- मध्य प्रदेश में अब तक 4.88 लाख किसानों से 19.90 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया।
- किसानों को 2585 रुपये MSP और 40 रुपये बोनस मिलाकर कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहे हैं।
- स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 9 मई 2026 है और अब शनिवार को भी खरीदी जारी रहेगी।
- गुणवत्ता नियमों में ढील: 50% तक चमकविहीन और 10% तक सुकड़े दाने वाला गेहूं स्वीकार्य।
- इस साल 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जन का लक्ष्य, 19 लाख से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन।
MP Gehu Kharidi 2026 : मध्य प्रदेश में
इस समय गेहूं की सरकारी खरीदी का काम पूरे जोर-शोर से चल रहा है। राज्य सरकार ने इस साल किसानों से भारी मात्रा में गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है और अब तक के आंकड़े काफी सकारात्मक नजर आ रहे हैं। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में अब तक 4 लाख 88 हजार से ज्यादा किसानों ने अपना गेहूं सरकारी केंद्रों पर बेच दिया है। सरकार की ओर से किसानों को अब तक 2548 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान भी सीधे उनके खातों में कर दिया गया है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि किसानों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए इस बार कई नियमों में ढील दी गई है ताकि किसी भी किसान को अपनी उपज बेचने में परेशानी न हो।
स्लॉट बुकिंग की तारीख बढ़ी और शनिवार को भी होगी खरीदी
जो किसान अभी तक अपना गेहूं नहीं बेच पाए हैं, उनके लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। सरकार ने स्लॉट बुकिंग की अंतिम तारीख 9 मई 2026 तय की है। इसका मतलब है कि जिन किसानों ने अभी तक अपनी फसल बेचने के लिए समय और केंद्र का चुनाव नहीं किया है, वे जल्द से जल्द इस प्रक्रिया को पूरा कर लें। इसके साथ ही एक बड़ा बदलाव यह किया गया है कि अब हर शनिवार को भी स्लॉट बुकिंग और गेहूं की खरीदी का काम जारी रहेगा। पहले शनिवार को यह प्रक्रिया बंद रहती थी, लेकिन किसानों की भीड़ और जरूरत को देखते हुए प्रशासन ने अब पूरे हफ्ते खरीदी जारी रखने का फैसला लिया है।
बोनस के साथ मिल रहा है शानदार दाम
इस साल मध्य प्रदेश के किसानों के लिए गेहूं का भाव काफी फायदेमंद साबित हो रहा है। केंद्र सरकार द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2585 रुपये प्रति क्विंटल है, लेकिन राज्य सरकार इसमें 40 रुपये प्रति क्विंटल की अतिरिक्त बोनस राशि भी जोड़ रही है। इस तरह किसानों को कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान मिल रहा है। यह कीमत पिछले वर्षों की तुलना में काफी बेहतर है, यही वजह है कि इस बार रिकॉर्ड संख्या में किसानों ने पंजीकरण कराया है। आंकड़ों के मुताबिक, इस साल करीब 19.04 लाख किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले साल के मुकाबले 3.60 लाख ज्यादा है।
नियमों में ढील से किसानों को मिली बड़ी राहत
सरकार ने इस बार गेहूं की गुणवत्ता से जुड़े मापदंडों यानी FAQ (Fair Average Quality) नियमों में काफी रियायत दी है। अक्सर किसान इस बात से परेशान रहते थे कि मामूली खराबी की वजह से उनका गेहूं रिजेक्ट हो जाता था। अब चमकविहीन गेहूं की सीमा को बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक कर दिया गया है। https://twitter.com/JansamparkMP/status/2049171572926398509 इसके अलावा, अगर गेहूं का दाना थोड़ा सुकड़ा हुआ है, तो उसकी सीमा भी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दी गई है। क्षतिग्रस्त दानों की सीमा में भी बढ़ोतरी की गई है। इन बदलावों का सीधा फायदा उन किसानों को मिलेगा जिनकी फसल मौसम की मार के कारण थोड़ी प्रभावित हुई थी।
केंद्रों पर बढ़ी सुविधाएं और स्टोरेज के पुख्ता इंतजाम
किसानों को लंबी कतारों से बचाने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं। अब किसान अपनी तहसील के बजाय अपने जिले के किसी भी उपार्जन केंद्र पर जाकर अपना गेहूं बेच सकते हैं। केंद्रों पर तौल कांटों की संख्या को 4 से बढ़ाकर 6 कर दिया गया है ताकि तौल की प्रक्रिया जल्दी पूरी हो सके। साथ ही हर केंद्र पर प्रतिदिन गेहूं की आवक क्षमता को 1000 क्विंटल से बढ़ाकर 2250 क्विंटल कर दिया गया है। खरीदे गए गेहूं को सुरक्षित रखने के लिए जूट और प्लास्टिक (PP/HDP) बैग्स का इस्तेमाल किया जा रहा है और भंडारण के लिए पर्याप्त गोदामों की व्यवस्था पहले ही कर ली गई है। सरकार का लक्ष्य इस बार 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 77 लाख मीट्रिक टन था।