MP Cruise Tragedy Investigation : मध्य प्रदेश के
जबलपुर स्थित बरगी डैम में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे को एक महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन इस दुर्घटना से जुड़े सवाल अभी भी लोगों के मन में बने हुए हैं। 30 अप्रैल को हुई इस घटना में 13 लोगों की जान चली गई थी। अब इस मामले में गठित न्यायिक जांच आयोग ने औपचारिक रूप से अपनी जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। आयोग का उद्देश्य केवल हादसे के कारणों का पता लगाना नहीं है, बल्कि यह भी समझना है कि क्या इस दुर्घटना को रोका जा सकता था और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए किन सुधारों की आवश्यकता है। शुक्रवार को जांच आयोग ने पहले दिन मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (एमपी टूरिज्म) के अधिकारियों से पूछताछ की। कलेक्टर कार्यालय में हुई सुनवाई के दौरान क्रूज संचालन, तकनीकी स्थिति, सुरक्षा मानकों और राहत-बचाव कार्यों से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर सवाल पूछे गए।
हादसे की तह तक पहुंचने की कोशिश
न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष जस्टिस द्विवेदी ने अधिकारियों से विस्तार से जानकारी ली कि बरगी डैम में क्रूज सेवा कब शुरू हुई थी और क्या इसके संचालन के दौरान नियमित तकनीकी परीक्षण किए जाते थे। आयोग ने यह भी जानना चाहा कि क्रूज की स्थिति को लेकर समय-समय पर क्या रिपोर्ट तैयार की गईं और उन पर क्या कार्रवाई हुई। जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण मुद्दा इंजन की खराबी से संबंधित पत्र का भी रहा। आयोग ने अधिकारियों से पूछा कि तत्कालीन प्रबंधक द्वारा इंजन संबंधी तकनीकी चिंताओं को लेकर भेजे गए पत्र पर समय रहते ध्यान क्यों नहीं दिया गया। यदि किसी तकनीकी समस्या की जानकारी पहले से उपलब्ध थी, तो उसके समाधान में देरी क्यों हुई, यह जांच का अहम बिंदु माना जा रहा है।
तकनीकी खामियां जांच के केंद्र में
बरगी डैम हादसे के बाद सबसे अधिक चर्चा क्रूज की तकनीकी स्थिति को लेकर हुई थी। इसी कारण आयोग ने पहले दिन तकनीकी पहलुओं पर विशेष फोकस रखा। अधिकारियों से पूछा गया कि संबंधित क्रूज कब खरीदा गया था, उसका रखरखाव किस प्रकार किया जाता था और क्या वह निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप संचालन योग्य स्थिति में था। आयोग यह भी जानना चाहता है कि क्या नियमित निरीक्षण और मेंटेनेंस रिकॉर्ड उपलब्ध हैं तथा क्या किसी तकनीकी चेतावनी को नजरअंदाज किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि जल पर्यटन में उपयोग होने वाले जहाजों, बोट्स और क्रूज के लिए समय-समय पर तकनीकी ऑडिट बेहद महत्वपूर्ण होता है। भारत में कई राज्यों ने पिछले कुछ वर्षों में जल पर्यटन को बढ़ावा दिया है, लेकिन इसके साथ सुरक्षा मानकों के कड़ाई से पालन की आवश्यकता भी बढ़ी है।
राहत और बचाव अभियान की भी होगी समीक्षा
जांच आयोग केवल हादसे के कारणों तक सीमित नहीं है। आयोग यह भी मूल्यांकन कर रहा है कि दुर्घटना के बाद राहत और बचाव कार्य कितनी तेजी से शुरू किए गए। सुनवाई के दौरान अधिकारियों से पूछा गया कि हादसे की सूचना मिलने के बाद बचाव दल को घटनास्थल तक पहुंचने में कितना समय लगा। साथ ही यह भी जानकारी मांगी गई कि राहत अभियान में किन एजेंसियों को शामिल किया गया और समन्वय की स्थिति कैसी रही। आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ लंबे समय से इस बात पर जोर देते रहे हैं कि जलाशयों और पर्यटन स्थलों पर आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र मजबूत होना चाहिए। शुरुआती कुछ मिनट किसी भी दुर्घटना में जीवन बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
तीन अधिकारियों के दर्ज हुए बयान
जांच के पहले दिन आयोग के समक्ष तीन अधिकारियों को उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे। इनमें तत्कालीन क्षेत्रीय प्रबंधक संजय मल्होत्रा, मैकल बोट क्लब के मैनेजर एवं वाटर स्पोर्ट्स के तकनीकी सलाहकार कमांडर (सेवानिवृत्त) राजेंद्र निगम तथा बरगी रिसोर्ट के पूर्व प्रबंधक सुनील सिंह मरावी शामिल रहे। जस्टिस द्विवेदी ने तीनों अधिकारियों के बयान दर्ज किए और उनकी प्रशासनिक एवं तकनीकी जिम्मेदारियों से जुड़े सवाल पूछे। तकनीकी सलाहकार से विशेष रूप से क्रूज के रखरखाव, अंतिम मेंटेनेंस, निरीक्षण रिकॉर्ड और संचालन संबंधी प्रक्रियाओं की जानकारी ली गई। सूत्रों के अनुसार आयोग आने वाले दिनों में अन्य अधिकारियों, कर्मचारियों और संबंधित व्यक्तियों के बयान भी दर्ज करेगा। इसके लिए एक विस्तृत सूची तैयार की गई है।