वर्दी में Reel से ChatGPT तक, पुलिसकर्मियों के लिए 24 नए सोशल मीडिया नियम
Mp Big News,MP Police Guidelines 2026 : मध्य प्रदेश में वर्दीधारी पुलिसकर्मियों की सोशल मीडिया एक्टिविटी अब सीधे पुलिस मुख्यालय की निगरानी में आ गई है। डीजीपी कैलाश मकवाना के निर्देश पर एक विस्तृत गाइडलाइन जारी हुई है, जिसमें कुल 24 बिंदु शामिल हैं। यह गाइडलाइन फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, व्हाट्सएप और यूट्यूब समेत हर बड़े प्लेटफॉर्म पर लागू होगी।
सबसे ज्यादा चर्चा उस नियम की हो रही है जिसमें वर्दी पहनकर रील बनाने पर रोक लगाई गई है। पिछले कुछ समय से पुलिसकर्मियों के रील और शॉर्ट वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए हैं, और इसी वजह से महकमे ने अब सख्ती बरतने का फैसला किया है।
सरकार और अफसरों की आलोचना अब भारी पड़ेगी
गाइडलाइन के मुताबिक कोई भी पुलिसकर्मी सरकारी या निजी सोशल मीडिया अकाउंट से सरकार की नीतियों, फैसलों या योजनाओं पर टिप्पणी नहीं कर सकेगा। इसी तरह वरिष्ठ अधिकारियों या सहकर्मियों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल भी नियमों के दायरे में आएगा। मकसद साफ है, विभाग की छवि और अनुशासन को ऑनलाइन दुनिया में भी बनाए रखना।
चैटजीपीटी, जेमिनी जैसे AI टूल्स पर सीधा प्रतिबंध
गाइडलाइन में सबसे नया और अहम पहलू आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ा है। पुलिसकर्मी अब चैटजीपीटी, जेमिनी जैसे किसी भी AI प्लेटफॉर्म पर विभाग की संवेदनशील जानकारी अपलोड नहीं कर पाएंगे। स्कैन किए गए दस्तावेज, स्क्रीनशॉट या किसी भी तरह की सॉफ्ट कॉपी सोशल मीडिया पर शेयर करना भी अब नियमों के उल्लंघन में गिना जाएगा। जो भी इसका उल्लंघन करेगा, उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई तय है।
यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि हाल के वर्षों में सरकारी महकमों में डेटा लीक और गोपनीय जानकारी के गलत हाथों में पहुंचने की घटनाएं बढ़ी हैं। AI टूल्स पर डेटा अपलोड होने के बाद उस पर नियंत्रण खत्म हो जाता है, यही वजह है कि पुलिस मुख्यालय ने इसे प्राथमिकता के साथ शामिल किया।
निजी प्रचार और लोकेशन शेयरिंग पर भी शिकंजा
नई गाइडलाइन में यह भी साफ किया गया है कि पुलिस बल की उपलब्धियों को टीम वर्क के तौर पर पेश किया जाना चाहिए, न कि किसी एक अधिकारी की व्यक्तिगत छवि चमकाने के लिए। बिना अनुमति निजी प्रचार करना और राजनीतिक प्रतीकों, पोस्टरों या चिन्हों का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
संवेदनशील ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के लिए नियम और सख्त हैं। ऐसे कर्मचारी अपनी लोकेशन सार्वजनिक नहीं कर सकेंगे और जियो-टैगिंग का इस्तेमाल भी वर्जित रहेगा। सरकारी सोशल मीडिया हैंडल का निजी फायदे के लिए इस्तेमाल करने पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।
नियम तोड़ने पर क्या होगा असर
पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि यह गाइडलाइन सुझाव नहीं बल्कि सख्त निर्देश है। उल्लंघन की स्थिति में संबंधित पुलिसकर्मी पर विभागीय जांच बैठाई जा सकती है, जिसका असर सीधे उसकी सेवा पुस्तिका पर पड़ेगा। जानकारों का मानना है कि डिजिटल दौर में पुलिस की साख बनाए रखने के लिए ऐसे नियम जरूरी हो गए हैं, खासकर तब जब हर छोटी घटना कुछ ही मिनटों में सोशल मीडिया पर वायरल हो जाती है।
