नरसिंहपुर डार्लिंग की डर्टी साजिश,तीसरे पति' को रास्ते से हटाया,चौथी शादी की चाहत में पत्नी बनी कातिल
Narsinghpur crime news : नरसिंहपुर पुलिस ने एक ऐसी वारदात का खुलासा किया है जिसे सुनकर हर कोई दंग रह गया है। मामला किसी बाहरी दुश्मन का नहीं, बल्कि घर के भीतर पनपी एक साजिश का है। वारूरेवा नदी पुल के पास एक अज्ञात शव मिलने के बाद पुलिस ने जिस तत्परता से काम किया, उसने कुछ ही घंटों में हत्या की गुत्थी सुलझा दी। इस मामले ने साबित कर दिया है कि अपराध चाहे कितना भी शातिराना तरीके से किया जाए, कानून की नजरों से बचना नामुमकिन है। घटना की शुरुआत तब हुई जब 30 जून 2026 को पुलिस को एनएच-44 के पास झाड़ियों में एक अज्ञात पुरुष का शव मिलने की सूचना मिली। पुलिस टीम बिना समय गंवाए मौके पर पहुंची। वहां मौजूद साक्ष्यों को बारीकी से जुटाया गया और शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला चिकित्सालय भेजा गया। अगले दिन डोरीलाल मेहरा ने मॉर्चुरी में पहुंचकर शव की पहचान अपने पुत्र तुलसीराम मेहरा के रूप में की। मृतक की पहचान होते ही पुलिस के लिए जांच का दायरा साफ हो गया। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना ने तत्काल एक विशेष टीम का गठन किया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और एसडीओपी के मार्गदर्शन में काम कर रही इस टीम को तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी कैमरों और मुखबिरों के नेटवर्क का उपयोग करने की जिम्मेदारी दी गई। पुलिस को शक था कि यह कोई साधारण हत्या नहीं है, बल्कि इसके पीछे कोई गहरी रंजिश है। जांच आगे बढ़ी तो मृतक के निजी जीवन के कई पन्ने खुलने लगे। तुलसीराम और उसकी पत्नी सरोज मेहरा के बीच अक्सर झगड़े होते थे। पुलिस की पूछताछ और तकनीकी विश्लेषण से पता चला कि सरोज मेहरा पहले भी दो बार शादी कर चुकी थी और तुलसीराम उसका तीसरा पति था। लेकिन कहानी में मोड़ तब आया जब सरोज के किसी और के साथ प्रेम प्रसंग की जानकारी पुलिस को मिली। सरोज के पुरगवां निवासी महेंद्र मेहरा के साथ अवैध संबंध थे। जब पुलिस ने सरोज मेहरा को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो परतें अपने आप खुलती चली गईं। सरोज ने अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया कि तुलसीराम उसके और महेंद्र के बीच सबसे बड़ा रोड़ा बन रहा था। वह उससे पीछा छुड़ाकर चौथा विवाह करना चाहती थी। इस मकसद को पूरा करने के लिए उसने महेंद्र और उसके एक साथी विष्णू रजक के साथ मिलकर तुलसीराम को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने का प्लान बनाया। साजिश के मुताबिक, विष्णू रजक ने तुलसीराम को शराब पीने के बहाने वारूरेवा नदी पुल के पास बुलाया। वहां पहले से ही महेंद्र मेहरा मौजूद था। जैसे ही तुलसीराम वहां पहुंचा, दोनों आरोपियों ने मिलकर रस्सी से उसका गला घोंट दिया। हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने के लिए उन्होंने शव को झाड़ियों में फेंक दिया और वहां से फरार हो गए। पुलिस ने सरोज मेहरा, महेंद्र मेहरा और विष्णू रजक को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला समाज के लिए एक बड़ा सबक है कि क्षणिक सुख या गलत इरादों के लिए किया गया अपराध, अंत में सलाखों के पीछे ही ले जाता है।
