MP के सरकारी शिक्षकों को अब देनी होगी ऑफलाइन पात्रता परीक्षा, जानिए तारीख और नियमों पर ताजा अपडेट
MP Teacher Eligibility Test 2026 : मध्य प्रदेश में सेवारत शिक्षकों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने तय कर दिया है कि प्रदेश के सरकारी और गैर-सरकारी स्कूलों में पहले से पढ़ा रहे शिक्षकों को अब एक ऑफलाइन पात्रता परीक्षा से गुजरना होगा। यह फैसला अचानक नहीं आया है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के दो अलग-अलग आदेशों के बाद लिया गया है।
स्कूल शिक्षा विभाग ने इस पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी माध्यमिक शिक्षा मंडल, भोपाल को सौंपी है। यानी परीक्षा का आयोजन, समय-सारणी और बाकी औपचारिकताएं अब मंडल ही तय करेगा। जो शिक्षक वर्षों से क्लासरूम में पढ़ा रहे हैं, उनके मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि आखिर यह परीक्षा क्यों जरूरी हो गई। जवाब जुड़ा है अदालत के आदेश और भर्ती नियमों से, जिन्हें समझना हर सेवारत शिक्षक के लिए जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जुड़ा है पूरा मामला
यह परीक्षा किसी नई नीति का हिस्सा नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन है। कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को एक आदेश पारित किया था, जिसके बाद 29 मई 2026 को इसी मामले में दोबारा आदेश आया। इन दोनों आदेशों के अनुपालन में मध्य प्रदेश में पहले से कार्यरत प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा कराई जानी है। इसके दायरे में शासकीय स्कूलों के साथ-साथ अशासकीय स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक भी आएंगे।
2028 तक होंगी कुल छह परीक्षाएं
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक यह सिलसिला एक बार में खत्म नहीं होगा। 31 अगस्त 2028 तक कुल छह पात्रता परीक्षाएं आयोजित की जानी हैं। ये परीक्षाएं तय समय-अंतराल पर होंगी, यानी शिक्षकों को समय-समय पर इस प्रक्रिया से गुजरना होगा। यह व्यवस्था सिविल अपील क्रमांक 1385/2025, 1386/2025 और इनसे जुड़ी अन्य याचिकाओं पर पारित आदेश से निकली है। इसके बाद दायर पुनरीक्षण याचिका पर 29 मई 2026 को आया आदेश इस पूरी प्रक्रिया को और स्पष्ट करता है।
दो साल के अंतराल पर होगी परीक्षा
कोर्ट के आदेश में यह भी साफ है कि परीक्षाएं एक तय अंतराल पर आयोजित होंगी। सूत्रों और आदेश के विवरण के अनुसार यह अंतराल दो-दो साल का रखा गया है। इसका मतलब है कि सेवारत शिक्षकों को हर दो साल में एक बार इस पात्रता परीक्षा में शामिल होना पड़ सकता है, जब तक कुल छह परीक्षाओं का चक्र पूरा नहीं हो जाता।
नियम 2018 में पहले से था प्रावधान
दिलचस्प बात यह है कि पात्रता परीक्षा का जिक्र मध्य प्रदेश राज्य स्कूल शिक्षा सेवा शैक्षणिक संवर्ग सेवा शर्तें एवं भर्ती नियम 2018 में पहले से मौजूद है। इस नियम की कंडिका 11 के बिंदु 02 में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए पात्रता परीक्षा की व्यवस्था दी गई है। नियम के मुताबिक यह परीक्षा शासन द्वारा तय की गई एजेंसी के माध्यम से ही कराई जानी है। अब तक इस नियम पर अमल की औपचारिक प्रक्रिया स्पष्ट नहीं थी, जो कोर्ट के ताजा आदेशों के बाद तय हो गई है।
माध्यमिक शिक्षा मंडल संभालेगा पूरी प्रक्रिया
राज्य सरकार ने अब इस परीक्षा के आयोजन के लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल, भोपाल को अधिकृत अभिकरण घोषित कर दिया है। इसका सीधा मतलब है कि परीक्षा से जुड़ा हर काम, आवेदन से लेकर परिणाम तक, मंडल के जिम्मे रहेगा।
इस फैसले के बाद प्रदेश के हजारों सेवारत शिक्षकों के लिए स्थिति काफी हद तक साफ हो गई है। अब उन्हें यह इंतजार रहेगा कि मंडल परीक्षा का कार्यक्रम कब जारी करता है और आवेदन प्रक्रिया कब शुरू होती है। जिन शिक्षकों को इस परीक्षा से जुड़ी अपडेट चाहिए, उन्हें माध्यमिक शिक्षा मंडल की आधिकारिक जानकारी पर नजर बनाए रखनी चाहिए, क्योंकि आगे की तारीखें और दिशा-निर्देश वहीं से जारी होंगे।

