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सागर शराब कांड में नया मोड़, दिग्विजय सिंह बोले- गांवों तक शराब पहुंचाने वाला नेटवर्क सामने आए

सागर के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब त्रासदी के बाद दिग्विजय सिंह ने अस्पताल पहुंचकर मरीजों से मुलाकात की और गांवों तक शराब पहुंचने की पूरी सप्लाई चेन की जांच की मांग की।
Sagar News

Mp Big News,Sagar News : मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब से मची तबाही का असर अब सियासी गलियारों तक पहुंच गया है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह रविवार को खुद बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज पहुंचे और वहां भर्ती मरीजों से मिलकर हालात जाने। इस पूरे मामले में अब तक 16 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 30 से 35 लोग अभी भी अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। सिंह के दौरे ने एक बार फिर इस सवाल को हवा दे दी है कि आखिर गांव-गांव तक नकली और जहरीली शराब पहुंची कैसे, और इसके पीछे कौन जिम्मेदार है।

अस्पताल पहुंचकर मरीजों से की बातचीत

दिग्विजय सिंह ने मेडिकल कॉलेज में भर्ती पीड़ितों से सीधी बातचीत की और मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने कहा कि जो लोग भी इस घटना के लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

मरीजों से बातचीत के दौरान एक बात सामने आई जो पूरे मामले की जड़ बताई जा रही है। सिंह के मुताबिक ज्यादातर पीड़ितों ने बताया कि उन्होंने शराब बाहर से नहीं, बल्कि अपने ही गांव से खरीदी थी। यानी सप्लाई चेन कहीं दूर से नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर ही सक्रिय थी।

सवाल यही है - शराब गांव तक पहुंची कैसे?

कांग्रेस नेता का सबसे तीखा सवाल यही रहा कि इतनी बड़ी मात्रा में शराब गांवों के भीतर तक कैसे पहुंच गई। उन्होंने प्रशासन से पूछा कि क्या यह सप्लाई किसी लाइसेंसशुदा ठेकेदार के जरिए हुई, या फिर सीधे निर्माताओं ने इसे बांटा। सिंह का कहना है कि जब तक सप्लाई के इस स्रोत की गहराई से जांच नहीं होगी, तब तक असली दोषियों तक पहुंचना मुश्किल होगा।

हर पीड़ित के लिए अलग एफआईआर की मांग

सिंह ने प्रशासन से यह भी मांग की कि हर मामले में अलग-अलग एफआईआर दर्ज हो। उनका तर्क है कि हर पीड़ित की परिस्थिति अलग है, और अगर सारे मामलों को एक साथ जोड़ दिया गया तो जांच में पेच फंस सकता है और जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाएगा।

मुआवजे पर सरकार से स्पष्टता की मांग

इस त्रासदी ने कई घरों को तोड़ दिया है। कुछ परिवारों ने अपना इकलौता कमाने वाला सदस्य खो दिया, तो कई बच्चे अनाथ हो गए। दिग्विजय सिंह ने मांग की कि सरकार साफ करे कि मुआवजे का हकदार कौन-कौन है, और यह मदद हर प्रभावित परिवार तक पहुंचनी चाहिए।

गिरफ्तारी में देरी पर उठे सवाल

सिंह ने आरोपियों चंदू राजा और यशवंत ठाकुर की गिरफ्तारी में हो रही देरी पर भी नाराजगी जताई। साथ ही प्रशासन की बुलडोजर कार्रवाई पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि सिर्फ घरों का अगला हिस्सा तोड़कर दिखावे की कार्रवाई करने से मामला नहीं सुलझेगा, असली दोषियों को पकड़ना जरूरी है।

प्रशासन का एक्शन - पांच अवैध ठिकाने ध्वस्त

दूसरी तरफ सागर जिला प्रशासन ने भी हरकत में आते हुए तीन आरोपियों से जुड़े पांच अवैध प्रतिष्ठानों को सरकारी जमीन से हटा दिया है। सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल के अनुसार, मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर यह कार्रवाई तेज की गई है।

अब तक 30 लोग चिन्हित, 16 गिरफ्तार

पुलिस जांच में अब तक 30 आरोपियों की पहचान हो चुकी है, जिनके खिलाफ बांदा और विनायक थाना क्षेत्र में एफआईआर दर्ज की गई हैं। इनमें से 16 को गिरफ्तार किया जा चुका है। कलेक्टर पाल के मुताबिक प्रभावित इलाकों में तलाशी अभियान अभी भी जारी है, और उन ढाबों व दुकानों की भी जांच हो रही है जिनका संबंध पहले के एनडीपीएस मामलों से रहा है।

मरीजों की हालत में सुधार

राहत की बात यह है कि जिन मरीजों का इलाज चल रहा है, उनमें से कई की हालत अब स्थिर बताई जा रही है, और कुछ को अस्पताल से छुट्टी भी मिल चुकी है। हालांकि 16 लोगों की जान जाने का दर्द पूरे इलाके में अब भी भारी है, और लोग जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।