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मोहन सरकार ने पेश किया 7,765 करोड़ का अनुपूरक बजट, जानिए किस विभाग को कितना मिला

MP Supplementary Budget 2026

MP Supplementary Budget 2026 : मध्य प्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट पेश करते हुए सिंचाई, सड़क, कृषि, शिक्षा, परिवहन और पुलिस आधुनिकीकरण समेत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त राशि का प्रावधान किया है।

MP Supplementary Budget 2026: मध्य प्रदेश की राजनीति और विकास से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। डॉ. मोहन यादव सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट विधानसभा में पेश कर दिया है। इस बार सरकार ने कुल 7,765.76 करोड़ रुपये के अतिरिक्त बजट का प्रस्ताव रखा है। खास बात यह है कि इस बजट का बड़ा हिस्सा सड़क, सिंचाई, अधोसंरचना और जनकल्याण से जुड़े कामों पर खर्च करने की योजना बनाई गई है। अब सभी की नजर बुधवार को विधानसभा में होने वाली चर्चा पर है। विपक्ष इस बजट को लेकर सरकार से कई सवाल पूछ सकता है, जबकि सरकार इसे प्रदेश के विकास को नई गति देने वाला कदम बता रही है।

अनुपूरक बजट और इसकी जरूरत क्यों पड़ती है?

अनुपूरक बजट (Supplementary Budget) तब लाया जाता है, जब किसी वित्तीय वर्ष के दौरान पहले से स्वीकृत बजट पर्याप्त नहीं रह जाता या नई योजनाओं और अतिरिक्त खर्च के लिए धन की जरूरत होती है। ऐसे में सरकार विधानसभा से अतिरिक्त राशि की मंजूरी मांगती है। मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि इस बार का अनुपूरक बजट मुख्य रूप से उन परियोजनाओं को गति देने के लिए तैयार किया गया है, जिनका सीधा असर विकास और आम लोगों की सुविधाओं पर पड़ेगा।

पूंजीगत खर्च पर सरकार का सबसे बड़ा फोकस

इस अनुपूरक बजट में 907.59 करोड़ रुपये राजस्व मद और 6,858.18 करोड़ रुपये पूंजीगत मद के लिए प्रस्तावित किए गए हैं। यह आंकड़ा बताता है कि सरकार केवल नियमित खर्च बढ़ाने के बजाय लंबे समय तक फायदा देने वाली परियोजनाओं में निवेश करना चाहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि पूंजीगत व्यय बढ़ने से सड़क, सिंचाई, पुल और अन्य आधारभूत ढांचे का विस्तार होता है, जिससे रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलता है।

नर्मदा घाटी विकास विभाग को मिला सबसे बड़ा हिस्सा

इस अनुपूरक बजट में सबसे बड़ी राशि 3,000 करोड़ रुपये नर्मदा घाटी विकास विभाग के लिए रखी गई है। सरकार के अनुसार इस धनराशि का उपयोग सिंचाई परियोजनाओं को तेज करने और भूमि अधिग्रहण से जुड़े लंबित भुगतान पूरे करने में किया जाएगा। मध्य प्रदेश की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है, इसलिए सिंचाई क्षमता बढ़ाने को सरकार अपनी प्राथमिकता बता रही है। यदि परियोजनाएं तय समय पर पूरी होती हैं, तो किसानों को लंबे समय में इसका सीधा लाभ मिल सकता है।

खाद्य विभाग को भी मिला बड़ा आवंटन

खाद्य विभाग के लिए 2,220.62 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह राशि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और विभागीय आवश्यकताओं को पूरा करने में उपयोग होगी। सरकार का दावा है कि इससे राशन वितरण व्यवस्था को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी, ताकि पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंच सके।

सड़क, पुल और परिवहन परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार

प्रदेश में बेहतर कनेक्टिविटी पर भी सरकार ने खास ध्यान दिया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) को 1,300 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इस राशि का उपयोग नई सड़कों, पुलों और रेलवे ओवर ब्रिज (ROB) जैसे निर्माण कार्यों में किया जाएगा। इसी के साथ परिवहन सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना के लिए 101 करोड़ रुपये और प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है।

किसानों और विद्यार्थियों के लिए भी अहम घोषणाएं

सरकार ने कृषि क्षेत्र को भी अतिरिक्त बजट में जगह दी है। कृषि विभाग को 352.69 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसमें भावांतर एवं फ्लैट रेट योजना के लिए 313.18 करोड़ रुपये और कपास प्रोत्साहन योजना के लिए 39.51 करोड़ रुपये शामिल हैं।शिक्षा के क्षेत्र में मेधावी विद्यार्थियों के लैपटॉप वितरण के लिए 58.07 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं पीएम-उषा योजना के तहत उच्च शिक्षा के विकास के लिए 50 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं।

पुलिस आधुनिकीकरण और प्रशासनिक सुधारों पर भी खर्च

कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए भी अतिरिक्त बजट दिया गया है। इंटर ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) के लिए 98.83 करोड़ रुपये और पुलिस आधुनिकीकरण के लिए 58.52 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा पर्यटन विभाग को 30 करोड़ रुपये, लोक सेवा प्रबंधन विभाग को 25 करोड़ रुपये, जल संसाधन विभाग को 10 करोड़ रुपये और घुमंतू-अर्धघुमंतू कल्याण विभाग को 6.02 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

विधानसभा में आज होगी महत्वपूर्ण चर्चा

बुधवार को मध्य प्रदेश विधानसभा में इस अनुपूरक बजट पर विस्तृत चर्चा होगी। सत्ता पक्ष इसे विकास को गति देने वाला बजट बता रहा है, जबकि विपक्ष विभिन्न विभागों में किए गए आवंटन और खर्च की प्राथमिकताओं पर सवाल उठा सकता है। चर्चा के दौरान यह भी स्पष्ट होगा कि विभिन्न योजनाओं के लिए प्रस्तावित राशि का उपयोग किस समयसीमा में किया जाएगा और किन परियोजनाओं को पहले पूरा करने की योजना है।