Narsinghpur PWD Corruption : घटिया निर्माण कराकर करोड़ों के आसामी बने पीडबल्यूडी विभाग के प्रभारी कार्यपालन यंत्री और कोरी
Narsinghpur PWD Corruption : नरसिंहपुर जिले में बात अगर भ्रष्टाचार की करें तो सबसे बड़ा भ्रष्टाचारी लोक निर्माण विभाग में चल रहा है यहां पर विभाग के अधिकारी और कर्मचारी ठेकेदारों के साथ मिलकर जमकर करोड़ की कमाई कर रहे हैं ताजा मामला नरसिंहपुर जिले के मुख्यालय से गोटेगांव जोड़ने वाली तकरीबन 42 किलोमीटर लंबी सकल रोड मैं देखने को मिल रहा है जिसमें निर्माण के बाद से ही रोड की हालत ऐसी है कि आप अंदाजा लगा सकते हैं कि रोड निर्माण में किस तरीके का कार्य किया गया है आपको बता दें कि 6321.68 लाख रुपए की लागत से कृष्ण इंफ्रास्ट्रक्चर जयपुर राजस्थान के ठेकेदार ने यह रोड बनाई गई है आपको बता दें कि रोड का निर्माण अभी पूरी तरह से नहीं हुआ है इस रोड का निर्माण कार्य प्रारंभ 27. 05.2020 मैं प्रारंभ हुआ है और अनुबंध अनुसार कार्य पूर्णता की तिथि 26, 06.2023 है
आरोप है कि इन अधिकारियों ने ठेकेदार के साथ सांठगांठ कर घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग को नजरअंदाज किया। नियमानुसार, किसी भी बड़े सड़क निर्माण की निगरानी और गुणवत्ता परीक्षण की जिम्मेदारी इन्हीं अधिकारियों की होती है। यदि 63 करोड़ की लागत के बावजूद सड़क कुछ ही समय में खराब हो रही है, तो यह स्पष्ट है कि मौके पर मानकों का पालन नहीं कराया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाने के बदले अधिकारियों ने करोड़ों के वारे-न्यारे किए हैं, जिसका खामियाजा अब राहगीरों को भुगतना पड़ रहा है।
विभाग का गजब का कारनामा कोरोना काल में भी हुआ रोड का निर्माण प्रारंभ
आपको बता दे की नरसिंहपुर सकल गोटेगांव मार्ग का निर्माण कार्य भी विभाग ने कोरोना कल के समय ही शुरू कर दिया था जब पूरे देश में कोरोना की लहर चल रही थी लोगों को डर था मगर नरसिंहपुर के लोक निर्माण विभाग के अधिकारी रोड बनवाकर विकास कार्य में लगे हुए थे इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि विभाग और अधिकारी किस तरीके से मिले हुए हैंजिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध
सड़क निर्माण में बरती गई लापरवाही के तार सीधे तौर पर विभाग के उच्च अधिकारियों से जुड़ते नजर आ रहे हैं। वर्तमान में पदस्थ कार्यपालन यंत्री (EE) अरविंद किटहा और गोटेगांव अनुविभाग में पदस्थ अनुविभागीय अधिकारी (SDO) खेमचंद कोरी की भूमिका पर स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। बताया जाता है कि जब निर्माण कार्य मुख्य रूप से संचालित हो रहा था, तब खेमचंद कोरी नरसिंहपुर में ही उपयंत्री के रूप में पदस्थ थे।
आरोप है कि इन अधिकारियों ने ठेकेदार के साथ सांठगांठ कर घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग को नजरअंदाज किया। नियमानुसार, किसी भी बड़े सड़क निर्माण की निगरानी और गुणवत्ता परीक्षण की जिम्मेदारी इन्हीं अधिकारियों की होती है। यदि 63 करोड़ की लागत के बावजूद सड़क कुछ ही समय में खराब हो रही है, तो यह स्पष्ट है कि मौके पर मानकों का पालन नहीं कराया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाने के बदले अधिकारियों ने करोड़ों के वारे-न्यारे किए हैं, जिसका खामियाजा अब राहगीरों को भुगतना पड़ रहा है। 