MP monsoon arrival date 2026 : मध्य प्रदेश के लोग इस
बात को अच्छी तरह जानते हैं जब आसमान में काले बादल घिरने लगें, हवा का रुख बदले और बिजली कड़कने लगे, तो मानसून ज्यादा दूर नहीं होता। और इस बार वो घड़ी सच में करीब आ चुकी है। दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 अब मध्य प्रदेश की सीमा से ठीक बाहर खड़ा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताजा विश्लेषण के मुताबिक, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों दिशाओं से नमी की भरपूर आपूर्ति जारी है। इसके चलते मध्य भारत में मौसम का मिजाज तेजी से करवट ले रहा है। पिछले 24 घंटों में जबलपुर, सिवनी और छतरपुर समेत महाकौशल के कई जिलों में जोरदार प्री-मानसूनी बारिश हुई। आसमान से बिजली गिरी, आंधी चली और लोगों को तपती गर्मी से थोड़ी राहत मिली। यह सब संयोग नहीं है — यह मानसून के आने की पूर्व सूचना है।
72 घंटे अहम: IMD का स्पष्ट अलर्ट
IMD ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अगले 72 घंटे मौसम की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। प्रदेश के पूर्वी, दक्षिणी और मध्य हिस्सों में तेज गर्जना, आकाशीय बिजली और 30 से 60 किमी प्रति घंटा तक की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। वरिष्ठ पर्यावरण एवं
मौसम विश्लेषक शैलेंद्र नायक के अनुसार, यदि मौजूदा मौसमी परिस्थितियां अनुकूल बनी रहीं, तो जून के दूसरे पखवाड़े यानी 15 से 18 जून के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून मध्य प्रदेश में दस्तक दे सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार मानसून के इंदौर और जबलपुर संभाग के रास्ते प्रवेश करने की प्रबल संभावना है। IMD ने 31 जिलों के लिए विशेष अलर्ट जारी किया है। इनमें नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, छिंदवाड़ा, जबलपुर, सिवनी, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, शहडोल और बालाघाट प्रमुख हैं। इन जिलों में तेज आंधी के साथ भारी बारिश के आसार हैं।
पूर्वी मध्यप्रदेश में बारिश के आंकड़े बोलते हैं
पिछले 24 घंटों में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बताते हैं कि पूर्वी मध्यप्रदेश में मानसून की पूर्व-सक्रियता कितनी तेज है। भिंड, बालाघाट, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला, दमोह, पन्ना, कटनी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, सतना, सीधी और डिंडोरी इन सभी जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश रिकॉर्ड हुई। डिंडोरी के बाजाग में 15 मिमी, बालाघाट में 12.4 मिमी और डिंडोरी में 9.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई। सतना और छिंदवाड़ा के कई इलाकों में भी अच्छी बारिश हुई। हवाओं की रफ्तार भी प्रभावशाली रही। सागर में 54 किमी प्रति घंटा, शहडोल में 43 किमी प्रति घंटा, जबलपुर में 41 किमी प्रति घंटा, रीवा में 37 किमी प्रति घंटा और सीधी में 35 किमी प्रति घंटा की अधिकतम हवा दर्ज की गई। बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी अब धीरे-धीरे पूर्वी मध्यप्रदेश पर अपना रंग दिखाने लगी है।
एक साथ सक्रिय हैं कई मौसम प्रणालियां
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र नायक ने बताया कि इस समय मध्य भारत के ऊपर एक साथ कई मौसम तंत्र काम कर रहे हैं और यही संयोजन बारिश को इतना व्यापक और तीव्र बना रहा है। समुद्र तल पर एक मौसमी द्रोणिका (trough) पंजाब से बिहार होते हुए गंगीय पश्चिम बंगाल तक फैली हुई है। इसके साथ ही पूर्वी और उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर एक ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण (cyclonic circulation) बना हुआ है। IMD के अनुसार, एक और सक्रिय ट्रफ रेखा पूर्वी उत्तर प्रदेश से विदर्भ तक, छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश के ऊपर से गुजर रही है।
2026 का मानसून: सामान्य से थोड़ा कम, लेकिन समय पर
IMD ने इस साल मध्य प्रदेश में दीर्घकालिक औसत (LPA) का लगभग 90 से 95 प्रतिशत वर्षा होने का अनुमान जताया है। LPA, जो 1971 से 2020 के आंकड़ों पर आधारित है, करीब 870 मिलीमीटर के आसपास है। यानी इस बार बारिश थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन एकदम सूखा नहीं पड़ेगा। IMD के एक वैज्ञानिक ने बताया कि हाल के वर्षों में केवल 2016 और 2019 में ही प्रदेश में सामान्य से कम बारिश हुई थी। इसके विपरीत, पिछले तीन सालों 2022, 2023 और 2025 में वर्षा सामान्य से 6 से 8 प्रतिशत अधिक रही। 2025 में तो पश्चिम मध्यप्रदेश में 1,095.6 मिमी और पूर्व मध्यप्रदेश में 1,219.4 मिमी वर्षा दर्ज हुई दोनों सामान्य से काफी अधिक। इस साल प्री-मानसून बारिश भी उत्साहजनक रही है। 14 जिलों में अब तक जून के कोटे से 672 प्रतिशत तक अधिक वर्षा हो चुकी है। यह आंकड़ा बताता है कि मानसून का स्वागत मध्यप्रदेश पहले से कर चुका है।
खजुराहो में अभी भी गर्मी, पर राहत करीब है
उत्तर और मध्य मध्यप्रदेश के कुछ हिस्सों में तापमान अभी भी 40 डिग्री सेल्सियस के पार है। खजुराहो सबसे गर्म स्थानों में बना हुआ है। लेकिन यह गर्मी ज्यादा दिन नहीं टिकेगी। मानसून के आते ही तापमान में तेजी से गिरावट आएगी और पूरे प्रदेश को लंबे समय से प्रतीक्षित राहत मिलेगी।