MP News: मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए अब दफ्तरों के चक्कर नहीं, सीएम के निर्देश लागू

MP death certificate rules 2026 : मध्य प्रदेश में रहने वाले लोगों के लिए यह खबर किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। अक्सर देखा गया है कि जब परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटता है, तो अपनों को खोने के गम के साथ-साथ सरकारी दफ्तरों की भागदौड़ और फाइलें निपटाने की उलझनें इंसान को तोड़ देती हैं। खास तौर पर मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए नगर निगम, नगर पालिका या ग्राम पंचायत के चक्कर काटना किसी सजा से कम नहीं लगता। अब मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस पूरी प्रक्रिया को सरल बनाने का क्रांतिकारी फैसला लिया है। सीएम ने हाल ही में आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक ली। इस बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की व्यवस्था अब मुक्तिधामों और विश्राम घाटों में ही की जाए। यह निर्देश सुनने में थोड़ा अलग जरूर लग सकता है, लेकिन इसके पीछे की मंशा एकदम साफ है। सरकार चाहती है कि शोक के समय परिवार को किसी भी तरह की प्रशासनिक परेशानी न झेलनी पड़े। जब हम किसी अपने को अंतिम विदाई देने मुक्तिधाम या विश्राम घाट जाते हैं, तो वहीं पर इस सर्टिफिकेट की प्रक्रिया पूरी करने की योजना बनाई जा रही है। इससे उन लोगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा जिन्हें सरकारी दफ्तरों के नियम-कानून समझने में कठिनाई होती है। अधिकारियों को इस संबंध में एक ठोस और व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार करने के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री का यह निर्देश न केवल शहरी क्षेत्रों के लिए है, बल्कि ग्रामीण अंचल के लोगों के लिए भी बेहद मददगार साबित होगा। पुराने ढर्रे पर चल रही व्यवस्था में लोगों को कई दिनों तक दफ्तरों के दरवाजे खटखटाने पड़ते थे। कई बार तो दस्तावेजों की कमी या कर्मचारियों की लेटलतीफी के कारण महीनों तक प्रमाण पत्र नहीं मिल पाता था। अब इस नई पहल के बाद उम्मीद की जा रही है कि सर्टिफिकेट मिलने की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और समयबद्ध होगी। यह कदम दिखाता है कि सरकार अब आम नागरिकों की समस्याओं के प्रति कितनी संवेदनशील हो रही है। अभी की व्यवस्था पर गौर करें तो मध्य प्रदेश में मृत्यु के 21 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है। इसके लिए आवेदक को स्थानीय नगर निगम, नगर पालिका या ग्राम पंचायत कार्यालय में आवेदन करना पड़ता है। प्रक्रिया के तहत सबसे पहले अस्पताल से मृत्यु का ब्यौरा लिया जाता है। इसके बाद एमपी ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर जाकर आवेदन करना होता है। प्रक्रिया पूरी करने के बाद एक ट्रैकिंग नंबर जनरेट होता है, जिसके जरिए आप अपने सर्टिफिकेट का स्टेटस देख सकते हैं। लेकिन, अब इस पोर्टल की तकनीकी जटिलताओं से मुक्ति दिलाने के लिए मुक्तिधामों में ही व्यवस्था की जाएगी, ताकि कागज और कलम का झमेला खत्म हो सके। यह बदलाव डिजिटल इंडिया के दौर में एक मानवीय स्पर्श की तरह है। सरकार ने प्रशासनिक मशीनरी को निर्देश दिया है कि वे जल्द ही इसका ब्लू प्रिंट तैयार करें। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद, परिवार के किसी सदस्य को मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए सरकारी दफ्तर की चौखट नहीं देखनी पड़ेगी। यह एक ऐसा फैसला है जो लोगों के मन में सरकारी सेवाओं के प्रति भरोसा और सम्मान दोनों बढ़ाएगा। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक विकेंद्रीकरण है। जब काम मौके पर ही होगा, तो बिचौलियों और अनावश्यक देरी की कोई गुंजाइश नहीं बचेगी। मध्य प्रदेश सरकार का यह कदम अन्य राज्यों के लिए भी एक नजीर बन सकता है। आने वाले समय में जब यह व्यवस्था जमीन पर उतरेगी, तो लाखों परिवारों को उस असहनीय दर्द के बीच में सरकारी औपचारिकताएं पूरी करने की जद्दोजहद से आजादी मिल जाएगी। अभी अधिकारियों द्वारा तैयार की जा रही कार्ययोजना पर सबकी नजर है, और उम्मीद यही है कि यह सेवा जल्द ही पूरी तरह से सुलभ हो जाएगी।
