MP नर्सिंग कॉलेज घोटाला: 189 कॉलेज परीक्षा के लिए योग्य घोषित, हजारों छात्रों को बड़ी राहत, जानिए हाईकोर्ट के पूरे आदेश की डिटेल
MP Nursing College Scam: मध्यप्रदेश के नर्सिंग छात्रों के लिए लंबे इंतजार के बाद राहत की खबर आई है। जबलपुर हाईकोर्ट ने 189 उपयुक्त पाए गए नर्सिंग कॉलेजों के विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल होने और पहले हो चुकी परीक्षाओं के परिणाम जारी करने की अनुमति दी है। हालांकि, डुप्लीकेट फैकल्टी वाले कॉलेजों के लिए कोर्ट ने जुर्माने और दूसरी शर्तें भी तय की हैं।
189 नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों को राहत मिली
मध्यप्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता और संचालन से जुड़ी अनियमितताओं के मामले की सुनवाई जबलपुर हाईकोर्ट में चल रही है। इसी मामले में जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीजन बेंच ने छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए अहम निर्देश दिए हैं।
अदालत के आदेश के बाद उपयुक्त श्रेणी में आने वाले कॉलेजों के विद्यार्थियों के लिए परीक्षा और रिजल्ट का रास्ता साफ हुआ है। खास तौर पर BSc Nursing, MSc Nursing और Post Basic BSc Nursing के विद्यार्थियों को इससे राहत मिलेगी। यानी कॉलेज से जुड़ी जांच और कानूनी कार्रवाई का असर सीधे छात्रों की पढ़ाई और परीक्षा पर न पड़े, इसे ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने अलग व्यवस्था बनाई है।
डुप्लीकेट फैकल्टी मिली तो देना होगा 3 लाख रुपये
इस मामले में हाईकोर्ट ने कॉलेज प्रबंधन को भी साफ संदेश दिया है। जिन कॉलेजों में डुप्लीकेट टीचिंग फैकल्टी पाई गई है, वहां प्रत्येक डुप्लीकेट फैकल्टी के लिए 3 लाख रुपये का जुर्माना जमा करना होगा।
रिपोर्टों के मुताबिक, जुर्माने की राशि में से 2 लाख रुपये मध्यप्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल और 1 लाख रुपये Juvenile Justice Fund में जमा किए जाने हैं। संबंधित कॉलेजों को तय अवधि में भुगतान करने के बाद ही परीक्षा और रिजल्ट की प्रक्रिया में आगे बढ़ने की पात्रता मिलेगी। यहां डुप्लीकेट फैकल्टी का मतलब ऐसी स्थिति से है, जिसमें एक ही शिक्षक का नाम एक से अधिक संस्थानों की फैकल्टी के रूप में सामने आता है।
50 पौधे लगाने की भी शर्त
हाईकोर्ट ने इस मामले में सिर्फ शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी शर्तें ही नहीं रखीं। संबंधित कॉलेजों को अपने परिसर या आसपास 50 पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का निर्देश भी दिया गया है।
पौधों की देखभाल तब तक करनी होगी, जब तक वे पेड़ के रूप में विकसित न हो जाएं। इसके अलावा पौधारोपण की तस्वीरें निसर्ग ऐप पर अपलोड करना भी जरूरी किया गया है। इस शर्त का उद्देश्य कॉलेजों को केवल जुर्माना भरने तक सीमित न रखते हुए एक अतिरिक्त सार्वजनिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी से जोड़ना है।
CBI जांच में सामने आई थी फैकल्टी डुप्लीकेसी
नर्सिंग कॉलेजों की जांच के दौरान फैकल्टी से जुड़ी गड़बड़ियां भी सामने आई थीं। रिपोर्टों के अनुसार CBI की जांच में 119 ऐसे कॉलेजों में डुप्लीकेट फैकल्टी मिली, जिन्हें पहले उपयुक्त श्रेणी में रखा गया था। इसके अलावा 153 कमियां पाए गए कॉलेजों में भी फैकल्टी डुप्लीकेसी की बात सामने आई। यही वजह है कि हाईकोर्ट ने छात्रों को राहत देने के साथ कॉलेजों की जिम्मेदारी भी तय की है।
35 कॉलेजों के छात्रों को भी मिली विशेष राहत
रिपोर्टों के मुताबिक 35 ऐसे उपयुक्त कॉलेज भी सामने आए, जिनमें डुप्लीकेट फैकल्टी नहीं मिली। इन कॉलेजों को परीक्षा आयोजित करने और पहले परीक्षा दे चुके विद्यार्थियों के परिणाम जारी करने की अनुमति दी गई है।
इससे साफ है कि कोर्ट ने विद्यार्थियों और संस्थानों की स्थिति को एक जैसा नहीं माना है। जहां छात्रों का शैक्षणिक नुकसान रोकने की कोशिश की गई है, वहीं गड़बड़ी वाले कॉलेजों पर आर्थिक और अनुपालन संबंधी जिम्मेदारी डाली गई है।
नए नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता पर भी हाईकोर्ट सख्त
हाईकोर्ट ने मध्यप्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल को नए कॉलेजों को मान्यता देते समय ज्यादा सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। निरीक्षण और मानकों के पालन में लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय किए जाने की बात कही गई है।
