MP News: 54 विभागों के संविदा कर्मचारियों को जल्द मिलेगा बड़ा तोहफा,जानें पूरी डिटेल
MP Samvida Karmchari News : मध्यप्रदेश के सरकारी दफ्तरों में रोज मेहनत करने वाले संविदा कर्मचारियों के लिए एक अच्छी खबर आई है। लंबे समय से जिस मांग को लेकर ये कर्मचारी परेशान थे, अब उस पर सरकार हरकत में आती दिख रही है।बात हो रही है ग्रेच्युटी और अनुकंपा नियुक्ति की, जो संविदा नीति-2023 में तो शामिल कर दी गई थी, लेकिन अमल में लाने में सरकार को तीन साल लग गए।
किन कर्मचारियों को मिलेगा फायदा
प्रदेश के 54 विभागों में काम करने वाले करीब 2.50 लाख संविदा कर्मचारियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। इनमें सबसे बड़ी संख्या पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की है, जहां अकेले करीब 50 हजार संविदा कर्मचारी तैनात हैं। सरकार अब हर विभाग को अलग-अलग आदेश जारी करने जा रही है, ताकि योजना का लाभ जमीन पर उतर सके।
क्या है नीति में प्रावधान
संविदा नीति-2023 के मुताबिक, रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी को 16 महीने की ग्रेच्युटी दी जाएगी। यह राशि उनकी बरसों की सेवा के बदले एक बड़ा सहारा साबित होगी।
इसके अलावा अगर किसी कर्मचारी की सेवाकाल के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार के किसी पात्र सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति देने का भी नियम बनाया गया है। यानी परिवार को नौकरी का सहारा मिलेगा, ताकि अचानक आई मुसीबत में घर चलाना आसान हो।
तीन साल से क्यों अटका था मामला
नीति बनने के बावजूद अलग-अलग विभागों ने अपने स्तर पर आदेश जारी नहीं किए, जिस वजह से हजारों कर्मचारी इस सुविधा से वंचित रह गए। कई बार तो कर्मचारी इसे लेकर सड़कों पर उतर चुके हैं और आंदोलन भी कर चुके हैं।
नतीजा यह हुआ कि इन तीन सालों में कई कर्मचारी बिना ग्रेच्युटी के ही नौकरी पूरी कर चुके हैं। वहीं जिनकी सेवा के दौरान मौत हो गई, उनके परिवार वाले आज भी अनुकंपा नियुक्ति की राह देख रहे हैं।
कर्मचारी नेताओं ने क्या कहा
मध्यप्रदेश संविदा अधिकारी-कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष रमेश राठौर ने साफ कहा कि यह देरी सरकारी लापरवाही का नतीजा है। उनका कहना है कि साल 2023 से ही यह लाभ मिलना शुरू हो जाना चाहिए था।
राठौर ने यह भी मांग रखी कि जिन विभागों के अफसरों ने अब तक आदेश जारी नहीं किए, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि कर्मचारी आखिर कब तक इंतजार करते रहेंगे।
इसी तरह मध्यप्रदेश संविदा कर्मचारी संघ के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह भदौरिया ने भी सरकार पर सवाल उठाए। उनके मुताबिक तीन साल पहले बनी नीति को अब तक लागू न करना कर्मचारियों के हक से सीधा खिलवाड़ है।
