MP Teacher Recruitment: DPI में प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों ने बंद रखा काम, नियुक्ति पत्र की मांग पर अड़े अभ्यर्थी
MP Teacher Recruitment : भोपाल में प्राथमिक शिक्षक भर्ती का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। लोक शिक्षण संचालनालय यानी DPI में नियुक्ति की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों के आयुक्त कक्ष तक पहुंचने और नारेबाजी करने के बाद शिक्षा विभाग के कर्मचारियों ने शुक्रवार को दो घंटे पेन डाउन रखा। कर्मचारियों ने घटना का विरोध करते हुए कार्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग उठाई।
मामला सिर्फ प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा। घटना के बाद आयुक्त अभिषेक सिंह के कक्ष के बाहर सुरक्षा बढ़ाई गई। इसी बीच सुरक्षा में तैनात युवकों को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई। आयुक्त की ओर से उन्हें सिक्योरिटी एजेंसी के कर्मचारी बताया गया, जबकि मौके पर मौजूद लोगों और मीडिया रिपोर्टों में उन्हें बाउंसर के तौर पर बताया गया।
यह पूरा विवाद प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 में सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति से जुड़ी मांगों के बीच सामने आया है। अभ्यर्थी पद बढ़ाने और नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
मामला गुरुवार को उस समय बढ़ा जब प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 के अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर लोक शिक्षण संचालनालय पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान कुछ अभ्यर्थी आयुक्त अभिषेक सिंह के कक्ष तक पहुंच गए और वहां नारेबाजी की।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस दौरान कार्यालय कर्मचारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच बहस और धक्का-मुक्की जैसी स्थिति भी बनी। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला।
अभ्यर्थियों का कहना है कि वे अपनी नियुक्ति को लेकर लंबे समय से अधिकारियों के सामने मांग रख रहे हैं। उनका मुख्य जोर उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाने और पदों की संख्या बढ़ाने पर है।
दूसरी तरफ, कर्मचारी संगठनों का कहना है कि किसी भी अभ्यर्थी को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन सरकारी कार्यालय में जबरन प्रवेश करना या कर्मचारियों के साथ विवाद की स्थिति बनाना उचित नहीं है।
डीपीआई में हुए घटनाक्रम के विरोध में कर्मचारी संगठनों ने शुक्रवार को पेन डाउन आंदोलन किया। रिपोर्टों के अनुसार कर्मचारियों ने करीब दो घंटे तक काम नहीं किया और प्रदर्शनकारियों के व्यवहार का विरोध किया।
कर्मचारी संगठनों ने कार्यालय में काम करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि सरकारी दफ्तर में आने वाले हर व्यक्ति की शिकायत और मांग सुनी जानी चाहिए, लेकिन इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया और शांतिपूर्ण तरीका अपनाना जरूरी है।
इस घटनाक्रम ने एक तरफ अभ्यर्थियों की नियुक्ति का सवाल खड़ा किया है, तो दूसरी तरफ सरकारी कार्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था और प्रदर्शन के तरीके पर भी बहस छेड़ दी है।
घटना के बाद लोक शिक्षण आयुक्त के कक्ष की सुरक्षा बढ़ाई गई। मीडिया रिपोर्टों में कक्ष के बाहर चार युवकों की तैनाती का जिक्र है।
इन युवकों की वर्दी को लेकर भी सवाल उठे। आयुक्त अभिषेक सिंह ने मीडिया के सवालों के जवाब में कहा कि ये सिक्योरिटी एजेंसी के कर्मचारी हैं, बाउंसर नहीं। बाद में मौके पर पुलिस की मौजूदगी भी देखी गई। इस पूरे घटनाक्रम ने DPI की सुरक्षा व्यवस्था को चर्चा में ला दिया।
यहां यह साफ करना जरूरी है कि सुरक्षा कर्मियों की भूमिका को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग शब्दों का इस्तेमाल हुआ है। इसलिए इसे किसी आधिकारिक रूप से घोषित ‘बाउंसर तैनाती’ के तौर पर पेश करना उचित नहीं होगा।
प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 के अभ्यर्थियों की मुख्य मांग नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ी है। प्रदर्शनकारी पदों की संख्या बढ़ाने और पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी करने की मांग कर रहे हैं।
उनका दावा है कि स्कूल शिक्षा और संबंधित विभागों में शिक्षकों के पदों की जरूरत बनी हुई है। ऐसे में परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर मिलना चाहिए।
हालांकि भर्ती प्रक्रिया को समझने के लिए आधिकारिक नियमों पर नजर डालना भी जरूरी है। मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल की प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 की नियम पुस्तिका के अनुसार प्राथमिक शिक्षक के पद जिला संवर्ग के हैं। मेरिट, अभ्यर्थी की प्राथमिकता, दस्तावेज सत्यापन और विज्ञापित रिक्तियों के आधार पर जिला स्तरीय चयन सूची तैयार की जाती है।
इसका मतलब यह है कि सिर्फ परीक्षा में सफल होना अपने आप नियुक्ति की अंतिम गारंटी नहीं माना जा सकता। दस्तावेज सत्यापन और संबंधित नियमों के तहत पात्रता भी महत्वपूर्ण है।
