MP PWD engineer corruption case : मध्य प्रदेश के
पीडब्ल्यूडी (PWD) विभाग में लंबे समय तक तैनात रहे एक पूर्व इंजीनियर गोविंद प्रसाद मेहरा पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामले में मेहरा और उनके परिवार की करीब 67 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्ति को जब्त कर लिया है। यह मामला तब सामने आया जब जांच एजेंसियों को मेहरा द्वारा अपनी आधिकारिक सेवा के दौरान पद का दुरुपयोग कर अवैध रूप से धन अर्जित करने के पक्के सबूत मिले। ईडी ने यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की है, जो सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
सालों की कमाई और भ्रष्टाचार का जाल
गोविंद प्रसाद मेहरा ने 1985 से 2024 के बीच लोक निर्माण विभाग में अपनी सेवाएं दीं। इतने लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने विभाग में रहते हुए अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं ज्यादा संपत्ति बनाई। आधिकारिक दस्तावेजों और एफआईआर के अनुसार, मेहरा ने अपने कार्यकाल में करोड़ों की बेहिसाब संपत्ति जुटाई। जांच में पाया गया कि मेहरा के पास उनकी वैध आय के मुकाबले कहीं अधिक संपत्ति थी। आंकड़ों की बात करें तो करीब 6 करोड़ रुपये की ऐसी संपत्ति सामने आई है, जिसका कोई ठोस हिसाब-किताब या रिकॉर्ड पूर्व इंजीनियर के पास नहीं था। जब जांच एजेंसियों ने मेहरा के ठिकानों पर छापेमारी की, तो वहां से कई चौंकाने वाली चीजें मिलीं। तलाशी के दौरान अधिकारियों को 8.79 लाख रुपये नकद मिले। इसके अलावा, करीब 3.51 करोड़ रुपये मूल्य के सोने और चांदी के आभूषण भी बरामद किए गए। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि मेहरा इन कीमती सामानों और नगदी के स्रोत का कोई वैध दस्तावेज या प्रमाण पेश नहीं कर सके।
72 एकड़ में फैला आलीशान 'कस्तूरी फार्म हाउस'
इस पूरे मामले का सबसे चर्चित हिस्सा नर्मदापुरम जिले की सोहागपुर तहसील के सैनी गांव में स्थित 'कस्तूरी फार्म हाउस' है। जांच में खुलासा हुआ कि मेहरा और उनके परिवार ने इस जगह को एक साधारण फार्म हाउस से बदलकर एक आलीशान रिसॉर्ट का रूप दे दिया था। यह पूरा परिसर 72 एकड़ जैसी विशाल भूमि में फैला हुआ है। इस फार्म हाउस के भीतर आलीशान कॉटेज, बड़ी आवासीय इमारतें, व्यवस्थित आंतरिक सड़कें और कृत्रिम जलाशय तक बनाए गए थे। एक अनुमान के मुताबिक, केवल इस संपत्ति की बाजार कीमत ही 49.44 करोड़ रुपये है। इसके अतिरिक्त, रिसॉर्ट को भव्य रूप देने के लिए इसमें किए गए निर्माण कार्यों पर लगभग 16 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की गई थी। इतने बड़े पैमाने पर बनाई गई यह संपत्ति अब जांच एजेंसी के कब्जे में है।
कानूनी शिकंजा
पूर्व इंजीनियर के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(b) और 13(2) के तहत एक गंभीर मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा, मनी लॉन्ड्रिंग की चल रही जाँच के तहत PMLA की धारा 66(2) के तहत एक शिकायत भी दर्ज की गई है।