MP Ladli Behna Yojana Kist : मध्यप्रदेश की ला
ड़ली बहनों के लिए 14 जून 2026 का दिन काफी खास होने वाला है। इसी दिन राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव सागर के केसली से लाड़ली बहना योजना की 37वीं किस्त जारी करेंगे। इस बार 1.25 करोड़ लाभार्थी महिलाओं के बैंक खातों में सीधे 1500 रुपये की राशि ट्रांसफर की जाएगी। यह योजना मध्यप्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गई है।
37वीं किस्त से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े
इस महीने की किस्त के साथ राज्य सरकार 1835 करोड़ रुपये खर्च करेगी। यह राशि सीधे सभी पात्र महिलाओं के खातों में डाली जाएगी। सागर में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री न केवल किस्त जारी करेंगे, बल्कि 122.2 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का भी लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे।
1000 से 1500 रुपये तक योजना की यात्रा
लाड़ली बहना योजना शुरुआत में एक साधारण आर्थिक सहायता कार्यक्रम था। जब इसकी शुरुआत हुई तो हर पात्र महिला को महीने में मात्र 1000 रुपये मिलते थे। अक्टूबर 2023 में सरकार ने इस राशि को बढ़ाकर 1250 रुपये कर दिया। इसके बाद नवंबर 2025 में एक और बड़ा कदम उठाते हुए राशि को 1500 रुपये तक पहुंचा दिया गया। यह बढ़ोतरी दरअसल महिलाओं के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। महंगाई के इस दौर में अतिरिक्त 500 रुपये का फायदा परिवारों के बजट में खासा फर्क ला सकता है।
महिलाओं के जीवन में आया बड़ा बदलाव
जब आप पैसे सीधे महिलाओं के हाथों में देते हैं तो सिर्फ आर्थिक राहत नहीं मिलती। मध्यप्रदेश सरकार का अनुभव इसी बात को साबित करता है। लाड़ली बहना योजना अब महज एक आर्थिक सहायता नहीं रह गई है। यह एक सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बन चुकी है। महिलाओं को नियमित आय मिलने से उन्हें अपने घरेलू खर्चों का प्रबंधन करने में आसानी हुई है। अब वे ज्यादा आत्मनिर्भर महसूस करती हैं। जो पैसा वे पहले किसी अन्य के दबाव में खर्च करतीं, अब उसे अपनी समझ से लगाती हैं। बच्चों की पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य पर ध्यान देने में महिलाएं ज्यादा सक्षम हुई हैं। छोटे-छोटे विवेकपूर्ण खर्च ने बड़े सामाजिक फायदे दिए हैं।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
इस योजना का असल जादू आत्मनिर्भरता में दिख रहा है। बहुत सी महिलाओं को इस आर्थिक सहायता ने आगे की ओर कदम बढ़ाने की हिम्मत दी है। वे स्व-सहायता समूहों से जुड़ी हैं। कुछ ने छोटे-मोटे उद्योग शुरू किए हैं। दूसरों ने स्व-रोजगार की गतिविधियों में निवेश किया है। ये सभी कदम मूलतः एक ही बात की ओर इशारा करते हैं कि महिलाएं जब आर्थिक रूप से सुरक्षित महसूस करती हैं तो वे आगे बढ़ने का रास्ता खुद तलाश लेती हैं। योजना से मिला पैसा उनके लिए एक सीढ़ी साबित हुआ है, अंतिम मंजिल नहीं।