MP Missing Person FIR Rule : अगर आपके परिवार का कोई सदस्य अचानक लापता हो जाए तो सबसे पहला सवाल यही होता है कि पुलिस कितनी जल्दी कार्रवाई करेगी। अब मध्य प्रदेश में इस चिंता को कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने प्रदेश की सभी पुलिस इकाइयों को निर्देश जारी किए हैं कि हर गुमशुदगी के मामले में अनिवार्य रूप से FIR दर्ज की जाए। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन में लिया गया है और इससे पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पहले से कहीं अधिक तेज और व्यवस्थित होने की उम्मीद है। अब तक कई मामलों में गुमशुदगी की सूचना दर्ज तो होती थी, लेकिन हर मामले में FIR नहीं लिखी जाती थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद जैसे ही किसी महिला, पुरुष या अन्य व्यक्ति की गुमशुदगी की सूचना मिलेगी, पुलिस को तुरंत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 140(3) के तहत FIR दर्ज करनी होगी और बिना देरी जांच शुरू करनी होगी।
क्या बदला है नए नियम में?
पुलिस मुख्यालय के नए आदेश के अनुसार अब गुमशुदगी की सूचना को केवल सामान्य शिकायत मानकर नहीं छोड़ा जाएगा। हर सूचना पर तत्काल FIR दर्ज होगी और पुलिस व्यक्ति की तलाश के लिए सभी कानूनी और तकनीकी संसाधनों का उपयोग करेगी। इसका मतलब यह है कि शुरुआती स्तर पर ही मामले की गंभीरता बढ़ जाएगी। FIR दर्ज होने से जांच की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू होगी और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी।
हर साल करीब 60 हजार मामलों पर पड़ेगा असर
मध्य प्रदेश में हर वर्ष लगभग 60 हजार गुमशुदगी के मामले दर्ज होते हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ये सभी मामले सीधे FIR में बदल जाएंगे। इसका असर केवल जांच प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्य के अपराध रिकॉर्ड और पुलिस के सांख्यिकीय आंकड़ों में भी बड़ा बदलाव दिखाई देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि FIR दर्ज होने से मामलों की बेहतर निगरानी होगी और गुम लोगों की तलाश में तेजी आ सकती है। इससे लंबित मामलों की समीक्षा और जांच की पारदर्शिता भी बढ़ने की संभावना है।
महिला सुरक्षा शाखा ने बनाई विशेष कार्ययोजना
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन के लिए पुलिस मुख्यालय की महिला सुरक्षा शाखा ने विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। अधिकारियों के अनुसार इस व्यवस्था को लागू करने से पहले अन्य राज्यों की पुलिस प्रणाली का अध्ययन किया गया। विभिन्न राज्यों के अनुभवों और प्रक्रियाओं का विश्लेषण करने के बाद मध्य प्रदेश के लिए यह मॉडल तैयार किया गया है। पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों और पुलिस इकाइयों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नई व्यवस्था का प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही चार सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट भी सुप्रीम कोर्ट को भेजी जाएगी। शुरुआत में केवल BNS की धारा 140(3) के तहत गुमशुदगी की FIR दर्ज की जाएगी। यदि जांच के दौरान ऐसे सबूत मिलते हैं जिनसे अपहरण, मानव तस्करी या किसी अन्य गंभीर अपराध की पुष्टि होती है, तभी संबंधित धाराएं जोड़ी जाएंगी। यानी हर गुमशुदगी को शुरुआत से अपराध मानकर अतिरिक्त धाराएं नहीं लगाई जाएंगी।