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एमपी के संविदा कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी, नियमितीकरण को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा ऐलान


MP Samvida Karmachari Sammelan 2026 : भोपाल के दशहरा मैदान में शुक्रवार की दोपहर एक अलग ही उत्साह देखने को मिला। मौका था प्रदेश स्तरीय संविदा कर्मचारी-अधिकारी सम्मेलन का, जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। इस बड़े आयोजन में प्रदेश के 34 अलग-अलग विभागों के हजारों संविदा कर्मचारी अपनी मांगों और उम्मीदों के साथ जुटे थे। मुख्यमंत्री ने न केवल उनकी बातों को ध्यान से सुना, बल्कि उनके काम की तुलना रामायण के उस पात्र से कर दी जो अटूट सेवा और शक्ति का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि मध्य प्रदेश को आगे ले जाने में इन कर्मचारियों का उतना ही बड़ा हाथ है जितना सरकार का।

हनुमान की तरह सरकार के संकटमोचक हैं संविदा कर्मचारी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए भावुक और प्रभावशाली बात कही। उन्होंने संविदा कर्मचारियों की तुलना भगवान हनुमान से की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम को अपने हर बड़े कार्य को सिद्ध करने के लिए हनुमान जी की जरूरत पड़ी थी, ठीक उसी तरह मध्य प्रदेश सरकार को प्रदेश के विकास के लिए अपने संविदा कर्मचारियों की जरूरत है। उन्होंने माना कि ये कर्मचारी केवल दफ्तर के कर्मचारी नहीं हैं, बल्कि वे लोग हैं जो पूरे मन से सरकारी योजनाओं को जमीन पर उतारते हैं। मुख्यमंत्री के इस बयान ने मैदान में मौजूद हजारों कर्मचारियों का दिल जीत लिया।

ई-गवर्नेंस से लेकर स्वच्छता मिशन तक में बड़ी भूमिका

सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज मध्य प्रदेश अगर ई-गवर्नेंस, सरकारी आवास योजना और स्वच्छ भारत मिशन जैसे क्षेत्रों में झंडे गाड़ रहा है, तो इसके पीछे संविदा कर्मचारियों की दिन-रात की मेहनत है। उन्होंने कहा कि चाहे शहर हो या सुदूर गांव, हर विभाग की जिम्मेदारी को उसके अंतिम लक्ष्य तक पहुंचाने में इन कर्मियों का योगदान सराहनीय है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि संविदा कर्मचारियों का यह समूह सरकार का अभिन्न अंग है और उनके बिना विकास की गति अधूरी है।

समस्याओं के समाधान के लिए बनेगी 'हाई पावर कमेटी'

सम्मेलन की सबसे बड़ी खबर संविदा कर्मचारियों की समस्याओं को सुलझाने के लिए उठाए गए कदम को लेकर रही। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि कर्मचारियों की शिकायतों और मांगों के निपटारे के लिए एक विशेष कमेटी बनाई जाएगी। इस कमेटी में वित्त विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के अधिकारियों के साथ संविदा कर्मचारियों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। https://twitter.com/CMMadhyaPradesh/status/2017169018805985609 मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि यह समूह आपस में बैठकर सभी तकनीकी और प्रशासनिक मसलों पर ठोस निर्णय लेगा। उन्होंने कर्मचारियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि अगर इस प्रक्रिया के बाद भी कोई उलझन बचती है, तो वे खुद उनके साथ खड़े हैं।

कर्मचारियों ने रखी नियमितीकरण और सुविधाओं की मांग

सम्मेलन के दौरान संविदा कर्मचारी-अधिकारी संघ ने मुख्यमंत्री के सामने अपनी समस्याओं का एक विस्तृत खाका पेश किया। उनकी सबसे प्रमुख मांग उन कर्मचारियों को नियमित पदों पर नियुक्ति देने की है जो पिछले 10 साल या उससे अधिक समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा कर्मचारियों ने मांग की है कि उन्हें महंगाई भत्ता (DA) भी नियमित कर्मचारियों की तरह ही मिले, न कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर। साथ ही, साल 2023 की संविदा नीति को पूरी तरह से लागू करने और छुट्टियों के मामले में भेदभाव खत्म करने की बात भी प्रमुखता से उठाई गई। कर्मचारियों ने काम के दौरान सुरक्षा और भविष्य के फायदों को लेकर भी अपनी आवाज बुलंद की। उन्होंने मांग रखी कि एनपीएस (NPS), ग्रेच्युटी और स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधाएं सभी योजनाओं में एक साथ लागू की जाएं। एक और महत्वपूर्ण बिंदु यह रहा कि अगर कोई सरकारी योजना बंद होती है, तो उसमें काम कर रहे कर्मचारियों को बेरोजगार करने के बजाय किसी दूसरी योजना में शिफ्ट किया जाना चाहिए। कर्मचारियों ने उन नियमों को भी हटाने की मांग की जो उनके मूल्यांकन या नवीनीकरण के नाम पर उन्हें मानसिक तनाव देते हैं। वे चाहते हैं कि उन्हें भी पदोन्नति और दूसरे विभागों में जाने के अवसर मिलें ताकि उनका करियर भी आगे बढ़ सके।