- मुख्यमंत्री मोहन यादव के दिल्ली दौरे के बाद मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं काफी तेज हो गई हैं।
- केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद सरकार और संगठन में बड़े बदलाव की ठोस रणनीति बनाई जा रही है।
- मध्य प्रदेश सरकार में फिलहाल मुख्यमंत्री सहित 35 मंत्रियों की जगह स्वीकृत है, जिसमें से 4 पद अभी खाली हैं।
MP Cabinet Expansion Latest Update : मध्य प्रदेश की
राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हाल ही में दिल्ली का दौरा कर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से महत्वपूर्ण मुलाकात की है। इस उच्च स्तरीय बैठक के बाद राज्य में जल्द होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं अचानक तेज हो गई हैं। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि मई और जून के बीच मोहन सरकार का पहला बड़ा फेरबदल हो सकता है। सरकार के कामकाज का जमीनी फीडबैक लेने और संगठन को नए सिरे से मजबूत करने के मकसद से इस पूरी रणनीति को अंजाम दिया जा रहा है। इस बदलाव में जहां कुछ नए चेहरों को सरकार में आने का मौका मिल सकता है, वहीं कुछ मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी होने की भी पूरी संभावना है। मुख्यमंत्री मोहन यादव लगातार भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के संपर्क में बने हुए हैं। वे समय-समय पर राज्य सरकार के कामकाज और मंत्रियों के प्रदर्शन की रिपोर्ट आलाकमान को सौंप रहे हैं। अपने इस दिल्ली दौरे के दौरान उन्होंने भाजपा के कई वरिष्ठ राष्ट्रीय नेताओं के साथ बंद कमरे में बैठकें की हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह केवल एक सामान्य शिष्टाचार भेंट नहीं है, बल्कि इसके पीछे संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर एक बड़ा बदलाव करने की ठोस रणनीति तैयार की जा रही है। हाल ही में भाजपा के दिग्गज नेता कैलाश विजयवर्गीय की भी अमित शाह से मुलाकात हुई थी। इस मुलाकात को भी इसी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे साफ है कि आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश भाजपा के भीतर कुछ बड़े फैसले होने वाले हैं। सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, आगामी मंत्रिमंडल विस्तार में छह से सात नए विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है। वर्तमान में मध्य प्रदेश सरकार में मुख्यमंत्री को मिलाकर कुल 35 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इस समय कैबिनेट में चार पद पूरी तरह खाली पड़े हैं। हालांकि, यह विस्तार केवल इन खाली पड़े चार पदों को भरने तक सीमित नहीं रहने वाला है। कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा नेतृत्व कुछ मौजूदा मंत्रियों के कामकाज से संतुष्ट नहीं है, इसलिए उनके विभागों में बदलाव किया जा सकता है या उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है। जिन मंत्रियों को कैबिनेट से हटाया जाएगा, उन्हें संगठन में या फिर राष्ट्रीय स्तर पर कोई नई और बड़ी जिम्मेदारी सौंपकर संतुष्ट किया जा सकता है। भाजपा ने साल 2023 के विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक और प्रचंड बहुमत हासिल किया था। हालांकि, जब दिसंबर 2023 में सरकार का गठन हुआ, तब कई वरिष्ठ नेताओं और बेहद अनुभवी विधायकों को कैबिनेट में जगह नहीं मिल पाई थी। उस समय सरकार में नए और युवा चेहरों को प्राथमिकता दी गई थी। अब सरकार के गठन को लंबा समय बीत चुका है, इसलिए पार्टी नेतृत्व वरिष्ठों के अनुभव का लाभ उठाना चाहता है। आगामी विस्तार में क्षेत्रीय संतुलन को ठीक करने और जातीय समीकरणों को मजबूत करने पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। महाकौशल, ग्वालियर-चंबल, मालवा और विंध्य जैसे प्रमुख क्षेत्रों को संतुलित प्रतिनिधित्व देने के लिए ही यह पूरी कवायद की जा रही है ताकि आने वाले समय में सरकार की छवि को और अधिक मजबूत और जन-हितैषी बनाया जा सके।