नरसिंहपुर टूटा हुआ एक "A" अक्षर, और खुल गई सुनियोजित 5 हत्या की पूरी कहानी
Narsinghpur news today : सड़क हादसा... बस इतना ही समझा जा रहा था शुरुआत में। हाईवा की टक्कर से पांच लोगों की मौत, एक घायल। मामला वहीं खत्म हो सकता था। लेकिन नरसिंहपुर पुलिस ने जब घटनास्थल को बारीकी से खंगाला, तो एक टूटा हुआ प्लास्टिक का टुकड़ा सामने आया। बस अंग्रेजी का अक्षर "A" जैसा दिखने वाला एक मोनोग्राम। यही एक टुकड़ा पूरे मामले की दिशा बदलने वाला था।
घटना की शुरुआत कैसे हुई
19 जुलाई 2026 को सुआतला थाना क्षेत्र के इंद्रानगर के पास नेशनल हाईवे पर एक तेज रफ्तार हाईवा ने सड़क किनारे खड़े छह-सात लोगों को कुचल दिया। राजेन्द्र पटैल की मौके पर ही मौत हो गई। चार और लोगों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, एक अभी भी अस्पताल में जिंदगी से जूझ रहा है। पहली नजर में यह हादसा ही लग रहा था। पर पुलिस अफसरों को कुछ खटक रहा था।
एसपी खुद पहुंचे मौके पर
मामले की गंभीरता देखकर पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना और एएसपी संदीप भूरिया उसी रात घटनास्थल पहुंच गए। करीब चार-पांच घंटे तक टीम वहीं डटी रही। आसपास के लोगों से बात हुई, सबूत जुटाए गए। यही मेहनत आगे चलकर रंग लाई।
वो छोटा-सा सुराग जिसने सब बदल दिया
बारीक जांच में सड़क पर एक टूटा हुआ मोनोग्राम मिला, अंग्रेजी का "A" अक्षर जैसा। पुलिस को शक हुआ कि गाड़ी शायद टाटा कंपनी की हो सकती है। इसी छोटे से सुराग ने वाहन की पहचान की दिशा तय कर दी।
इसके बाद टीमों ने शाहपुरा, जबलपुर से लेकर घटनास्थल तक, हाईवे के हर चौराहे के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। घंटों की मशक्कत के बाद, तकनीकी सबूतों की मदद से हीरापुर-बंदरोहा के जंगलों में वो हाईवा डम्पर आखिरकार मिल गया, जो घटना में इस्तेमाल हुआ था।
पूछताछ में खुला हत्या का राज
सीसीटीवी, तकनीकी सबूत और मुखबिरों की जानकारी के आधार पर पुलिस को राजा पटैल पर शक हुआ। घटनास्थल के पास उसकी मौजूदगी और उसका बर्ताव संदिग्ध लग रहा था। हिरासत में लेकर पूछताछ हुई, और यहीं से पूरी साजिश की परतें खुलनी शुरू हुईं।

पता चला कि मृतक राजेन्द्र पटैल और मुख्य आरोपी आनंद पटैल के बीच लंबे समय से रंजिश चल रही थी। इसी दुश्मनी के चलते आनंद पटैल ने राजेन्द्र की हर गतिविधि पर नजर रखने की जिम्मेदारी राजा पटैल और उसके साथियों को दे रखी थी।
मोबाइल फोन से भेजी जाती थी लोकेशन
पूछताछ में सामने आया कि घटना वाले दिन राजा पटैल ने मोबाइल फोन के जरिए राजेन्द्र पटैल की लोकेशन आनंद पटैल तक पहुंचाई थी। यही सूचना पूरी साजिश को अंजाम देने का आधार बनी।
दो हाईवा, दो लेन, एक ही मकसद
सबसे चौंकाने वाली बात यह निकली कि साजिश के तहत दो हाईवा डंपर पहले से ही तैनात कर दिए गए थे। एक भोपाल की ओर जाने वाली लेन पर, दूसरा जबलपुर की तरफ। मकसद साफ था, राजेन्द्र पटैल जिस भी दिशा में मिले, उसी तरफ से वारदात को अंजाम दिया जा सके। जैसे ही मौका मिला, हाईवा ने राजेन्द्र पटैल और उसके साथियों को कुचल दिया। बाकी सब हादसे जैसा दिखाने की कोशिश थी।
रातभर जंगलों में तलाश
साजिश उजागर होते ही पुलिस ने भरत पटैल और अनिल पटैल को सुंदरादेही, जबलपुर से गिरफ्तार किया। बाकी आरोपी घने जंगलों में भाग निकले। इसके बाद टीमों ने पूरी रात सर्च ऑपरेशन चलाया।
लगातार दबिश के बाद मुख्य आरोपी आनंद पटैल (लोधी) सहित कुल आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। इनमें अनुज पटैल, अरविन्द पटैल, नरेन्द्र ठाकुर और अमित खरे भी शामिल हैं।
किसकी क्या भूमिका रही
आनंद पटैल इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड निकला, वही हाईवा भी चला रहा था। अनुज पटैल घटना के वक्त उसके साथ मौजूद था। राजा पटैल ने मृतक की रेकी की, जबकि अरविन्द और भरत पटैल मुखबिर की भूमिका में थे। अनिल पटैल और नरेन्द्र ठाकुर ने आरोपियों को शरण दी, और अमित खरे ने पूरी घटना को हादसा दिखाने की सलाह दी थी।
क्या-क्या हुआ जप्त
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर घटना में इस्तेमाल हाईवा डम्पर, काले रंग की महिंद्रा थार, सफेद टोयोटा फॉर्च्यूनर और मोबाइल फोन बरामद कर लिए हैं।
अब आगे क्या
आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 105, 109(1), 103, 61(2)(क) और 249 के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। मामले की आगे की जांच जारी है।
एक टूटा हुआ मोनोग्राम, कुछ सीसीटीवी फुटेज, और पुलिस की रातभर की मेहनत, यही वो चीजें रहीं जिन्होंने एक "सड़क हादसे" को सुनियोजित हत्या की साजिश साबित कर दिया।
