों को लुभाने के लिए ये लोग कुछ पुराने पेपर्स या फर्जी प्रश्नपत्रों के फोटो साझा करते हैं जिससे छात्र भ्रमित हो जाते हैं। इन ग्रुप्स में शामिल होने के बाद छात्रों से 'सीक्रेट पेपर' देने के बदले ऑनलाइन भुगतान की मांग की जाती है। ठगी की यह रकम आमतौर पर 500 से 2000 रुपये के बीच रखी जाती है ताकि छात्र बिना ज्यादा सोचे पैसे भेज दें।

पुराने मामलों से सबक लेना है जरूरी

यह पहली बार नहीं है जब मध्य प्रदेश में बोर्ड परीक्षाओं के दौरान इस तरह की धोखाधड़ी देखने को मिली है। पिछले दो सालों के आंकड़े बताते हैं कि साइबर सेल ने ऐसे कई बड़े मामलों का खुलासा किया है। भोपाल क्राइम ब्रांच ने छिंदवाड़ा जिले के दमुआ से एक ऐसे ही युवक को गिरफ्तार किया था, जो खुद नीट की तैयारी कर रहा था लेकिन टेलीग्राम पर फर्जी चैनल चलाकर छात्रों को लूट रहा था। उसने एक लाख से ज्यादा लोगों को अपने चैनल से जोड़ा और सैकड़ों छात्रों से पैसे ऐंठ लिए। यह उदाहरण दिखाता है कि स्क्रीन के पीछे बैठा व्यक्ति कोई अधिकारी नहीं बल्कि एक शातिर अपराधी हो सकता है।

प्रशासन की सख्ती और आपकी जिम्मेदारी

क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बोर्ड परीक्षाओं की गोपनीयता बहुत कड़ी होती है और पेपर लीक होने की खबरें ज्यादातर महज एक अफवाह होती हैं। एडिशनल डीसीपी शैलेंद्र सिंह चौहान के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले प्रश्नपत्र पूरी तरह फर्जी होते हैं। यदि कोई छात्र या अभिभावक ऐसे लेनदेन में शामिल होता है, तो वह न केवल अपने पैसे गंवाता है बल्कि अनजाने में एक कानूनी अपराध का हिस्सा भी बन जाता है। पुलिस ने सलाह दी है कि केवल माध्यमिक शिक्षा मंडल की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई जानकारी को ही सच मानें।

सतर्क रहें और सुरक्षित रहें

परीक्षा के समय छात्रों को अपनी मेहनत और रिवीजन पर ध्यान देना चाहिए न कि किसी शॉर्टकट की तलाश में भटकना चाहिए। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आपको किसी भी ग्रुप में पेपर बेचने का दावा दिखाई दे, तो तुरंत उसकी रिपोर्ट करें और साइबर हेल्पलाइन नंबर पर सूचित करें।