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MP Lokayukta Action: 543.19% अधिक संपत्ति के दावे ने बढ़ाई हलचल, जबलपुर से सिवनी तक जांच

सिवनी/जबलपुर में 8 अगस्त 2026 को लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद सरकारी कर्मचारी सुभाष शर्मा की संपत्तियां जांच के दायरे में हैं। शुरुआती जांच में ज्ञात आय की तुलना में 543.19% अधिक संपत्ति और खर्च का दावा सामने आया है।
MP Lokayukta Action

MP Lokayukta Action :  मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की कथित आय से अधिक संपत्ति के मामलों के बीच सिवनी और जबलपुर से सामने आई लोकायुक्त की कार्रवाई ने ध्यान खींचा है। क्षेत्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज प्रशिक्षण केंद्र, सिवनी में सहायक ग्रेड-2 के पद पर कार्यरत सुभाष शर्मा से जुड़े पांच ठिकानों पर शनिवार, 8 अगस्त को तड़के एक साथ तलाशी ली गई। 

रिपोर्टों के मुताबिक, लोकायुक्त की शुरुआती जांच में उनकी ज्ञात आय के मुकाबले संपत्ति और खर्च 543.19% अधिक पाए जाने का दावा किया गया है। अब जमीन, मकान, प्लॉट और दूसरे दस्तावेजों की जांच के जरिए यह तय किया जा रहा है कि वास्तविक आय, संपत्ति और खर्च का हिसाब क्या है।

सुबह 5:30 बजे शुरू हुई कार्रवाई

लोकायुक्त की टीम ने कार्रवाई के लिए सुबह का समय चुना। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, करीब 5:30 बजे जबलपुर और सिवनी से जुड़े पांच ठिकानों पर अलग-अलग टीमें पहुंचीं और तलाशी शुरू की।

यह कार्रवाई कथित आय से अधिक संपत्ति की शिकायत के सत्यापन के बाद की गई। रिपोर्टों में बताया गया है कि प्रारंभिक सत्यापन में शिकायत प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत आगे की कार्रवाई शुरू हुई।

तलाशी के दौरान अधिकारियों ने संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज, जमीन और अन्य रिकॉर्ड खंगाले। जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि संबंधित संपत्तियां किसके नाम पर हैं, उन्हें खरीदने के लिए पैसा कहां से आया और सरकारी कर्मचारी की ज्ञात आय के साथ उनका कितना मेल बैठता है।

543.19% अधिक संपत्ति का आंकड़ा क्यों अहम है?

आय से अधिक संपत्ति के मामलों में केवल संपत्ति की कीमत देखना पर्याप्त नहीं होता। जांच एजेंसियां सामान्य तौर पर संबंधित व्यक्ति की वैध आय, खर्च, निवेश, संपत्ति और उपलब्ध वित्तीय रिकॉर्ड के बीच तुलना करती हैं।

इस मामले में 543.19% का आंकड़ा लोकायुक्त की शुरुआती जांच से जुड़ा बताया गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि अदालत ने भ्रष्टाचार या अवैध संपत्ति रखने का अंतिम निष्कर्ष दे दिया है। अंतिम स्थिति जांच पूरी होने, दस्तावेजों के सत्यापन और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।

करोड़ों की जमीन और प्लॉट की जानकारी सामने आई

तलाशी से जुड़ी शुरुआती जानकारी में जबलपुर के पाटन तहसील क्षेत्र में जमीन और शहर के अलग-अलग हिस्सों में प्लॉट का उल्लेख किया गया है।

रिपोर्टों के मुताबिक, पाटन तहसील के लोहारी गांव में करीब 1.11 करोड़ रुपये मूल्य की कृषि भूमि का पता चला है। इसके अलावा पाटन के मुरुगवान क्षेत्र में लगभग 26 लाख रुपये की संपत्ति की जानकारी सामने आई है।

गोहलपुर और आधारताल इलाके में भी कई प्लॉट मिलने की बात कही गई है, जिनकी अनुमानित कुल कीमत करीब 47.5 लाख रुपये बताई गई है।

सबसे बड़ी संपत्तियों में आधारताल के करमेटा इलाके में करीब 4,581 वर्गफीट का प्लॉट शामिल बताया गया है। इसकी अनुमानित कीमत करीब 2.88 करोड़ रुपये आंकी गई है। ये कीमतें शुरुआती आकलन से जुड़ी हैं और जांच के दौरान दस्तावेजों तथा वास्तविक मूल्यांकन के आधार पर इनमें बदलाव संभव है।

पत्नी के नाम पर संपत्तियों की भी जांच

लोकायुक्त की शुरुआती कार्रवाई में यह बात भी सामने आई है कि कुछ संपत्तियां सुभाष शर्मा की पत्नी शीला शर्मा के नाम पर बताई गई हैं।

किसी संपत्ति का परिवार के किसी दूसरे सदस्य के नाम होना अपने आप में अवैधता साबित नहीं करता। जांच एजेंसी के लिए महत्वपूर्ण सवाल यह होता है कि संपत्ति खरीदने के लिए धन का स्रोत क्या था और क्या उसका संबंध संबंधित सरकारी कर्मचारी की आय से है।

फार्म हाउस और मकानों की जानकारी भी सामने आई

एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, तलाशी में जमीन और भूखंडों के अलावा एक फार्म हाउस तथा दो अन्य मकानों से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। इन संपत्तियों का कुल अनुमानित मूल्य करीब 1.20 करोड़ रुपये बताया गया है। हालांकि, संपत्तियों के वास्तविक मूल्य और स्वामित्व की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

लोकायुक्त की कार्रवाई अभी केवल छापे तक सीमित नहीं है। दस्तावेजों और संपत्ति रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद जांच का दायरा आगे बढ़ सकता है। यही प्रक्रिया यह स्पष्ट करेगी कि शुरुआती जांच में सामने आए आंकड़े अंतिम गणना में किस तरह बदलते हैं।

लोकायुक्त की तलाशी के बाद अगला महत्वपूर्ण चरण दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड का मिलान होगा। जांच टीम को यह देखना होगा कि संबंधित कर्मचारी की सेवा अवधि में उसकी वैध आय कितनी रही, परिवार की आय के दूसरे स्रोत क्या थे और सामने आई संपत्तियों के भुगतान का स्रोत क्या था।

इसके साथ ही संपत्तियों के स्वामित्व, खरीद की तारीख, रजिस्ट्री दस्तावेज और अनुमानित बाजार मूल्य की भी जांच की जा सकती है।