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MP Cabinet Decisions: 1 सितंबर को मोहन सरकार ने लिए कौन-कौन से बड़े फैसले? मूंग, यूनिवर्सिटी, सड़क और लोकपाल की पूरी जानकारी

MP Cabinet Decisions 1 September 2026

MP Cabinet Decisions 1 September 2026 : मध्यप्रदेश में मंगलवार को हुई मोहन यादव कैबिनेट बैठक में तकनीकी शिक्षा, सड़क परियोजनाओं, प्रशासनिक व्यवस्था और नए जिलों में सरकारी कार्यालयों को मजबूत करने से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। सबसे ज्यादा चर्चा RGPV के पुनर्गठन, तीन क्षेत्रीय टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी और जिला स्तर पर शिकायत निवारण व्यवस्था को लेकर है।

भोपाल के मंत्रालय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 1 सितंबर 2026 को हुई कैबिनेट बैठक के बाद लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने फैसलों की जानकारी दी। बैठक में करीब 41 हजार करोड़ रुपये से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी मिलने की रिपोर्ट भी सामने आई है। इस बैठक के फैसलों का असर सीधे किसानों, इंजीनियरिंग छात्रों, सड़क यात्रियों और नए जिलों में सरकारी सेवाओं का इंतजार कर रहे लोगों पर पड़ सकता है।

मूंग किसानों के लिए 60% MSP खरीद का फैसला 

मध्यप्रदेश के मूंग उत्पादकों के लिए 60 प्रतिशत तक MSP पर खरीद का फैसला पहले ही जुलाई में घोषित किया जा चुका था। इससे पहले पात्र किसानों की उपज का 25 प्रतिशत तक सरकारी खरीद का प्रावधान था, जिसे राज्य सरकार ने बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने की घोषणा की थी।

सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के बाद यह फैसला सामने आया था। इसके बाद मूंग खरीदी को लेकर चल रहा किसानों का विरोध भी समाप्त हुआ। आकाशवाणी की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने पात्र किसानों से 60 प्रतिशत तक मूंग खरीदने पर सहमति जताई थी।

इसका मतलब यह है कि पात्र किसान अपनी मूंग उपज के पहले के मुकाबले बड़े हिस्से को सरकारी खरीद व्यवस्था में बेच सकेंगे। नर्मदापुरम, सीहोर और हरदा जैसे मूंग उत्पादक क्षेत्रों में यह फैसला खास महत्व रखता है।

हालांकि किसानों के लिए यह समझना जरूरी है कि 60 प्रतिशत खरीद का अर्थ हर किसान की पूरी उपज का 60 प्रतिशत बिना किसी अन्य पात्रता या प्रक्रिया के स्वतः खरीदा जाना नहीं है। खरीद निर्धारित नियमों, पंजीयन, पात्रता और उपार्जन व्यवस्था के तहत होगी।

RGPV अब तीन क्षेत्रीय टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी में बंटेगा

कैबिनेट बैठक का सबसे बड़ा फैसला तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में सामने आया है। राज्य सरकार ने राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय यानी RGPV के पुनर्गठन को मंजूरी दी है।

इसके तहत प्रदेश में तीन क्षेत्रीय प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय बनाए जाएंगे। भोपाल, उज्जैन और जबलपुर इनके प्रमुख केंद्र होंगे। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा RGPV को तीन हिस्सों में बांटने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है और विश्वविद्यालय के नाम से राजीव गांधी का नाम हटाने की बात भी सामने आई है।

भोपाल में मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय

भोपाल में बनने वाला विश्वविद्यालय मध्य भारत क्षेत्र की तकनीकी शिक्षा का प्रमुख केंद्र होगा। इसके दायरे में भोपाल के साथ नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग के जिले शामिल किए जाने हैं। इससे इन क्षेत्रों के तकनीकी संस्थानों को क्षेत्रीय स्तर पर विश्वविद्यालयी प्रशासन से जुड़ने का रास्ता मिलेगा।

उज्जैन में मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय

मालवा क्षेत्र के लिए उज्जैन में नया प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय प्रस्तावित है। इसके दायरे में उज्जैन और इंदौर संभाग के जिले आएंगे। इंजीनियरिंग, तकनीकी शिक्षा और कौशल आधारित पाठ्यक्रमों के संचालन में क्षेत्रीय व्यवस्था बनने से छात्रों और कॉलेजों को प्रशासनिक स्तर पर सुविधा मिलने की उम्मीद है।

जबलपुर में महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय

महाकौशल क्षेत्र के लिए जबलपुर में विश्वविद्यालय बनेगा। इसके अंतर्गत जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल क्षेत्र के जिले शामिल किए जाने की जानकारी दी गई है।

सरकार के अनुसार RGPV से वर्तमान में बड़ी संख्या में तकनीकी संस्थान और विद्यार्थी जुड़े हुए हैं। इसलिए तीन क्षेत्रीय विश्वविद्यालयों की व्यवस्था को तकनीकी शिक्षा के प्रशासन को ज्यादा क्षेत्रीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


भोपाल बाईपास से घटेगा लंबा सफर

कैबिनेट ने पश्चिमी भोपाल बाईपास फोरलेन परियोजना से जुड़े प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। इस परियोजना की लागत बढ़कर करीब 3,225 करोड़ रुपये हो गई है। पहले इस फोरलेन की लंबाई लगभग 40 किलोमीटर बताई गई थी, जिसे संशोधित करके 35.61 किलोमीटर किया गया है। वहीं जमीन अधिग्रहण से जुड़ी राशि में भी बड़ा बदलाव किया गया है।

परियोजना पूरी होने के बाद जबलपुर-नर्मदापुरम-इंदौर दिशा में आने-जाने वाले यात्रियों को फायदा मिलने की उम्मीद है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस रूट पर करीब 21 किलोमीटर की दूरी कम हो सकती है। रातापानी क्षेत्र में अंडरपास की संख्या बढ़ाने का भी प्रावधान किया गया है। यह हिस्सा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सड़क निर्माण के साथ वन्यजीव और स्थानीय आवागमन से जुड़े मुद्दों को भी ध्यान में रखना पड़ता है।

महलुआ-बीना-खिमलासा-मालथोन फोरलेन को भी मंजूरी

सरकार ने महलुआ-बीना-खिमलासा-मालथोन मार्ग को फोरलेन में विकसित करने की परियोजना को भी मंजूरी दी है। इसकी लागत बढ़कर करीब 2,776 करोड़ रुपये बताई गई है। यह परियोजना मध्यप्रदेश के सड़क नेटवर्क और प्रमुख औद्योगिक एवं कृषि क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है।