MP Cabinet meeting updates : मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई हालिया कैबिनेट बैठक राज्य के विकास और संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। स्विट्जरलैंड के दावोस दौरे से लौटने के बाद मुख्यमंत्री ने प्रदेश के किसानों, युवाओं और वन्यजीवों के हितों को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण फाइलों पर मुहर लगा दी है। इस बैठक में सरकार ने न केवल बाघों की सुरक्षा के लिए खजाना खोला है, बल्कि पिछड़ा वर्ग के युवाओं के लिए विदेशी धरती पर रोजगार के रास्ते भी आसान कर दिए हैं।
टाइगर रिजर्व के लिए 390 करोड़ की बड़ी योजना
मध्यप्रदेश को 'टाइगर स्टेट' के नाम से जाना जाता है और इस गौरव को बनाए रखने के लिए सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के नौ टाइगर रिजर्व के बफर जोन में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके साथ ही कुछ दुखद खबरें भी आईं जहां अलग-अलग कारणों से बाघों की मौत हुई। वन्यजीवों की इस असुरक्षा को खत्म करने और उनके संरक्षण को और मजबूत बनाने के लिए कैबिनेट ने 390 करोड़ रुपए की योजना को मंजूरी दी है। यह राशि मुख्य रूप से बफर जोन की सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने और वहां होने वाली गतिविधियों पर नजर रखने के लिए खर्च की जाएगी।
पिछड़ा वर्ग के युवाओं के लिए विदेशी नौकरी का रास्ता साफ
राज्य सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी युवाओं के लिए चल रही रोजगार योजना का विस्तार करते हुए इसका दायरा काफी बड़ा कर दिया है। साल 2022 में शुरू हुई इस योजना का नाम अब बदलकर 'अन्य पिछड़ा वर्ग विदेश रोजगार निवेश और नियोजन योजना 2025' कर दिया गया है। https://twitter.com/CMMadhyaPradesh/status/2016122854899909026 पहले इस योजना के तहत युवाओं को केवल जापान भेजने का ही नियम था, लेकिन अब सरकार ने इस पाबंदी को हटा दिया है। अब प्रदेश के युवा दुनिया के किसी भी देश में नौकरी के लिए जा सकेंगे और उनके आने-जाने का पूरा खर्च सरकार उठाएगी। इस काम के लिए 45 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है जिससे करीब 600 से ज्यादा युवाओं को सीधा लाभ मिलेगा।
किसानों के लिए सिंचाई की नई सौगात
खेती-किसानी के क्षेत्र में नरसिंहपुर जिले के लिए सरकार ने बड़ी खुशखबरी दी है। सोहागपुर, बाबई और पिपरिया क्षेत्र के किसानों को अब सिंचाई के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। सरकार ने बागरा और पिपरिया शाखाओं से लिफ्ट इरीगेशन के जरिए पानी पहुंचाने का फैसला किया है। 215 करोड़ रुपए की इस परियोजना से करीब 10,200 हेक्टेयर जमीन सिंचित होगी। इस फैसले का सीधा फायदा 63 गांवों के किसानों को मिलेगा जिनकी फसलें अब पानी की कमी के कारण खराब नहीं होंगी।
पचमढ़ी के विकास की नई राह
पचमढ़ी के विकास को लेकर भी कैबिनेट में अहम चर्चा हुई। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद साडा क्षेत्र के विकास कार्यों पर रोक लग गई थी। सरकार ने अब तकनीकी सुधार करते हुए 395.93 हेक्टेयर जमीन को शहरी आवासीय क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया है जिसे पचमढ़ी अभयारण्य से बाहर रखा गया है। सरकार अब इस संशोधित प्रस्ताव को दोबारा सुप्रीम कोर्ट में पेश करेगी ताकि पर्यावरण की सुरक्षा के साथ-साथ शहर का विकास भी सुनिश्चित किया जा सके।
पुरानी योजनाओं को मिला पांच साल का विस्तार
कैबिनेट ने प्रशासनिक और जनहित से जुड़ी कई मौजूदा योजनाओं को अगले पांच सालों तक जारी रखने की अनुमति दे दी है। इसमें मुख्यमंत्री कृषक फसल उपार्जन योजना सबसे प्रमुख है जो किसानों को उनकी फसल का सही दाम दिलाने में मदद करती है। इसके अलावा राजस्व विभाग के नए कार्यालयों का निर्माण, आवासीय भवनों का विकास, परीक्षाओं के लिए प्रशिक्षण और स्काउट गाइड जैसी गतिविधियों को भी निरंतरता दी गई है।